चार साल बीत जाने के बाद कोरोना अब भी वैश्विक स्वास्थ्य के लिए बड़ा जोखिम बना हुआ है। समय-समय पर इसके मामलों में इजाफा देखा जाता रहा है। नवंबर-दिसंबर 2023 के बाद कोरोना की रफ्तार नियंत्रित नजर आ रही थी, हालांकि हालिया रिपोर्ट्स में एक बार फिर से संक्रमण बढ़ने की खबर है।
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बढ़ते संक्रमण को लेकर अलर्ट
विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में उतार-चढ़ाव और नए वैरिएंट्स की संक्रामकता दर के कारण फिर से कोरोना के मामलों में उछाल देखा जा रहा है। कोरोना को लेकर हाल में हुए अध्ययनों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताते हुए कहा था, वायरस खुद को जीवित रखने के लिए लगातार म्यूटेट हो रहा है, ऐसे में भविष्य में और नए वैरिएंट्स आने और इसके संक्रमितों की संख्या में उछाल का खतरा हो सकता है।
भले ही आपका वैक्सीनेशन हो गया है, फिर भी कोरोना से बचाव को लेकर सावधानी बरतते रहने की सलाह दी गई है।
ओमिक्रॉन का JN.1 वैरिएंट प्रमुख कारण
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना के नए म्यूटेंट पहले की तुलना में अधिक संक्रामक हो सकते हैं और इसके कारण संक्रमण के मामलों में वृद्धि की भी आशंका है। फिलहाल पिछले एक साल में कोरोना के मामलों में उछाल के लिए मुख्यरूप से ओमिक्रॉन के JN.1 वैरिएंट को प्रमुख कारण माना जाता रहा है। इस वैरिएंट की संक्रामकता दर अधिक देखी जाती रही है पर ये गंभीर रोगों का कारण नहीं बन रहा है।
हालांकि बड़ा सवाल ये है कि उत्तर भारत में अब गर्मियों की शुरुआत हो रही है, अधिक तापमान वाले माहौल में संक्रमण के उछाल का क्या कारण हो सकता है?
तापमान और कोरोना का संबंध
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अब तक मौसम और कोरोना के संबंधों को लेकर कई अध्ययन हुए हैं। कुछ रिपोर्ट्स से पता चलता है कि तापमान में गिरावट की स्थिति अन्य वैरिएंट्स की तरह कोरोना में भी वृद्धि को बढ़ाने वाली हो सकती है, पर पिछले चार साल के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि कोरोना का तापमान से स्पष्ट संबंध नहीं है। गर्मियों में पहले भी संक्रमण में उछाल देखा जाता रहा है। शोधकर्ता कहते हैं, कोरोना हम सभी के बीच बना हुआ है।
समय-समय पर ये कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में संक्रमण का कारण बनता रहता है और उनसे अन्य लोगों को भी संक्रमण हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि कोरोना से बचाव के उपायों को लेकर हम हमेशा अलर्ट रहें।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना की टेस्टिंग रेट भी पिछले दिनों लो रही है। कम परीक्षण दर से पता चलता है कि मामलों की वास्तविक संख्या कहीं अधिक हो सकती है। भारत में पिछले चार से साल में विभिन्न वैरिएंट के कारण संक्रमण के मामले देखे गए हैं।
कोरोना के खतरों को देखते हुए सभी लोगों को निरंतर कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते रहना चाहिए। मास्क पहनना, हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखना न सिर्फ आपको कोरोना से बचा सकता है साथ ही इससे फ्लू जैसे अन्य रोगों का भी जोखिम कम होता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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