पिछले दो साल से दुनियाभर में कोरोना का संक्रमण लोगों के लिए गंभीर समस्याओं का कारण बना हुआ है। तमाम तरह की दीर्घकालिक जटिलताओं के साथ कोरोना का संक्रमण मौत का भी कारण बन रहा है। भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां अब तक कोरोना की दो लहरें आ चुकी हैं, जिसमें 4.79 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कोविड-19 के कारण लोगों में सांस की बीमारी, ब्रेन फॉग और बालों के झड़ने जैसी कई तरह की गंभीर दीर्घकालिक समस्याएं हो सकती हैं। इस बीच हाल ही में हुए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि कोविड-19 का संक्रमण लोगों की प्रजनन क्षमता पर भी असर डाल सकता है।
सावधान: कोरोना संक्रमण के कारण हो सकता है इस तरह का गंभीर दुष्प्रभाव, अध्ययन में हुआ बड़ा खुलासा
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कोरोना संक्रमण का प्रजनन स्वास्थ्य पर असर
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि कोरोनावायरस संक्रमण से उबरने के दो महीने बाद भी लोगों में शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता में कमी देखने को मिली है। बेल्जियम के 120 पुरुषों पर किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि कोरोनावायरस पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर असर डाल सकता है। अध्ययन में शामिल लोगों को सीवियर एक्यूट रेस्पोरेटरी सिंड्रोम की समस्या थी, लेकिन उन्हें कोरोनावायरस से संक्रमित होने के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं थी।
अध्ययन में क्या पता चला?
अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों की औसत आयु 18 से 69 वर्ष की थी और वह सभी कोरोना के संक्रमण को मात दे चुके थे। अध्ययन के पहले से ही इनमें से आठ प्रतिभागियों में प्रजनन संबंधी समस्याएं थीं। इस अध्ययन के लिए 53 दिनों के अंतराल पर दो बार प्रतिभागियों के वीर्य और रक्त का सैंपल लेकर उसकी जांच की गई। निष्कर्ष से पता चला कि लगभग 60 प्रतिशत प्रतिभागियों में कोविड-19 होने के बाद पहले महीने के दौरान औसतन शुक्राणु की गतिशीलता कम थी।
संक्रमितों में देखे गए दुष्प्रभाव
शोधकर्ताओं ने पाया कि कोरोना वायरस से संक्रमित होने के एक से दो महीने बाद 37 फीसदी लोग और इससे आगे 28 फीसदी लोगों की शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता में कमी देखने को मिली। हालांकि संक्रमण की गंभीरता और शुक्राणुओं की संख्या का कोई संबंध पता नहीं चला। इसका मतलब है कि हल्के या तीव्र, सभी तरह के लक्षण वाले रोगियों में परिणाम समान ही देखे गए।
पहले के अध्ययनों में भी मिल चुके हैं संकेत
कोरोना संक्रमण के प्रजनन क्षमता की कमी को लेकर इससे पहले के अध्ययनों में भी वैज्ञानिक इस बात की पुष्टि कर चुके हैं। साल 2020 में हुए एक अन्य अध्ययन में भी शोधकर्ताओं ने पुरुषों के वीर्य में कोरोनावायरस की उपस्थिति का पता लगाया था। यह प्रवृत्ति केवल कुछ महीनों के लिए ही देखी गई थी। कोरोना संक्रमण और प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में जानने के लिए अभी और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है।
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स्रोत और संदर्भ
Sperm quality and absence of SARS-CoV-2 RNA in semen after COVID-19 infection: a prospective, observational study and validation of the SpermCOVID test
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