कोरोना वायरस को लेकर बीते 10 महीने से ज्यादा समय के दौरान सैकड़ों तरह के शोध अध्ययन और सर्वे हो चुके हैं। वायरस की प्रकृति से लेकर इसके प्रभाव तक और कोविड से बचाव से लेकर इसके उपचार तक तमाम शोध अध्ययन हुए हैं। एक बार कोरोना से संक्रमित होने के बाद मरीजों में दोबारा संक्रमण के भी मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में एक जिज्ञासा यह भी है कि कोरोना संक्रमण के बाद शरीर में जो इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है, वह कितने दिनों तक बनी रहती है। इस संबंध में हाल ही में हुए एक शोध अध्ययन में बताया गया है कि यह अवधि कम से कम पांच महीने तक की होती है। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से:
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एंटीबॉडी परीक्षण (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : ANI
दरअसल, अमेरिका में भारतीय मूल के शोधकर्ता द्वारा किए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि एक बार कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद शरीर में कम से कम पांच महीने के लिए कोरोना महामारी के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। एरिजोना विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस से संक्रमित हुए लगभग छह हजार लोगों के नमूनों में उत्पन्न हुए एंडीबॉडी का अध्ययन करने के बाद यह बात कही है।
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एंटीबॉडी परीक्षण (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : social media
एरिजोना विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर दीप्ता भट्टाचार्य ने कहा, “हमने स्पष्ट रूप से उच्च गुणवत्ता वाले एंटीबॉडी देखे जो संक्रमण होने के पांच से सात महीने बाद भी उत्पन्न हो रहे थे।” शोधकर्ताओं ने बताया कि जब वायरस कोशिकाओं को पहली बार संक्रमित करता है तब प्रतिरक्षा तंत्र, वायरस से लड़ने के लिए कुछ देर जीवित रहने वाली प्लाज्मा कोशिकाओं को तैनात करता है जो एंटीबॉडी उत्पन्न करती हैं।
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एंटीबॉडी परीक्षण (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
प्रो. दीप्ता ने कहा कि किसी व्यक्ति के संक्रमित होने के 14 दिन बाद तक ब्लड जांच में यह एंटीबॉडी सामने आती हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि प्रतिरक्षा तंत्र की प्रतिक्रिया के दूसरे चरण में दीर्घकाल तक जीवित रहने वाली प्लाज्मा कोशिकाएं पैदा होती हैं जो उच्च गुणवत्ता वाली एंटीबॉडी बनाती हैं जिनसे लंबे समय तक रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
प्रो. भट्टाचार्य और उनके सहयोगियों ने कई महीनों तक कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों में एंटीबॉडी के स्तर का अध्ययन किया। शोधकर्ताओं को पांच से सात महीने तक रक्त की जांच में कोरोना वायरस एंटीबॉडी प्रचुर मात्रा में मिले। उनका मानना है कि प्रतिरोधक क्षमता इससे अधिक समय तक भी रह सकती है। बता दें कि वैक्सीन विकसित कर रहे वैज्ञानिक इस बिंदु पर भी अध्ययन कर रहे हैं कि वैक्सीन से पैदा हुई इम्यूनिटी कितने दिनों तक बनी रहेगी।