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कोरोना वायरस: आखिर इस बीमारी से मरने की कितनी संभावना होती है?

Thu, 26 Mar 2020 03:32 PM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अपराजिता शुक्ला Updated Thu, 26 Mar 2020 03:32 PM IST
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coronavirus how effect to human body chances to death after covid 19 infection
Coronavirus - फोटो : PTI

ब्रितानी सरकार के वैज्ञानिक सलाहकारों का मानना है कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण मरने की आशंका केवल 0.5 फीसदी से 1 फीसदी के ही बीच है। कोरोना संक्रमण के मामलों में ये मृत्यु दर कम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया भर में इस वायरस के कारण मरने वालों की दर 4 फीसदी है। मार्च की 23 तारीख तक ब्रिटेन में ये दर 5 फीसदी तक थी क्योंकि यहां संक्रमण के सभी मामलों की पुष्टि नहीं हुई थी। कोरोना वायरस संक्रमण की सूरत में किसका टेस्ट होना है और किसका नहीं, इसे लेकर सभी देशों के अपने अलग-अलग मानदंड है। इस कारण अलग-अलग देशों में कोरोना संक्रमण के मामले और इससे होने वाली मौतों के आंकड़े भ्रामक हो सकते हैं। साथ ही मृत्यु की दर व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सेवाओं तक उसकी पहुंच पर भी निर्भर करती है।


 
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CoronaVirus - फोटो : Social Media
कोरोना से मेरी जान को कितना खतरा है ?
जानकारों का कहना है कि कोरोना संक्रमण से उन लोगों की जान खतरा हो सकता है जो बूढ़े हैं और जिन्हें पहले से ही दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं हैं। लंदन के इंपीरियल कॉलेज के ताजा आकलन के अनुसार 80 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए औसत मृत्यु दर से लगभग 10 गुना अधिक है जबकि 40 से कम उम्र वालों के लिए ये कम है।

ब्रिटेन सरकार के मुख्य चिकित्सा सलाहकार, प्रोफेसर क्रिस व्हिट्टी कहते हैं कि भले ही बूढ़ों के लिए ये दर अधिक हैं, "लेकिन अधिकतर बूढ़ों में ये मामूली या मध्यम लक्षणों वाली की बीमारी का कारण बनता है।"


 
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

वो चेतावनी देते हैं कि हमें ये नहीं मानना चाहिए कि इसके संक्रमण से युवाओं को कम खतरा है। कई युवा भी इस वायरस के कारण आईसीयू में पहुंच चुके हैं। वो कहते हैं कि कोरोना से खतरे को इसे सीधे तौर पर उम्र के साथ जोड़ कर देखना सही नहीं है। पहली बार चीन में कोरोना वायरस के संक्रमण के 44 हजार मामलों का विश्लेषण किया गया जिसमें पाया गया कि जिन लोगों को पहले से ही मधुमेह यानी डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, दिल या सांस की बीमारी थी, उनमें मृत्यु की दर कम से कम पांच गुना अधिक थी।



 
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कोरोना वायरस

ये सभी कारक एक साथ इंसान के शरीर में काम करते हैं। अब तक हमारे पास ये जानकारी नहीं है कि दुनिया अलग-अलग कोने में अलग-अलग प्रकार के लोगों में इस वायरस के कारण किस तरह का खतरा है। फिलहाल कोरोना संक्रमितों में मृत्यु दर को देखते हुए ये कहा जा सकता है कि किन लोगों को इससे अधिक खतरा है, लेकिन इससे किसी खास प्रकार के लोगों को कितना और किस तरह का खतरा है ये नहीं कहा जा सकता।


 
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- फोटो : पीटीआई
संक्रमण के मामलों में मृत्यु दर कुल औसत मृत्यु दर नहीं है।
वायरस संक्रमण के अधिकतर मामलों में व्यक्ति में मामूली लक्षण देखने को मिलते हैं और इस कारण वो डॉक्टरों के पास पहुंचते ही नहीं। ऐसे में स्पष्ट कहा जा सकता है कि संक्रमण के अधिकतर मामले दर्ज ही नहीं हो पाते। इसी साल मार्च 17 को ब्रिटेन के लिए मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार सर पैट्रिक वॉलेंस ने अनुमान लगाया कि देश में कोरोना संक्रमण के करीब 55 हजार मामले हो सकते हैं, हालांकि अब तक यहां केवल 2,000 मामलों की ही पुष्टि हुई है।

कोरोना के कारण हुई मौतों को अगर 2,000 से आप विभाजित करें तो आपको जो मृत्यु दर मिलेगी को उससे कहीं अधिक होगी जब आप मौतों को 55 हजार से विभाजित करेंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ब्रिटेन में अब तक कोरोना संक्रमण के 6,600 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और यहां इस कारण अब तक 335 मौतें हुई हैं।


 
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