देश और दुनिया में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच सभी को इसकी एक कारगर और सुरक्षित वैक्सीन का इंतजार है। अबतक रूस और चीन ने कोरोना के जिन टीकों को मंजूरी दी है, उनका तीसरे चरण का ट्रायल पूरा नहीं हुआ है। भारत में तीन वैक्सीन कैंडिडेट्स कामयाबी के करीब हैं, जो अंतिम चरणों के ट्रायल से गुजर रही हैं। यहां की देसी कोरोना वैक्सीन Covaxin से लोगों को बड़ी उम्मीद है, जिसे अंतिम यानी तीसरे चरण के ट्रायल की अनुमति मिल गई है। इसे भारत बायोटेक कंपनी ने आईसीएमआर यानी भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की मदद से तैयार किया है। 26 हजार से ज्यादा लोगों पर इस वैक्सीन का ट्रायल किया जाएगा।
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सांकेतिक तस्वीर
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भारतीय दवा नियामक डीसीजीआई की विशेषज्ञ समिति की हाल की बैठक में यह फैसला लिया गया। समिति ने प्रोटोकॉल में थोड़ा बहुत संशोधन किया है। भारत बायोटेक कंपनी जल्द ही वैक्सीन के आखिरी चरण का ट्रायल करेगी। संभवत: अगले महीने यह ट्रायल शुरू होगा, जिसमें 25 हजार से ज्यादा वॉलेंटियर्स शामिल होंगे। वैक्सीन की पहली डोज देने के 28 दिन बाद लोगों को दूसरी डोज दी जाएगी। बता दें कि इस देसी वैक्सीन के शुरुआती चरणों के ट्रायल के अच्छे परिणाम आए हैं।
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कोवाक्सिन वैक्सीन
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खबरों के मुताबिक, बीते पांच अक्तूबर को डीसीजीआई की विशेषज्ञ समिति की बैठक में कंपनी को फेज-3 ट्रायल के प्रोटोकॉल को दोबारा जमा करने के लिए कहा गया था। समिति का मानना था कि तीसरे चरण की क्लिनिकल स्टडी का डिजाइन तो संतोषजनक था, लेकिन उसकी शुरुआत दूसरे फेज के सेफ्टी और इम्युनोजेनिसिटी डेटा में से सही डोज तय करने के बाद होनी चाहिए। समिति ने कंपनी से पहले उस डेटा की मांग की थी, जिसे सब्मिट किया गया।
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सांकेतिक तस्वीर
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भारत बायोटेक कंपनी की योजना के मुताबिक, Covaxin का आखिरी ट्रायल दिल्ली के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र और असम में किया जा सकता है। आखिरी चरण के ट्रायल के परिणाम फरवरी तक आने की उम्मीद है। इसके बाद कंपनी वैक्सीन के मंजूरी और मार्केटिंग की अनुमति के लिए आवेदन करेगी।
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Covaxin Update
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ज्यादा असरदार होगी वैक्सीन
भारत बायोटेक ने अपनी वैक्सीन में Alhydroxiquim-II नाम का अजुवंट जोड़ा है, जो एक तरह का बूस्टर है। यह वैक्सीन के इम्यून रेस्पांस को बढ़ाता है। दरअसल, अजुवंट एक ऐसा बूस्टर एजेंट होता है, जिसे मिलाने पर वैक्सीन की क्षमता बढ़ जाती है और टीका लगने के बाद शरीर में पहले की अपेक्षा ज्यादा एंटीबॉडीज बनती है। ऐसी वैक्सीन लंबे समय तक बीमारी से सुरक्षा देती है।