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Coronavirus Vaccine: अगले दो सालों में बाजार में आ सकती हैं कोरोना की 20 वैक्सीन, विशेषज्ञ ने बताया

Tue, 15 Dec 2020 10:47 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Tue, 15 Dec 2020 10:47 AM IST
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Coronavirus Vaccine update expert says in the next two years 20 covid vaccines may come in the market
कोरोना वायरस वैक्सीन - फोटो : iStock

कोरोना महामारी की शुरुआत के समय हमें ये चेतावनी दी गई थी कि किसी भी बीमारी के लिए टीका विकसित करने में कई साल लगते हैं। इसलिए टीके को लेकर बहुत अधिक उम्मीद ना करें। लेकिन अब दस महीने बीतते-बीतते ही कोरोना वायरस महामारी के टीके दिए जाने लगे हैं और इन टीकों को ईजाद करने में जो कंपनियां आगे हैं, उनमें से कई के पीछे घरेलू कंपनियां हैं। नतीजतन, निवेश विश्लेषकों का अनुमान है कि इनमें से कम से कम दो कंपनियां (अमेरिकी बायोटेक कंपनी मॉडर्ना और जर्मनी की बायो-एन-टेक) अपनी साझेदार कंपनी, अमेरिका की फाइजर के साथ मिलकर अगले साल अरबों डॉलर का व्यापार करेंगी। लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि असल में वैक्सीन बनाने वाले इसके अलावा कितने रुपये का व्यापार करने वाले हैं। जिस तरह से इन टीकों को बनाने के लिए फंड किया गया है और जिस तरह से बड़ी संख्या में कंपनियां वैक्सीन निर्माण के लिए सामने आई हैं, उससे तो यही लगता है कि बड़ा मुनाफा बनाने का कोई भी अवसर लंबे समय तक नहीं रहेगा।  

Coronavirus Vaccine update expert says in the next two years 20 covid vaccines may come in the market
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

किन लोगों ने लगाया है पैसा

महामारी के दौर में वैक्सीन की जरूरत को देखते हुए सरकार और फंड देने वालों ने वैक्सीन बनाने की योजना और परीक्षण के लिए अरबों पाउंड की राशि दी। गेट्स फाउंडेशन जैसे संगठनों ने खुले दिल से इन योजनाओं का समर्थन किया। इसके अलावा कई लोगों ने खुद भी आगे आकर इन योजनाओं का समर्थन किया। अलीबाबा के फाउंडर जैक मा और म्यूजिक स्टार डॉली पार्टन ने भी आगे आकर इन योजनाओं के लिए फंड दिया। साइंस डेटा एनालिटिक्स कंपनी एयरफिनिटी के अनुसार, कोविड का टीका बनाने और परीक्षण के लिए सरकारों की ओर से 6.5 बिलियन पाउंड दिये गए हैं। वहीं गैर-लाभार्थी संगठनों की ओर से 1.5 बिलियन पाउंड दिया गया। 

कंपनियों के अपने खुद के निवेश से सिर्फ 2.6 बिलियन पाउंड ही आए। इनमें से कई कंपनियां बाहरी फंडिंग पर बहुत अधिक निर्भर करती हैं। ये एक बहुत बड़ा कारण रहा कि बड़ी कंपनियों ने वैक्सीन परियोजनाओं को फंड देने में बहुत जल्दबाजी नहीं दिखाई। 

Coronavirus Vaccine update expert says in the next two years 20 covid vaccines may come in the market
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

अतीत में इस तरह की आपात स्थिति में टीके का निर्माण करना बहुत अधिक लाभदायक साबित नहीं हुआ है। वैक्सीन खोजने की प्रक्रिया में समय लगता है। गरीब देशों को वैक्सीन की बहुत बड़ी खेप की जरूरत होती है, लेकिन अधिक कीमत के कारण वे इसे ले नहीं सकते। धनी देशों में दैनिक तौर पर ली जाने वाली दवाओं से अधिक मुनाफा कमाया जाता है। जीका और सार्स जैसी बीमारियों के लिए टीके बनाने वाली कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। वहीं दूसरी ओर फ्लू जैसी बीमारियों के लिए बनी वैक्सीन का बाजार अरबों का है। ऐसे में अगर कोविड-19 फ्लू की तरह ही बना रहा और इसके लिए सालाना तौर पर टीका लगाने की जरूरत पड़ती रही तो यह वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों के लिए लाभदायक हो सकता है। लेकिन उन कंपनियों के लिए ही जो सबसे अधिक असरदार रहेंगी, साथ ही बजट में भी होंगी। 

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Coronavirus Vaccine update expert says in the next two years 20 covid vaccines may come in the market
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

वे क्या कीमत लगा रहे हैं?

कुछ कंपनियां वैश्विक संकट के इस समय में लाभ बनाती हुई नहीं दिखना चाहती हैं, खासतौर पर बाहर से इतनी अधिक फंडिंग मिलने के बाद। अमेरिका की बड़ी दवा निर्माता कंपनियां जैसे जॉनसन एंड जॉनसन और ब्रिटेन की एस्ट्राजेनेका ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी स्थित बायोटेक कंपनी के साथ मिलकर काम रही हैं। उन्होंने अपनी ओर से यह वादा किया है कि वे अपनी वैक्सीन की कीमत उतनी ही रखेंगी जिससे सिर्फ उनकी लागत निकल आए। अभी की बात करें तो एस्ट्राजेनेका के संदर्भ में माना जा रहा है कि यह सबसे सस्ती कीमत (चार डॉलर यानी करीब 300 रुपये प्रति डोज) में उपलब्ध होगी। 

मॉडर्ना एक छोटी बायोटेक्नॉलजी कंपनी है, जो कि सालों से आरएनए वैक्सीन के पीछे की तकनीक पर काम कर रही है। उनके प्रति डोज की कीमत करीब 37 डॉलर यानी दो हजार सात रुपये से कुछ अधिक है। उनका उद्देश्य कंपनी के शेयरधारकों के लिए लाभ कमाना है। हालांकि इसका यह मतलब नहीं कि ये कीमतें तय कर दी गई हैं। 

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Coronavirus Vaccine update expert says in the next two years 20 covid vaccines may come in the market
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

आमतौर पर दवा कंपनियां अलग-अलग देशों में अलग-अलग तरह से शुल्क देती हैं। यह सरकारों पर निर्भर करता है। एस्ट्राजेनेका ने सिर्फ महामारी तक के लिए कीमतें कम रखने का वादा किया है। हो सकता है कि वो अगले साल से इसकी तुलनात्मक रूप से अधिक कीमत वसूलने लगें। यह पूरी तरह महामारी के स्वरूप पर निर्भर करता है। बार्कलेज में यूरोपियन फार्मास्यूटिकल की प्रमुख एमिली फील्ड कहती हैं, 'अभी अमीर देशों की सरकारें अधिक कीमत देंगी। वे वैक्सीन या डोज को लेकर इतने उतावले हैं कि बस कैसे भी महामारी का अंत कर सकें।' वे आगे कहती हैं, 'संभवत: अगले साल जैसे-जैसे बाजार में और अधिक वैक्सीन आने लगेंगी, प्रतिस्पर्धा के कारण हो सकता है वैक्सीन के दाम भी कम हो जाएं।' 

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