ब्रिटेन दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जिसने फाइजर/बायोएनटेक की कोरोना वायरस वैक्सीन को व्यापक इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी है। ब्रिटेन के स्वास्थ्य नियामक एमएचआरए (मेडिसीन एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी) ने बताया कि ये वैक्सीन कोरोना वायरस के संक्रमितों को 95 फीसदी तक ठीक कर सकती है और अगले हफ्ते से लॉन्च किए जाने के लिहाज से ये सुरक्षित है। कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान अगले कुछ दिनों में शुरू हो सकता है। शुरू में ये उन लोगों को दिया जाएगा जो ज्यादा जरूरतमंद होंगे या फिर जिनकी सेहत नाजुक हालात से गुजर रही होगी।
Coronavirus Vaccine: अगले हफ्ते लॉन्च हो सकती है कोरोना की ये वैक्सीन, जानिए पहले किसे और कब से मिलेगी
कैसे काम करती है ये वैक्सीन?
ये एक नई तरह की एमआरएनए कोरोना वैक्सीन है, जिसमें महामारी के दौरान इकट्ठा किए कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड के छोटे टुकड़ों को इस्तेमाल किया गया है। कंपनी के अनुसार जेनेटिक कोड के छोटे टुकड़े शरीर के भीतर रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाते हैं और कोविड-19 के खिलाफ शरीर को लड़ने के लिए तैयार करते हैं। इससे पहले कभी इंसानों में इस्तेमाल के लिए एमआरएनए वैक्सीन को मंजूरी नहीं दी गई है। हालांकि क्लिनिकल ट्रायल के दौरान लोगों को इस तरह की वैक्सीन के डोज दिए गए हैं।
एमआरएनए वैक्सीन को इंसान के शरीर में इंजेक्ट किया जाता है। ये इम्यून सिस्टम को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाने और टी-सेल को एक्टिवेट कर संक्रमित कोशिाकओं को नष्ट करने के लिए कहती है। इसके बाद जब ये व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित होता है तो उसके शरीर में बनी एंटीबॉडी और टी-सेल वायरस से लड़ने का काम करना शुरू कर देते हैं।
ये किन्हें मिलेगी और कब तक?
विशेषज्ञों ने इसके लिए एक प्राथमिकता सूची तैयार की है और इसमें ज्यादा जोखिम वाले लोगों को वरीयता दी जानी है। इसमें केयर होम में रहने वाले लोग, स्टाफ, 80 साल से ज्यादा उम्र के लोग और स्वास्थ्य एवं सामाजिक सेवाओं से जुड़े वर्कर्स। उन्हें वैक्सीन की पहली खेप दी जाएगी। इनमें से कुछ को तो अगले हफ्ते ही वैक्सीन मिलेगी। 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों और पहले से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे कम उम्रवालों के लिए व्यापक टीकाकरण का अभियान साल 2021 तक स्टॉक उपलब्ध होते ही चलाया जाएगा। ये वैक्सीन इंजेक्शन के तौर पर दी जाएगी जिसमें दो खुराक लेनी होगी। पहली खुराक लेने के 21 दिन बाद दूसरी खुराक बूस्टर डोज के तौर पर दी जाएगी। इम्यूनिटी डेवलप होने में कुछ हफ्ते लग जाएंगे।
दूसरे कोरोना वैक्सीन का क्या हुआ?
कुछ अन्य वैक्सीन प्रोजेक्ट्स पर अभी काम चल रहे हैं जिन्हें लेकर माना जा रहा है कि उन्हें जल्द ही मंजूरी मिल सकती है। इनमें से एक मॉडर्ना वैक्सीन है जिसमें फाइजर की तरह ही एमआरएनए तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। ब्रिटेन ने मॉडर्ना वैक्सीन की 70 लाख खुराक के लिए पहले से ही ऑर्डर कर रखा है। माना जा रहा है कि वसंत तक इसकी खेप तैयार हो जाएगी। ब्रिटेन ने इसके अलावा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन के दस करोड़ खुराक के लिए पहले से ऑर्डर कर रखा है। इस वैक्सीन में नुकसान रहित विषाणु का इस्तेमाल किया गया है जिसमें कुछ ऐसे बदलाव किए गए हैं ताकि ये कोरोना वायरस जैसा लगे।
रूस भी स्पुतनिक नाम की कोरोना वैक्सीन पर काम कर रहा है। इसके अलावा चीन की मिलिट्री ने एक वैक्सीन को मंजूरी दी है जिसे कैनसिनो बॉयोलॉजिक्स ने मंजूरी दी है। ये दोनों वैक्सीन ऑक्सफोर्ड वाली वैक्सीन के तर्ज पर काम कर रहे हैं।