जैसे-जैसे कोरोना की वैक्सीन को लेकर दुनियाभर में चर्चा तेज हो रही है, वैसे-वैसे संक्रमण के मामले भी तेजी से बढ़ने लगे हैं। दुनियाभर में अब तक इस वायरस से छह करोड़ 82 लाख से भी अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि 15 लाख 56 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं भारत की बात करें तो यहां अब तक 97 लाख से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं और ये आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। हालांकि अब माना जा रहा है कि वैक्सीन जल्द ही भारतीय बाजारों में उपलब्ध हो जाएगी, लेकिन उसमें कई तरह की चुनौतियां होंगी। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं वैक्सीन से जुड़े हर जरूरी सवाल के जवाब...
{"_id":"5fcfb6be49393060f67a43a1","slug":"coronavirus-vaccine-in-india-covid-19-super-thermos-coronavirus-question-answer","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Coronavirus Vaccine: भारत में वैक्सीन के लिए 'सुपर थर्मस' की पड़ सकती है जरूरत, विशेषज्ञ से जानें इसके बारे में सबकुछ","category":{"title":"Health & Fitness","title_hn":"हेल्थ एंड फिटनेस","slug":"fitness"}}
Coronavirus Vaccine: भारत में वैक्सीन के लिए 'सुपर थर्मस' की पड़ सकती है जरूरत, विशेषज्ञ से जानें इसके बारे में सबकुछ
Wed, 09 Dec 2020 08:44 AM IST
सोनू शर्मा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Wed, 09 Dec 2020 08:44 AM IST
विज्ञापन
भारत में कोरोना वैक्सीन
- फोटो : iStock
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
- फोटो : Twitter/Air
साधारण इंफ्लुएंजा वैक्सीन को कितने डिग्री तापमान पर रखा जाता है?
- दिल्ली स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के डॉ. घनश्याम पांग्टेय बताते हैं, 'साधारण फ्लू वैक्सीन को दो से आठ डिग्री तापमान पर रखा जाता है। उसके लिए फ्रीजर की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन कुछ वैक्सीन ऐसी होती हैं, जिनको माइनस 10 डिग्री तक तापमान की जरूरत पड़ती है, उसमें साधारण फ्रिज के फ्रीजर से काम चल जाता है, लेकिन कोविड की वैक्सीन को माइनस 70 डिग्री तापमान की जरूरत होगी। उसके लिए ड्राई आइस की जरूरत पड़ेगी, जो सॉलिडिफाई कार्बन-डाईऑक्साइड होती है। यह विस्फोटक होती है, छूने पर हाथ को नुकसान पहुंच सकता है।'
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
- फोटो : Twitter/Air
क्या माइनस 70 डिग्री सेल्सियस पर रखी जाने वाली वैक्सीन अभी तक कहीं दी गई है?
- डॉ. घनश्याम पांग्टेय बताते हैं, 'अफ्रीका में जब इबोला वायरस आया था, तब एक वैक्सीन दी गई थी, जिसे माइनस 70 डिग्री तो नहीं, लेकिन हां उसे माइनस 50 से 60 डिग्री तक तापमान चाहिए होता है। उन्होंने सहारा मरुस्थल में रहने वाले लोगों तक भी यह वैक्सीन पहुंचाई। वहां सुपर थर्मस की बड़ी भूमिका रही। इस थर्मस में ड्राई आइस या बर्फ रखकर वैक्सीन स्टोरी की जाती है।'
विज्ञापन
विज्ञापन
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
- फोटो : Twitter/Air
ऐसी वैक्सीन जो माइनस 70 डिग्री सेल्सियस तक रखनी होती है, उनका वितरण कैसे होगा?
- डॉ. घनश्याम पांग्टेय के मुताबिक, 'अभी तक फाइजर की वैक्सीन है, जिसे रखने के लिए माइनस 70 डिग्री सेल्सियस तक तापमान की जरूरत होती है। इस प्रकार की वैक्सीन का वितरण बड़ी चुनौती होगा। हो सकता है इस वैक्सीन को बड़े शहरों में बड़े-बड़े फ्रीजर लगाकर वितरित किया जाए। वहीं ग्रामीण इलाकों तक ऐसी वैक्सीन पहुंचाने के लिए सुपर थर्मस का प्रयोग किया जा सकता है। इस पर हमारी सरकार बहुत महीन तरीके से काम कर रही है। इसमें भारतीय सेना की मदद भी ली जा सकती है।'
विज्ञापन
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
- फोटो : Twitter/Air
वैक्सीन के स्टोरेज और डिस्ट्रिब्यूशन पर आप क्या कहेंगे?
- डॉ. घनश्याम पांग्टेय कहते हैं, 'वैक्सीन के डिस्ट्रीब्यूशन में कोल्ड चेन मैनेजमेंट बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पोलियो की वैक्सीन में भी कोल्ड चेन की अहम भूमिका रहती है। जैसा कि सभी जानते हैं कि हम दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादकों में से एक हैं और हम इसके कोल्ड चेन मैनेजमेंट में भी बहुत आगे हैं। हमें पता है कि किस तरह वैक्सीन को फ्रीजर में रखकर लोगों तक पहुंचानी है। पोलियो से जंग में हमने बड़े-बड़े शहरों से लेकर दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों तक वैक्सीन डिलीवर की। हमने छोटे-बड़े हर प्रकार के फ्रिज का इस्तेमाल किया।'