ब्रिटेन से भारत लौटे अखिल एनामशेट्टी का हैदराबाद के गांधी हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में पिछले 10 दिन से इलाज कर चल रहा है। पेशे से वकील अखिल कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। ब्रिटेन से भारत आने तक अखिल ने तमाम सावधानियां बरतीं और एक जिम्मेदार नागरिक होने का परिचय दिया।
#LadengeCoronaSe: ब्रिटेन से लौटा कोरोना का वह मरीज जो खुद अस्पताल में भर्ती हुआ
ब्रिटेन सरकार ने शुरुआत में नहीं उठाए कदम
कोरोना वायरस से निपटने के लिए ब्रिटेन ने शुरुआत में हर्ड इम्युनिटी का तरीका अपनाने का फैसला किया। इसके चलते उन्होंने ज्यादा से ज्यादा लोगों में संक्रमण फैलने दिया ताकि लोगों में खुद ही इस वायरस के खिलाफ नैचुरल इम्युनिटी पैदा हो जाए।
सरकार ने क्लबों, स्टेडियम, विश्वविद्यालयों और लोगों के बड़े पैमाने पर इकट्ठा होने वाली जगहों को बंद नहीं किया। सरकार के इस अप्रोच की आलोचना हुई। साथ ही हालात जब खराब होने लगे तो सरकार ने लॉकडाउन करने की दिशा में कदम उठाए।
हम यह सोच रहे थे कि क्या यूके में रहा जाए या वापस भारत लौट जाया जाए। इसी बीच भारत सरकार ने 16 मार्च को ऐलान कर दिया कि वह 18 मार्च से यूके और यूरोप से आने वाली फ्लाइट्स को भारत में लैंड नहीं होने देगी। इससे हम सभी में बेचैनी पैदा हो गई।
हड़बड़ाहट में बुक की भारत आने की फ्लाइट
हमने तत्काल टिकट बुक किए। अगले दिन यानी 17 मार्च की मेरी टिकट थी जो लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट से मुंबई होते हुए हैदराबाद आनी थी। मुझे यह नहीं पता था कि मैं संक्रमण का शिकार हो चुका हूं या नहीं। लेकिन, मैंने एहतियात बरतनी शुरू कर दी थी।
टिकट बुक करते वक्त ही मैंने अपने होमटाउन तेलंगाना के वारंगल में अपने पैरेंट्स को बता दिया था कि मैं टेस्ट होने से पहले उनसे नहीं मिलूंगा। मैंने उन्हें कह दिया था कि वे मुझे लेने हैदराबाद न आएं। साथ ही मुंबई में मैंने अपने दोस्तों को कह दिया कि वे मुझसे मिलने एयरपोर्ट न आएं। मैंने कोविड-19 के बारे में काफी पढ़ लिया था और मैं हर जरूरी सावधानी बरत रहा था।
घर नहीं बल्कि होटल चुना
मैं 19 मार्च को तड़के हैदराबाद पहुंच गया। मेरे गले में हल्की खराश थी और मैं हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (आरजीआईए) पर मौजूद हेल्थ डेस्क पर पहुंच गया। मैंने उन्हें अपनी ट्रैवल हिस्ट्री बताई और अपने लक्षणों के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने मुझे बताया मेरा क्वारंटीन में जाना जरूरी नहीं है और मुझे सुबह गांधी हॉस्पिटल जाना चाहिए। अगली सुबह हॉस्पिटल जाने तक मैं होटल में रुका और वहां मैंने सभी तरह की सतर्कता बरती। यहां तक कि मैंने रूम बॉय को भी अपने कमरे में नहीं आने दिया।
टेस्ट रिपोर्ट से हुई हैरत
मैंने टेस्ट कराया और अगले दिन उसकी रिपोर्ट आई। मैं यह देखकर हैरत में था कि मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव थी। मैं और मेरे पेरेंट्स पढ़े-लिखे हैं और हमें कोरोना के बारे में पहले से ही कुछ जानकारी थी। इस वजह से हम डरे नहीं। हालांकि, मुझे बाकी कोई तकलीफ नहीं हो रही थी, लेकिन मुझे कुछ दफा सांस लेने में दिक्कत हुई।
हॉस्पिटल का माहौल
गांधी हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में माहौल आपको डराएगा नहीं। यहां काफी सफाई है। मेरे वार्ड में पर्याप्त रोशनी और वेंटिलेशन है। इससे मैं एक्टिव रह पाता हूं। हर दिन बेडशीट और हजमट सूट बदला जा रहा है। हमें पैकेज्ड वॉटर मिल रहा है और पैक्ड फूड ही ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर में मिलता है। डॉक्टर ब्रेकफास्ट के बाद हमें देखने आते हैं।