अमेरिका में कोरोना का टीकाकरण अभियान काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। बताया जा रहा है कि यहां अब तक 10 लाख से ज्यादा लोगों को कोरोना का टीका लगाया जा चुका है। दरअसल, अमेरिका ने दो कंपनियों फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी है। पहले फाइजर की वैक्सीन को मंजूरी मिली थी, जिसके तहत टीकाकरण अभियान शुरू हुआ और बाद में मॉडर्ना की वैक्सीन को भी मंजूरी मिल गई। हालांकि इन सबके बीच दावा किया जा रहा है कि अमेरिका में कई लोग ऐसे भी हैं, जो कोरोना की वैक्सीन नहीं लगवाना चाहते।
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18 से 29 नवंबर तक 12,648 अमेरिकी वयस्कों पर किए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक, लगभग 10 में से 4 अमेरिकी नागरिकों का कहना है कि वे 'निश्चित रूप से' या 'शायद' वैक्सीन नहीं लेंगे। यह सर्वेक्षण अमेरिका के प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा किया गया है।
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हालांकि यह सितंबर में किए गए उस सर्वे के परिणामों से बेहतर जरूर है, जिसमें पता चला था कि सर्वे में शामिल लगभग 50 फीसदी लोग टीका नहीं लेने के बारे में सोच रहे थे। लेकिन यह आंकड़ा अभी भी देश की पर्याप्त रूप से सुरक्षा के लिए जितना होना चाहिए, उससे कम है। विशेषज्ञों के मुताबिक, हर्ड इम्यूनिटी प्राप्त करने के लिए देश की लगभग 70 फीसदी आबादी को टीका लगाने की जरूरत है या उनमें कोरोना के खिलाफ प्राकृतिक एंटीबॉडी होनी चाहिए।
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विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोना की वैक्सीन नहीं लेने के पीछे एक कारण ये हो सकता है कि कोविड वैक्सीन का अनुसंधान और विकास महज आठ महीनों में किया गया है जबकि आमतौर पर कोई भी वैक्सीन विकसित करने और उसके प्रभावों आदि की जांच करने में वैज्ञानिकों को सालों लग जाते हैं। ऐसे में लोगों को लग रहा होगा कि शायद ये टीके प्रभावशाली न हों या उनसे शरीर को कोई नुकसान हो सकता है।
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अमेरिका में लोगों के बीच वैक्सीन को लेकर फैले अविश्वास को खत्म करने का तरीका ये है कि राष्ट्रीय तौर पर एक मजबूत और विश्वसनीय अभियान चलाया जाए और लोगों को वैक्सीन के फायदों और साइड-इफेक्ट्स (दुष्प्रभावों) से अवगत कराया जाए। अमेरिका का स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग इस प्रयास पर अरबों रुपये खर्च करने पर विचार कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हालांकि अमेरिका में कुछ राज्य ऐसे भी हैं, जो स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभियान चलाए जाने का इंतजार नहीं कर रहे हैं बल्कि लोगों को वैक्सीन लेने के प्रति जागरूक करने के लिए उन्होंने खुद के अभियान शुरू कर दिए हैं। आखिरकार, अगर सामान्य जीवन में फिर से लौटने का कोई मौका है, तो वो सामूहिक टीकाकरण ही है।