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Covid-19: मई के बाद पहली बार एक दिन में सबसे ज्यादा केस दर्ज, JN.1 वैरिएंट को खतरनाक बनाती है इसकी ये प्रकृति

Sat, 23 Dec 2023 08:12 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 23 Dec 2023 08:12 PM IST
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Covid-19 cases in india highest in the past seven months jn.1 Faster incubation period
जैसलमेर में मिले दो कोरोना पॉजिटिव - फोटो : सोशल मीडिया

भारत सहित दुनिया के कई देशों में पिछले कुछ दिनों से कोरोना संक्रमण के मामलों में अचानक वृद्धि रिपोर्ट की जा रही है। चीन में नवंबर में बढ़े संक्रमण के मामलों के बाद सिंगापुर और फिर भारत में भी हालात बिगड़ने की खबर है। शनिवार (23 दिसंबर) के आंकड़ों की बात करें तो देश में कोरोना संक्रमण के दैनिक मामलों ने करीब आठ महीनों की रिकॉर्ड तोड़ दिया है।



केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में शुक्रवार को एक दिन में 752 मामले दर्ज किए गए हैं, जो 21 मई के बाद सबसे अधिक है। इसके साथ देश में कोरोना के सक्रिय मामले 3,000 का आंकड़ा पार कर 3,420 हो गए हैं। पिछले 24 घंटों में चार लोगों की मौत (दो केरल से और एक-एक राजस्थान और कर्नाटक) भी हुई है।

कोविड-19 के बढ़ते मामलों में के लिए दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे JN.1 वैरिएंट को प्रमुख कारण माना जा रहा है। अब तक हुए अध्ययनों में कोरोना के इस वैरिएंट को ओमिक्रॉन के पिछले वैरिएंट्स से मिलता-जुलता ही बताया गया है, पर कुछ बातें हैं जो JN.1 वैरिएंट की प्रकृति को खतरनाक बनाती हैं। आइए जानते हैं।

Covid-19 cases in india highest in the past seven months jn.1 Faster incubation period
कोरोना की जांच (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : ANI

क्या कहते हैं स्वास्थ्य संगठन?

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) सहित दुनिया के तमाम स्वास्थ्य संगठनों का कहना है कि कोरोनावायरस अपने आपको जीवित रखने के लिए लगातार म्यूटेट हो रहा है। JN.1 उसी की एक रूप है। संक्रमण की वर्तमान शीतकालीन लहर ने अचानक से चिंता जरूर बढ़ा दी है पर ज्यादातर रोगियों में इस वैरिएंट के कारण हल्के लक्षण ही देखे जा रहे हैं, बड़ी संख्या में लोग घर पर रहकर ठीक भी हो रहे हैं। हालांकि JN.1 में अतिरिक्त म्यूटेशन के कारण इसके कारण तेजी से संक्रमण बढ़ने का जोखिम जरूर देखा जा रहा है। 

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कोरोना संक्रमण के लक्षण - फोटो : istock

क्या JN.1 के लक्षण पहले के वैरिएंट्स से अलग हैं?

इस नए सब-वैरिएंट को लेकर हुए अब तक के अध्ययनों से पता चलता है कि JN.1 वैरिएंट से संक्रमित लोगों में भी उसी तरह की दिक्कतें देखी जा रही हैं जैसा कि ओमिक्रॉन के पहले के वैरिएंट्स में थी। सीडीसी ने जेएन.1 की प्रकृति पर चर्चा करते हुए एक रिपोर्ट में कहा, लक्षणों के प्रकार और वे कितने गंभीर हो सकते हैं, यह आमतौर पर किसी व्यक्ति की प्रतिरक्षा और समग्र स्वास्थ्य पर निर्भर करता है, न कि वैरिएंट पर। फिर भी ज्यादातर लोगों में बुखार, गले में दर्द-खराश, सर्दी-जुकाम जैसी दिक्कतें ही देखी जा रही हैं।

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कोरोना के नए वैरिएंट्स - फोटो : Pixabay

इनक्यूबेशन पीरियड बढ़ा रहा है चिंता

JN.1 की प्रकृति को समझने के लिए किए गए अध्ययनों में पाया गया है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड जरूर चिंता का कारण हो सकता है। इनक्यूबेशन पीरियड वह समय होता है जो किसी व्यक्ति के रोग पैदा करने वाले जीव (जैसे बैक्टीरिया, वायरस या कवक) के संपर्क में आने के बाद संक्रमण के लक्षण विकसित होने में लगता है।

नए कोरोना वैरिएंट्स में ट्रैक किया गया है कि इनके इनक्यूबेशन पीरियड में क्रमिक गिरावट आई है। सीडीसी द्वारा प्रकाशित शोध में पाया गया कि यह समय औसतन 2 से 3 दिन तक कम हो सकता है।

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कोरोना से बचाव जरूरी - फोटो : iStock

क्या है विशेषज्ञों की राय?

कोरोना के बढ़ते जोखिमों को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नए वैरिएंट के कारण वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ी है। इसकी प्रकृति को अच्छी तरह से समझने के लिए लगातार शोध किए जा रहे हैं। हम सभी को कोरोना से बचाव के लिए उपायों में कोई असावधानी नहीं बरतनी चाहिए। कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते रहना जरूरी है, मास्क जरूर पहनें और सावधानी बरतें।


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स्रोत और संदर्भ
Are COVID-19 symptoms still the same?

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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