कोरोना वायरस के वैक्सीन की खोज लगातार जारी है, लेकिन साथ ही इसको लेकर समय-समय पर तरह-तरह की चौंकाने वाली रिपोर्ट्स भी सामने आ रही हैं। अब इस महामारी के मामले में एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि कोरोना वायरस की रिपोर्ट नेगेटिव आने पर भी लोग इससे संक्रमित हो सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती एक मरीज की जांच की गई, जिसमें यह चौंकाने वाली बात पता चली। अब विशेषज्ञों के आगे यह एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि ये कैसे संभव हुआ? आइए जानते हैं आखिर कैसे पता चला कि मरीज कोरोना से संक्रमित है जबकि उसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई थी?
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक 80 साल के मरीज में कोरोना से मिलते-जुलते लक्षण दिखाई दिए थे, जिसके बाद डॉक्टरों ने उसका कोरोना टेस्ट किया, लेकिन रिपोर्ट नेगेटिव आई। इसके बाद डॉक्टरों ने एक नहीं बल्कि तीन बार और उसका कोरोना टेस्ट किया, जिससे यह पता चल सके कि वह कोरोना वायरस से ही संक्रमित है या नहीं, लेकिन हर बार उस मरीज की रिपोर्ट नेगेटिव ही आई। हालांकि डॉक्टरों को उसमें कोरोना के लक्षण साफ दिखाई दे रहे थे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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जब डॉक्टर कोरोना का टेस्ट करके हार गए तो उन्होंने संक्रमण का पता लगाने के लिए मरीज के शरीर में कोरोना एंटीबॉडीज की जांच की। यह जांच पहले हुए जांच से बिल्कुल अलग थी और चौंकाने वाली भी। मरीज के शरीर में कोरोना की एंटीबॉडीज पाई गई। अब डॉक्टर सोच में पड़ गए कि जब जांच में कोरोना की रिपोर्ट नेगेटिव आई थी तो मरीज के शरीर में कोरोना की एंटीबॉडीज कैसे आ गई?
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मास्क लगाए एक बुजुर्ग (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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हालांकि इलाज के बाद जब मरीज में कोरोना के लक्षण दिखने बंद हो गए तो उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। लेकिन मरीज की रिपोर्ट नेगेटिव आने के बावजूद उसके शरीर में कोरोना की एंटीबॉडीज मिलने से विशेषज्ञों के लिए कई तरह के सवाल खड़े हो गए, क्योंकि उस मरीज के कोरोना संक्रमण की जांच आरटी-पीसीआर टेस्ट के आधार पर की गई थी और फिलहाल विशेषज्ञ इस टेस्ट को दुनिया के सबसे अधिक भरोसेमंद कोरोना टेस्ट के तौर पर मान रहे हैं।
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क्या है एंटीबॉडीज?
दरअसल, एंटीबॉडीज इम्यून सेल्स यानी रोग प्रतिरोधक कोशिकाएं होती हैं, जो इंसान के शरीर में किसी भी वायरस या संक्रमण को बढ़ने से रोकती हैं। असल में जब कोई वायरस हमारे शरीर में घुस जाता है तो हमारा शरीर पहले उसकी जांच करता है और उसके बाद उसे मारने के लिए एंटीबॉडीज बनाता है।