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सावधान: कोरोना संक्रमण के कारण हो सकता है इस तरह का गंभीर दुष्प्रभाव, अध्ययन में हुआ बड़ा खुलासा

Mon, 27 Dec 2021 05:48 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क,अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क,अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Mon, 27 Dec 2021 05:48 PM IST
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COVID-19 infection can reduce sperm count and cause infertility, latest study reveals
कोरोना के दुष्प्रभाव - फोटो : istock

पिछले दो साल से दुनियाभर में कोरोना का संक्रमण लोगों के लिए गंभीर समस्याओं का कारण बना हुआ है। तमाम तरह की दीर्घकालिक जटिलताओं के साथ कोरोना का संक्रमण मौत का भी कारण बन रहा है। भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां अब तक कोरोना की दो लहरें आ चुकी हैं, जिसमें 4.79 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कोविड-19 के कारण लोगों में सांस की बीमारी, ब्रेन फॉग और बालों के झड़ने जैसी कई तरह की गंभीर दीर्घकालिक समस्याएं हो सकती हैं। इस बीच हाल ही में हुए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि कोविड-19 का संक्रमण लोगों की प्रजनन क्षमता पर भी असर डाल सकता है।



जर्नल फर्टिलिटी एंड स्टेरिलिटी में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि कोरोना के संक्रमण के कारण लोगों में शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता में कमी आ सकती है। इसका असर प्रजनन स्वास्थ्य पर पड़ सकता है, जिसको लेकर लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। आइए आगे की स्लाइडों में इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं।

COVID-19 infection can reduce sperm count and cause infertility, latest study reveals
प्रजनन स्वास्थ्य पर असर - फोटो : Pixabay

कोरोना संक्रमण का प्रजनन स्वास्थ्य पर असर
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि कोरोनावायरस संक्रमण से उबरने के दो महीने बाद भी लोगों में शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता में कमी देखने को मिली है। बेल्जियम के 120 पुरुषों पर किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि कोरोनावायरस पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर असर डाल सकता है। अध्ययन में शामिल लोगों को सीवियर एक्यूट रेस्पोरेटरी सिंड्रोम की समस्या थी, लेकिन उन्हें कोरोनावायरस से संक्रमित होने के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं थी।

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कोरोना का प्रजनन पर प्रभाव - फोटो : Pixabay

अध्ययन में क्या पता चला?
अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों की औसत आयु 18 से 69 वर्ष की थी और वह सभी कोरोना के संक्रमण को मात दे चुके थे। अध्ययन के पहले से ही इनमें से आठ प्रतिभागियों में प्रजनन संबंधी समस्याएं थीं। इस अध्ययन के लिए 53 दिनों के अंतराल पर दो बार प्रतिभागियों के वीर्य और रक्त का सैंपल लेकर उसकी जांच की गई। निष्कर्ष से पता चला कि लगभग 60 प्रतिशत प्रतिभागियों में कोविड-19 होने के बाद पहले महीने के दौरान औसतन शुक्राणु की गतिशीलता कम थी।

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कोरोना संक्रमण का प्रजनन पर असर - फोटो : iStock

संक्रमितों में देखे गए दुष्प्रभाव
शोधकर्ताओं ने पाया कि कोरोना वायरस से संक्रमित होने के एक से दो महीने बाद 37 फीसदी लोग और इससे आगे 28 फीसदी लोगों की शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता में कमी देखने को मिली। हालांकि संक्रमण की गंभीरता और शुक्राणुओं की संख्या का कोई संबंध पता नहीं चला। इसका मतलब है कि हल्के या तीव्र, सभी तरह के लक्षण वाले रोगियों में परिणाम समान ही देखे गए। 

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कोरोना के साइड इफेक्ट्स - फोटो : PIB

पहले के अध्ययनों में भी मिल चुके हैं संकेत
कोरोना संक्रमण के प्रजनन क्षमता की कमी को लेकर इससे पहले के अध्ययनों में भी वैज्ञानिक इस बात की पुष्टि कर चुके हैं। साल 2020 में हुए एक अन्य अध्ययन में भी शोधकर्ताओं ने पुरुषों के वीर्य में कोरोनावायरस की उपस्थिति का पता लगाया था। यह प्रवृत्ति केवल कुछ महीनों के लिए ही देखी गई थी। कोरोना संक्रमण और प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में जानने के लिए अभी और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है।



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स्रोत और संदर्भ
Sperm quality and absence of SARS-CoV-2 RNA in semen after COVID-19 infection: a prospective, observational study and validation of the SpermCOVID test

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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