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Coronavirus Vaccine: अगले हफ्ते लॉन्च हो सकती है कोरोना की ये वैक्सीन, जानिए पहले किसे और कब से मिलेगी

Sat, 05 Dec 2020 08:05 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Sat, 05 Dec 2020 08:05 PM IST
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Coronavirus vaccine updates in hindi Pfizer vaccine may be launched next week
कोरोना वायरस वैक्सीन - फोटो : iStock

ब्रिटेन दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जिसने फाइजर/बायोएनटेक की कोरोना वायरस वैक्सीन को व्यापक इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी है। ब्रिटेन के स्वास्थ्य नियामक एमएचआरए (मेडिसीन एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी) ने बताया कि ये वैक्सीन कोरोना वायरस के संक्रमितों को 95 फीसदी तक ठीक कर सकती है और अगले हफ्ते से लॉन्च किए जाने के लिहाज से ये सुरक्षित है। कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान अगले कुछ दिनों में शुरू हो सकता है। शुरू में ये उन लोगों को दिया जाएगा जो ज्यादा जरूरतमंद होंगे या फिर जिनकी सेहत नाजुक हालात से गुजर रही होगी। 



ब्रिटेन ने पहले से ही इस टीके की चार करोड़ डोज के लिए ऑर्डर दिया हुआ है, हर व्यक्ति को टीके के दो डोज दिए जाएंगे यानी अभी दो करोड़ लोगों को टीका मिल सकता है। ये दुनिया की सबसे तेजी से विकसित वैक्सीन है जिसे बनाने में 10 महीने लगे। आम तौर पर ऐसी वैक्सीन के तैयार होने में एक दशक तक का वक्त लग जाता है। हालांकि जानकारों का कहना है कि टीके के बावजूद लोगों को संक्रमण रोकने के नियमों का पालन करते रहना चाहिए। 

Coronavirus vaccine updates in hindi Pfizer vaccine may be launched next week
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कैसे काम करती है ये वैक्सीन?

ये एक नई तरह की एमआरएनए कोरोना वैक्सीन है, जिसमें महामारी के दौरान इकट्ठा किए कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड के छोटे टुकड़ों को इस्तेमाल किया गया है। कंपनी के अनुसार जेनेटिक कोड के छोटे टुकड़े शरीर के भीतर रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाते हैं और कोविड-19 के खिलाफ शरीर को लड़ने के लिए तैयार करते हैं। इससे पहले कभी इंसानों में इस्तेमाल के लिए एमआरएनए वैक्सीन को मंजूरी नहीं दी गई है। हालांकि क्लिनिकल ट्रायल के दौरान लोगों को इस तरह की वैक्सीन के डोज दिए गए हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

एमआरएनए वैक्सीन को इंसान के शरीर में इंजेक्ट किया जाता है। ये इम्यून सिस्टम को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाने और टी-सेल को एक्टिवेट कर संक्रमित कोशिाकओं को नष्ट करने के लिए कहती है। इसके बाद जब ये व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित होता है तो उसके शरीर में बनी एंटीबॉडी और टी-सेल वायरस से लड़ने का काम करना शुरू कर देते हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

ये किन्हें मिलेगी और कब तक?

विशेषज्ञों ने इसके लिए एक प्राथमिकता सूची तैयार की है और इसमें ज्यादा जोखिम वाले लोगों को वरीयता दी जानी है। इसमें केयर होम में रहने वाले लोग, स्टाफ, 80 साल से ज्यादा उम्र के लोग और स्वास्थ्य एवं सामाजिक सेवाओं से जुड़े वर्कर्स। उन्हें वैक्सीन की पहली खेप दी जाएगी। इनमें से कुछ को तो अगले हफ्ते ही वैक्सीन मिलेगी। 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों और पहले से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे कम उम्रवालों के लिए व्यापक टीकाकरण का अभियान साल 2021 तक स्टॉक उपलब्ध होते ही चलाया जाएगा। ये वैक्सीन इंजेक्शन के तौर पर दी जाएगी जिसमें दो खुराक लेनी होगी। पहली खुराक लेने के 21 दिन बाद दूसरी खुराक बूस्टर डोज के तौर पर दी जाएगी। इम्यूनिटी डेवलप होने में कुछ हफ्ते लग जाएंगे।  

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भारत में कोरोना वैक्सीन - फोटो : Pixabay

दूसरे कोरोना वैक्सीन का क्या हुआ?

कुछ अन्य वैक्सीन प्रोजेक्ट्स पर अभी काम चल रहे हैं जिन्हें लेकर माना जा रहा है कि उन्हें जल्द ही मंजूरी मिल सकती है। इनमें से एक मॉडर्ना वैक्सीन है जिसमें फाइजर की तरह ही एमआरएनए तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। ब्रिटेन ने मॉडर्ना वैक्सीन की 70 लाख खुराक के लिए पहले से ही ऑर्डर कर रखा है। माना जा रहा है कि वसंत तक इसकी खेप तैयार हो जाएगी। ब्रिटेन ने इसके अलावा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन के दस करोड़ खुराक के लिए पहले से ऑर्डर कर रखा है। इस वैक्सीन में नुकसान रहित विषाणु का इस्तेमाल किया गया है जिसमें कुछ ऐसे बदलाव किए गए हैं ताकि ये कोरोना वायरस जैसा लगे। 

रूस भी स्पुतनिक नाम की कोरोना वैक्सीन पर काम कर रहा है। इसके अलावा चीन की मिलिट्री ने एक वैक्सीन को मंजूरी दी है जिसे कैनसिनो बॉयोलॉजिक्स ने मंजूरी दी है। ये दोनों वैक्सीन ऑक्सफोर्ड वाली वैक्सीन के तर्ज पर काम कर रहे हैं।

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