डॉ. राजन गांधी
जनरल फिजिशियन, चाइल्डकेयर हॉस्पिटल, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, डिप्लोमा सी.एच
अनुभव- 25 वर्ष
Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi
देशभर में कोरोना वायरस की दूसरी लहर जारी है। हालांकि, कोरोना की वैक्सीन लगाने का काम भी देश में जारी है। लोग भी खुद को सुरक्षित करने के लिए टीका लगाने काफी संख्या में सेंटर्स पर पहुंच रहे हैं। मौजूदा समय में कोरोना वैक्सीन की दो डोज अलग-अलग समय के अंतराल पर लगाई जा रही है। हालांकि, इन सबके बीच इस बात की चर्चा भी तेजी से हो रही है कि क्या कोरोना वैक्सीन की दो डोज के बाद बूस्टर डोज भी लगाना पड़ेगा? इसको लेकर चर्चाओं का बाजार पूरी तरह गर्म है, तो चलिए जानते हैं कि आखिर ये बूस्टर डोज क्या होता है?
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कोरोना टीका
- फोटो : पीटीआई
क्या होता है बूस्टर डोज?
- दरअसल, लगभग पूरी दुनिया में मौजूदा समय में जो कोरना वैक्सीन दी जा रही है, वो कुछ समय के अंतराल पर दो डोज में दी जा रही है और ये दोनों डोज मिलकर प्राइम डोज कहलाएंगे। वहीं, अगर छह महीने या सालभर बाद वैक्सीन की कोई डोज लगाने को कहा जाए, तो इसे बूस्टर डोज कहेंगे। आप इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि आपने गाड़ी चलाना सीखा, लेकिन समय के साथ गाड़ी में कई तरह के बदलाव आए और फिर आपको उन बदलावों के बारे में जानना पड़ता है। बूस्टर भी इसी फॉर्मूले पर काम करता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
कैसे काम करता है बूस्टर डोज?
- बात अगर बूस्टर डोज के काम करने के तरीके की करें, तो ये एक खास तरीके से काम करते हैं जिसे हम इम्यूनोलॉजिकल मैमोरी कहते हैं। व्यक्ति का इम्यून सिस्टम उस वैक्सीन को याद रखता है, जो उसके शरीर को पहले लगी थी। ऐसे में तय समय के बाद वैक्सीन की छोटी खुराक (जिसे हम बूस्टर डोज कहते हैं) हमारे इम्यून सिस्टम को तुरंत सचेत करती है और फिर वो ज्यादा ढंग से प्रतिक्रिया करती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
टीकाकरण की प्रक्रिया में साठ के दशक में विशेषज्ञ इस नतीजे पर पहुंचे कि एक बार वैक्सीन की बड़ी खुराक व्यक्ति के शरीर में लगाने से शरीर की इम्यूनिटी ठीक ढंग से प्रतिक्रिया नहीं करती है। जबकि इसे छोटे-छोटे हिस्सों और कुछ-कुछ समय के अंतराल पर दिया जाए तो मानव शरीर में ज्यादा बेहतर ढंग से एंटीबॉडी विकसित हो पाती हैं।
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कोरोना का टीकाकरण
- फोटो : अमर उजाला
क्या भारत के लोगों को लगेगा बूस्टर डोज?
- इस सवाल के जवाब में केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया है कि अभी इस पर किसी तरह का कोई अध्ययन नहीं हआ है कि कोरोना का बूस्टर डोज कितना जरूरी है। नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अगर इस तरह के बूस्टर डोज की जरूरत होगी, तो इस बारे में लोगों को जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि हम टीकाकरण से हर किसी को इस महामारी से सुरक्षित रखना चाहते हैं।