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Covid-19: कोरोना के नए वैरिएंट्स की ये प्रकृति सबसे खतरनाक, विशेषज्ञों ने बताया कैसे रहें इससे सुरक्षित?

Mon, 27 May 2024 07:18 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 27 May 2024 07:18 PM IST
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Covid 19 New Variant Symptoms Experts Explain Precaution Tips in Hindi
कोरोना का खतरा - फोटो : istock

कोरोना का खतरा दुनिया के कई देशों में तेजी से बढ़ता देखा जा रहा है। नए वैरिएंट FLiRT (KP.1 और KP.2) ने कम समय में ही सिंगापुर, अमेरिका और भारत सहित कई देशों में संक्रमण को मामलों को बढ़ा दिया है। सिंगापुर में इस नए वैरिएंट के कारण 15 दिनों में ही संक्रमण के मामलों में 90 फीसदी से अधिक का उछाल आया है। भारत में नए वैरिएंट के मामले 325 के आंकड़े को पार कर गए हैं।



प्रारंभिक अध्ययनों के मुताबिक ज्यादातर संक्रमितों की सैंपल टेस्टिंग में KP.2 वैरिएंट को संक्रमण का मुख्य कारण माना जा रहा है। नए वैरिएंट की कुछ प्रवृत्ति इसे खतरनाक बनाती है जिसको लेकर विशेष सावधानी बरतते रहना जरूरी है।

अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक फिलर्ट भी ओमिक्रॉन का ही हिस्सा है, हालांकि इसमें कुछ अतिरिक्त म्यूटेशन देखे गए हैं जिसने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। कोरोना के नए वैरिएंट्स और इसके कारण होने वाली समस्याओं से बचाव के लिए कुछ विशेषज्ञ सालाना कोविड वैक्सीन लगवाने की सलाह देते रहे हैं।

Covid 19 New Variant Symptoms Experts Explain Precaution Tips in Hindi
कोरोना के नए वैरिएंट्स ने बढ़ाया खतरा - फोटो : istock

नए वैरिएंट्स की प्रकृति खतरनाक

यूएस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) द्वारा साझा की गई जानकारियों के मुताबिक KP.1 और KP.2 वैरिएंट में देखे गए नए म्यूटेशन इसकी संक्रामक क्षमता को बढ़ाने वाले हो सकते हैं। ये वैरिएंट शरीर में वैक्सीन या फिर पहले के संक्रमण से बनी प्रतिरक्षा प्रणाली को आसानी से चकमा देने में सफल हो रहा है। नए वैरिएंट की ये प्रकृति इसे खतरनाक बनाती है। ऐसे में टीकाकरण करा चुके लोगों को भी नए वैरिएंट्स से पूरी तरह से सुरक्षित नहीं माना जा सकता है।

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कोरोना के लक्षणों के बारे में जानिए - फोटो : Freepik

गंभीर लक्षणों का खतरा कम

येल मेडिसिन में संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ डॉ स्कॉट रॉबर्ट्स बताते हैं, नए वैरिएंट्स से संक्रमित अधिकतर लोगों में हल्के स्तर के लक्षण ही देखे जा रहे हैं। मरीजों को खांसी, बुखार, गले में खराश और दस्त के साथ कई तरह की गैस्ट्रिक परेशानियां हो सकती हैं। दुर्लभ मामलों में, विशेष रूप से कोमोरबिडिटी के शिकार लोगों को निमोनिया और सांस फूलने की समस्या हो सकती है।

डॉक्टर्स कहते हैं, ज्यादातर लोगों में हल्के लक्षण ही देखे जा रहे हैं और वे आसानी से ठीक भी हो रहे हैं। हालांकि संक्रमितों के अस्पताल में भर्ती होने या फिर आईसीयू जैसी जरूरतें कम देखी जा रही हैं। 

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कोरोना संक्रमण - फोटो : istock

कोरोना से बचाव के तरीके

सीडीसी विशेषज्ञों ने बताया नए वैरिएंट्स के कारण गंभीर रोग और मृत्य के जोखिम कम रिपोर्ट किए गए हैं, हालांकि ये अत्यधिक संक्रामक हो सकता है इसलिए कोरोना से बचाव करते रहना जरूरी है। संक्रमण के जोखिमों से बचे रहने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन, हाथों की स्वच्छता बनाए रखने और मास्क का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। KP.2 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 'वैरिएंट अंडर मॉनीटरिंग' के रूप में वर्गीकृत किया गया है। 

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वैक्सीनेशन जरूरी - फोटो : istock

टीकाकरण सबसे प्रभावी उपाय

सीडीसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कोरोना के खतरों से बचाव के लिए टीकाकरण अब भी सबसे प्रभावी तरीका है। वैक्सीन की मदद से संक्रमण के जोखिमों को कम किया जा सकता है। एक रिपोर्ट में कोरोना पर अध्ययन कर रहे वैज्ञानिकों की टीम ने कहा, जिस प्रकार से बार-बार कोरोना वायरस में म्यूटेशन हो रहा है, ऐसे में फ्लू की तरह ही हर साल कोविड के टीके भी दिए जाने चाहिए। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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