कोरोना वायरस के संक्रमण से दुनियाभर के कई देश चिंता में हैं और इसे रोकने के लिए लगातार शोध और अध्ययन हो रहे हैं। भारत में भी हर दिन कोरोना संक्रमण के नए मामले सामने आ रहे हैं। इतना तो तय है कि कोरोना वायरस एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति में फैल रहा है। इसके बढ़ते संक्रमण के संबंध में इंडियन मेडिकल काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) यानी भारतीय आयुर्विज्ञान शोध परिषद ने मैथमैटिकल मॉडलिंग पर आधारित तथ्यों की एक स्टडी की है, जिसमें कई तरह के चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
कोरोना वायरस ग्रस्त एक भारतीय चार अन्य लोगों को कर सकता है संक्रमित, आईसीएमआर ने बताए उपाय
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हालांकि आईसीएमआर का यह अध्ययन फरवरी अंत तक के आंकड़ों पर आधारित है। तब देश में कोरोना संक्रमण पहले स्टेज में ही था। तभी के आंकड़ों के आधार पर इस स्टडी में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस से से संक्रमित एक भारतीय औसतन 1.5 लोगों को संक्रमित कर सकता है, जबकि यह संक्रमण बुरी तरह फैला तो हर नया संक्रमित व्यक्ति अन्य चार लोगों को कोरोना से संक्रमित कर सकता है।
मैथमेटिकल मॉडल बेस्ड एप्रोच आधारित आईसीएमआर के इस अध्ययन का नाम है— प्रूडेंट पब्लिक हेल्थ इंटरवेंशन स्ट्रेटजी टू कंट्रोल द कोरोना वायरस डिजीज ट्रांसमिशन इन इंडिया। इस अध्ययन में वायरस के तेजी से फैलने के बारे में आंकड़े जुटाए गए हैं। बताया गया है कि नए आंकड़ों में एक से कम संक्रमण होने का मतलब है कि वायरस खत्म होने वाला है। वहीं दो नए संक्रमण होने का तात्पर्य है कि गहन जांच और ठोस कदम के बिना इस पर काबू पाना मुश्किल है।
हालांकि यह स्टडी फरवरी के अंत तक के आंकड़ों पर ही आधारित है, जब कोरोना संक्रमण भारत में पहले स्टेज में ही था। अब संक्रमण के नए मामले आने कम नहीं हुए तो देश कोरोना संक्रमण के स्टेज-2 से स्टेज-3 यानी कम्यूनिटी ट्रांसमिशन की स्थिति में चला जाएगा, जो स्थिति भयावह हो सकती है। मालूम हो कि देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 25 मार्च बुधवार रात तक 600 के पार हो चुकी है।
आईसीएमआर ने बताए उपाय भी
आईसीएमआर की ओर से हुई इस स्टडी में कुछ कारगर उपाय भी बताए गए हैं। बताया गया है कि लोगों को क्वारंटीन करने से इस महामारी का संक्रमण 62 से 89 फीसदी तक कम किया जा सकता है। सोशल डिस्टेंसिंग इस महामारी को काबू करने का प्रमुख उपाय साबित होगा। आईसीएमआर के महामारी विशेषज्ञ प्रमुख डॉ. रमन आर गंगखेडकर ने कहा कि हमारा उद्देश्य आने वाले समय में बढ़ते संक्रमितों की संख्या का पता लगाना नहीं था, लेकिन यह तकनीक तौर पर उपयोगी साबित हो सकता है। लॉकडाउन और थर्मल स्क्रीनिंग जैसे कदम हमारी स्टडी के अनुरूप हैं।