कोरोनावायरस के कारण वैश्विक स्तर पर संक्रमण के मामलों में उछाल देखा जा रहा है। यूएस-यूके, सिंगापुर सहित कई देशों में अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने की खबर है, मौत के मामले भी कुछ देशों में अधिक देखे जा रहे हैं। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सिंगापुर और अमेरिका में संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए एक और लहर की भी आशंका जताई जा रही है।
Covid-19: मस्तिष्क की कार्यक्षमता को प्रभावित कर रहा है कोविड-19, सिजोफ्रेनिया जैसे गंभीर रोगों का बढ़ा खतरा
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कोरोना के कारण सिजोफ्रेनिया का खतरा
कोरोना के कारण होने वाली समस्याओं के बारे में जानने के लिए किए गए एक नए अध्ययन में मस्तिष्क के संज्ञानात्मक कार्य पर इसके दुष्प्रभावों को लेकर लोगों को अलर्ट किया है। अध्ययन में पाया गया है कि जिन लोगों में संक्रमण के कारण मध्यम से गंभीर बीमारी देखी गई थी, उनमें सिजोफ्रेनिया स्पेक्ट्रम एंड साइकोटिक डिसऑर्डर (एसएसपीडी) जैसी बीमारियों का जोखिम काफी अधिक हो सकता है।
ये स्थिति सोच और व्यवहार के तरीकों को प्रभावित करने वाली हो सकती है। अब तक 65 साल से अधिक उम्र वाले लोगों में सिजोफ्रेनिया का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।
क्या है सिजोफ्रेनिया?
सिजोफ्रेनिया, एक गंभीर मस्तिष्क विकार है जिसके कारण सोच में विकृति के साथ कई प्रकार की भावनात्मक समस्याएं हो सकती हैं। ये बीमारी व्यक्ति के सोचने, चीजों को महसूस करने और व्यवहार करने के तरीके को भी प्रभावित करती है। सिजोफ्रेनिया से पीड़ित लोगों को ऐसा लग सकता है कि जैसे उनका वास्तविकता से संपर्क टूट गया है, जो कुछ उनके साथ हो रहा है वो वास्तविक नहीं है। इससे प्रभावित लोगों को लग सकता है कि उन्हें कोई नियंत्रित कर रहा है।
अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि कोरोना के कारण होने वाले दुष्प्रभावों में सिजोफ्रेनिया की समस्या बड़े खतरे के तौर पर उभर रही है।
अध्ययन में क्या पता चला?
शोधकर्ताओं की टीम ने कोविड-19 के कारण होने वाली समस्याओं को जानने के लिए 1.93 करोड़ से अधिक लोगों के डेटा का विश्लेषण किया। अध्ययन के निष्कर्ष में टीम ने बताया कि आश्चर्यजनक रूप से हमारे डेटा से संकेत मिलता है कि युवा व्यक्तियों में भी कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद एसएसपीडी का खतरा बढ़ जाता है। कम उम्र में होने वाली इस तरह की समस्या का क्वालिटी ऑफ लाइफ पर नकारात्मक असर हो सकता है।
हम पहले भी कोरोना के कारण मानसिक स्वास्थ्य विकारों, अवसाद के बढ़े हुए मामले देख रहे हैं, पर सिजोफ्रेनिया जैसा मानसिक विकार बड़ा खतरा हो सकता है।
क्या कहते हैं शोधकर्ता?
वेस्ट वर्जीनिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आसिफ रहमान कहते हैं, हमारा अध्ययन कोरोनावायरस के ज्ञात न्यूरोट्रोपिज्म और कोविड-19 संक्रमण के बाद प्रमुख मनोरोग विकारों के बढ़ते जोखिमों को लेकर अलर्ट करता है। अब तक सिजोफ्रेनिया के लगभग 20% मामले 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में देखे जाते रहे हैं, कोरोना संक्रमण ने कम उम्र के लोगों में इसका खतरा बढ़ा दिया है।
यह स्पष्ट नहीं कहा जा सकता कि संक्रमण से हल्के लक्षण वाले लोगों में इसका खतरा है या नहीं, पर कोरोना के जोखिमों को लेकर सभी को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।
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स्रोत और संदर्भ
COVID‐19 and the increase in schizophrenia incidence in the future
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