भारत के टीकाकरण अभियान को 'दुनिया का सबसे बड़ा' टीकाकरण अभियान माना जा रहा है, जिसकी शुरुआत शनिवार यानी 16 जनवरी से हो गई। पहले दिन एक लाख 91 हजार से अधिक लोगों को टीका लगाया गया। सबसे पहले टीका पाने वालों में डॉक्टर, नर्स और सफाईकर्मी शामिल हैं। दरअसल, सरकार ने पहले ही यह योजना बना ली थी कि पहले चरण में कितने लोगों को वैक्सीन दी जाएगी, फिर दूसरे चरण में कितने लोगों को और इसके लिए किस तरह की तैयारियां करनी हैं, आदि। सरकार की योजना जुलाई 2021 तक 30 करोड़ भारतीयों को कोरोना वैक्सीन देने की है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, प्राथमिकता के आधार पर पहले तीन करोड़ स्वास्थ्यकर्मी और फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन लगाई जाएगी। आइए जानते हैं आखिर कोरोना टीकाकरण अभियान को भारत ने कैसे अंजाम दिया?
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कोरोना टीकाकरण अभियान को आखिर भारत ने कैसे अंजाम दिया, क्या थी योजना? जानिए सबकुछ
Sun, 17 Jan 2021 08:42 PM IST
सोनू शर्मा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Sun, 17 Jan 2021 08:42 PM IST
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भारत में कोरोना टीकाकरण
- फोटो : PTI
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : PTI
पहले किया गया कोरोना वैक्सीन का ड्राई रन
- भारत ने लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाए जाने की मुहिम शुरू करने से पहले ही उसकी तैयारियां चालू कर दी थीं, जिसे ड्राई रन कहा गया। यह ड्राई रन पहले 28 दिसंबर और 29 दिसंबर 2020 को किया गया और उसके बाद दो जनवरी को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ड्राई रन किया गया। दरअसल, इसका मकसद किसी को वैक्सीन देना नहीं था, बल्कि जब वैक्सीन आ जाती, तो ये प्रक्रिया सही से काम करेगी या नहीं और इसमें क्या सुधार लाने होंगे, ड्राई रन के माध्यम से इसे समझने की कोशिश की गई।
कोविशील्ड
- फोटो : twitter@serum institute
फिर टीकाकरण के लिए दो वैक्सीन को दी गई मंजूरी
- भारत में कोरोना के खिलाफ टीकाकरण अभियान के लिए पहले टीकों की प्रभावकारिता की समीक्षा की गई थी और उसके बाद ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन 'कोविशील्ड' और भारत बायोटेक की वैक्सीन 'कोवैक्सीन' को आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी दे दी थी। दो जनवरी को 'कोविशील्ड' को, जबकि तीन जनवरी को 'कोवैक्सीन' को मंजूरी दी गई थी। 'कोविशील्ड' को जहां कोरोना के खिलाफ 70 फीसदी कारगर माना गया है, तो वहीं 'कोवैक्सीन' की प्रभावकारिता को लेकर अभी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
टीकाकरण अभियान के लिए कोल्ड स्टोर तैयार किए गए
- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार की योजना के तहत वैक्सीन पहले निर्माताओं के यहां से देश के चार बड़े कोल्ड स्टोर केंद्रों (मुंबई, चेन्नई, करनाल, कोलकाता) तक पहुंचाया गया। फिर वहां से वैक्सीन को राज्यों द्वारा संचालित कोल्ड स्टोर्स में भेजा गया। उसके बाद जिला स्तर के स्टोर पर, जहां से टीकाकरण केंद्रों को वैक्सीन की आपूर्ति की गई। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, टीकाकरण अभियान के लिए देशभर में करीब 29 हजार कोल्ड स्टोर तैयार किए गए हैं, जहां वैक्सीन को रखा जा सके।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : PTI
दोनों वैक्सीन में से कौन सी लेनी है, इसका चुनाव कैसे हुआ?
- दरअसल, टीकाकरण केंद्रों पर 'कोविशील्ड' और 'कोवैक्सीन' में से कौन सी वैक्सीन किसको लगेगी, इसका फैसला सरकार के ऊपर था। लोगों को इसे चुनने की आजादी नहीं थी। जिस टीकाकरण केंद्र पर सरकार की तरफ से जो टीका पहुंचाया गया, उसे ही लोगों को लगाया गया।