भारत में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले बढ़कर अब एक करोड़ तीन लाख के करीब पहुंचने वाले हैं जबकि मरने वालों की संख्या एक लाख 49 हजार के पार चली गई है। हालांकि खुशी की बात ये है कि केंद्र सरकार की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी (एसईसी) ने कुछ शर्तों के साथ ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका द्वारा विकसित वैक्सीन 'कोविशील्ड' के आपातकालीन इस्तेमाल को मंजूरी देने की सिफारिश की है। मंजूरी पाने वाली यह भारत की पहली कोरोना वैक्सीन हो सकती है, लेकिन इसपर अभी अंतिम निर्णय ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) को लेना है। 'कोविशील्ड' के अलावा फाइजर भी भारत में अपनी वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी के लिए आवेदन कर चुका है। आइए जानते हैं कि अन्य वैक्सीन की अपेक्षा आखिर 'कोविशील्ड' वैक्सीन भारत के लिए क्यों खास है...
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Coronavirus Vaccine: भारत के लिए 'कोविशील्ड' क्यों है खास? अन्य वैक्सीन में क्या दिक्कतें, जानिए सबकुछ
Fri, 01 Jan 2021 09:16 PM IST
सोनू शर्मा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Fri, 01 Jan 2021 09:16 PM IST
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Covishield, Vaccine
- फोटो : Twitter@AdarPoonawala
कोविशील्ड वैक्सीन
- फोटो : twitter@serum institute
भारतीय कंपनी कर रही है इसका उत्पादन
- 'कोविशील्ड' वैक्सीन के उत्पादन की जिम्मेदारी पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के पास है। पिछले महीने आई एक रिपोर्ट में यह कहा गया था कि सीरम इंस्टीट्यूट ने वैक्सीन की चार करोड़ डोज तैयार कर ली है, लेकिन उसका इस्तेमाल भारत में किया जाएगा या वैश्विक स्तर पर उसकी आपूर्ति की जाएगी, यह स्पष्ट नहीं है। हालांकि विशेषज्ञ कहते हैं कि चूंकि एक भारतीय कंपनी ही वैक्सीन का उत्पादन कर रही है, तो निश्चित तौर पर इसका ज्यादा फायदा भारत को ही मिलेगा। ऐसे में हो सकता है कि भारत को वैक्सीन की ज्यादा खुराक मिले, जिससे यहां टीकाकरण का काम तेजी से चलेगा।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
90 फीसदी तक असरदार है यह वैक्सीन
- 'कोविशील्ड' क्लीनिकल ट्रायल के शुरुआती नतीजों में 90 फीसदी तक असरदार पाई गई है और इसी के आधार पर ब्रिटेन ने इस वैक्सीन को मंजूरी भी दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वैक्सीन सभी उम्र के लोगों पर असरदार है। यही वजह है कि इस वैक्सीन को पहले से ही भारत के लिए सबसे अच्छा माना जा रहा था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
'कोविशील्ड' का रखरखाव है आसान
- 'कोविशील्ड' वैक्सीन का रखरखाव अन्य कंपनियों की वैक्सीन के मुकाबले बेहद ही आसान है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसे सामान्य तापमान पर भी स्टोर करके रखा जा सकता है जबकि मॉडर्ना और फाइजर कंपनियों द्वारा विकसित वैक्सीन को रखने के लिए माइनस 20 से माइनस 80 डिग्री तक के तापमान की जरूरत होती है। चूंकि भारत में अभी डीप फ्रीजर की व्यवस्था उतनी नहीं है, ऐसे में मॉडर्ना और फाइजर की वैक्सीन का रखरखाव थोड़ा मुश्किल है, जबकि ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन को तो सामान्य फ्रीज में भी रखा जा सकता है।
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- फोटो : iStock
अन्य वैक्सीन के मुकाबले 'कोविशील्ड' की कीमत होगी कम
- सीरम इंस्टीट्यूट के मुताबिक, 'कोविशील्ड' की कीमत अन्य कंपनियों की वैक्सीन के मुकाबले कम होगी। जहां इसकी एक डोज की कीमत करीब 500 रुपये होगी, तो वहीं फाइजर की एक डोज की कीमत 19.50 डॉलर यानी करीब 1450 रुपये, जबकि मॉडर्ना की वैक्सीन की कीमत 25 से 37 डॉलर यानी करीब 1850-2700 रुपये के बीच होगी। ये भी एक वजह है कि 'कोविशील्ड' भारत के लिए सबसे उपयुक्त बताई जा रही है।