कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच इसकी वैक्सीन का सभी को बेसब्री से इंतजार हैं। कोरोना महामारी से जंग में हम काफी हद तक कामयाब भी हो रहे हैं और वैक्सीन की रेस में भी देश सफलता से बस एक कदम दूर है। देश में तीन वैक्सीन कैंडिडेट्स तीसरे फेज के मानव परीक्षण में है, जबकि रूस में तैयार हुई दुनिया की पहली वैक्सीन स्पुतनिक-वी के अंतिम चरणों के ट्रायल को भी हरी झंडी मिल चुकी है। कुल मिलाकर यह हफ्ता देश में कोरोना वैक्सीन के लिए काफी निर्णायक साबित हुआ है और हर तरफ से अच्छी खबरें सामने आई हैं। वैक्सीन बनाने वाली कंपनी और संस्थानों की मानें तो सफलता बस एक कदम दूर है। उम्मीद की जा रही है कि साल 2021 की शुरुआत वैक्सीन पर सफलता के साथ होगी। फिलहाल जानते हैं कि इस हफ्ते कोरोना वैक्सीन को लेकर देश में क्या सब हुआ:
Covid Vaccine Tracker: देश में कोरोना वैक्सीन को लेकर इस हफ्ते आईं कई अच्छी खबरें, जानें क्या सब हुआ
देसी टीके Covaxin को मिली फेज-3 ट्रायल की मंजूरी
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद(ICMR) की मदद से भारत बायोटेक कंपनी द्वारा विकसित की जा रही पहली देसी वैक्सीन Covaxin को तीसरे यानी अंतिम चरण के मानव परीक्षण की अनुमति मिल गई है। कंपनी करीब 20 हजार वॉलेंटियर्स पर इसका ट्रायल करेगी। क्लीनिकल स्टडी में समय तो लंबा लगेगा, लेकिन उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में यह वैक्सीन टीकाकरण के लिए उपलब्ध होगी।
रूसी वैक्सीन Sputnik-V के ट्रायल को भी हरी झंडी
रूस की पहली कोरोना वैक्सीन स्पुतनिक-वी (Sputnik-V) के ट्रायल को भी भारतीय दवा नियामाक डीसीजीआई ने हरी झंडी दे दी है। इससे पहले बड़े पैमाने पर आखिरी चरणों के ट्रायल को डीसीजीआई ने यह तर्क देते हुए रोक दिया था कि रूस या अन्य देशों में भी बड़े पैमाने पर इंसानों पर वैक्सीन का ट्रायल नहीं हुआ है। विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर प्रोटोकॉल में संशोधन करते हुए दूसरे और तीसरे चरण के ट्रायल की अनुमति दी गई है। खबरों के मुताबिक, दूसरे चरण का ट्रायल 100 वॉलेंटियर्स पर होगा।
कोविशील्ड का भी फेज 3 ट्रायल जल्द
ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को भारतीय दिग्गज वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया 'कोविशील्ड' नाम से विकसित कर रही है। इस वैक्सीन ने दूसरे फेज के ट्रायल में शानदार परिणाम दिखाए हैं। भारत में आईसीएमआर की निगरानी में इसके ट्रायल हो रहे हैं। इस वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल की अनुमति मिल चुकी है और जल्द ही यह शुरू होगा।
एंटीबॉडी थेरेपी के लिए अमेरिका और जर्मनी संग साझेदारी
कोरोना का मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (mAbs) के जरिए इलाज के लिए भारतीय वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने जर्मनी की दिग्गज फार्मा कंपनी मर्क (Merck) और न्यूयॉर्क स्थित गैरलाभकारी स्वास्थ्य अनुसंधान संगठन IAVI के साथ करार किया है। तीनों मिलकर मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (mAbs) पर काम कर रहे हैं। मोनोक्लोनल एंटीबॉडी ड्रग को एंटीबॉडी के सबस्टीट्यूट की तरह दिया जाएगा ताकि शरीर के इम्यून सिस्टम को पहले से और बेहतर बनाया जा सके। यह इंसान के इम्यून सिस्टम को और ज्यादा सक्षम बनाती है ताकि बीमारी से लड़ा जा सके।