कोरोना महामारी की दूसरी लहर सिर्फ और सिर्फ परेशानियां लेकर आई है। इस लहर में कोरोना के भी मामले तेजी से बढ़े हैं और साथ ही ब्लैक फंगस संक्रमण यानी म्यूकरमाइकोसिस का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे में विशेषज्ञ लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन सवाल ये उठता है कि आखिर दूसरी लहर में म्यूकरमाइकोसिस के केस ज्यादा क्यों आ रहे हैं, कोविड से ठीक होने के कितने दिन तक इस बीमारी का खतरा बना रहता है? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना और ब्लैक फंगस से जुड़े ऐसे ही कुछ जरूरी सवालों के जवाब...
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विशेषज्ञ से जानें: कोरोना से ठीक होने के कितने दिन बाद तक बना रहता है ब्लैक फंगस का खतरा?
Wed, 26 May 2021 03:36 PM IST
सोनू शर्मा
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Wed, 26 May 2021 03:36 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
- फोटो : Twitter/Air
पोस्ट कोविड से ठीक होने में कितना समय लगता है और क्या लक्षण आते हैं?
- दिल्ली स्थित एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया कहते हैं, 'आम लक्षण में सांस की तकलीफ होती है, उनका सेचुरेशन ठीक होता है, लेकिन लगता है कि सांस फूल रही है या नहीं ले पा रहे हैं। खांसी कई हफ्ते तक आ सकती है। थकावट, कमजोरी होती है, जोड़ों में दर्द आदि होता है। एक और लक्षण है, इसमें ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं, देर तक देखने में परेशानी आती है, अपना काम नहीं कर पाते हैं। कुछ ऐसे लोग हैं, जिनके ऑर्गन पर असर पड़ जाता है, फेफड़े कमजोर हो जाते हैं या हार्ट कमजोर हो जाता है, उन्हें लंबे इलाज की जरूरत होती है। लेकिन सामान्यत: डाइट और व्यायाम से ठीक हो जाते हैं। पोस्ट कोविड में चार से 12 हफ्ते तक में 98 प्रतिशत तक लोग ठीक हो जाते हैं।'
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कोरोना वायरस के संक्रमण में बुजुर्गों की क्या स्थिति है?
- डॉ. रणदीप गुलेरिया कहते हैं, 'भारत में ही नहीं बंल्कि दुनिया में कोरोना वायरस बुजुर्गों को प्रभावित कर रहा है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। उम्र ज्यादा होने से कई बीमारियां भी रहती हैं। कोरोना की लड़ाई हमारे इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा तंत्र) से होती है। ये वायरस सभी को अपनी चपेट में लेता है, लेकिन पूरे विश्व में 80 प्रतिशत मामलों में लक्षण नहीं दिखाई देते, खासकर युवाओं में। लेकिन यह महामारी उम्रदराज लोगों के लिए खतरनाक है। बुजुर्गों पर इसका असर ज्यादा हो रहा है। इसीलिए सभी सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करें।'
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कोरोना की दूसरी लहर में म्यूकरमाइकोसिस के केस ज्यादा क्यों आ रहे हैं?
- डॉ. रणदीप गुलेरिया कहते हैं, 'दूसरी लहर में म्यूकरमाइकोसिस के केस ज्यादा ज्यादा सामने आ रहे हैं, लेकिन पहली लहर में भी इसके कुछ केस सामने आए थे। म्यूकरमाइकोसिस एक फंगस है, जो सामान्यत: मिट्टी में रहता है और वही बढ़ता है और कई बार हमारे खराब खाने-पीने की चीजों पर भी आ जाता है। जब ये फंगस स्वस्थ व्यक्ति की नाक या मुंह में आता है तो शरीर की इम्यूनिटी उसे खत्म कर देती है। लेकिन कोविड काल में तीन चीजें ऐसी हुईं कि ये फंगस अपंना असर दिखाने लगा। एक तो कोविड से इम्यूनिटी कम होती है, दूसरा डायबिटीज के मरीज का शुगर लेवल ज्यादा है तो वहां फंगस ज्यादा ग्रो (बढ़ता) करता है और तीसरा स्टेरॉयड का प्रयोग है। अगर कोई हाई डोज लेता है, जहां हम मध्यम लक्षण वाले को देते हैं, वहां हल्के लक्षण वाले वो डोज लेते हैं तो उससे शरीर में बदलाव आते हैं और उससे फंगस ज्यादा बढ़ने लगता है।'
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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कोविड से ठीक होने के कितने दिन तक म्यूकरमाइकोसिस का खतरा बना रहता है?
- डॉ. रणदीप गुलेरिया कहते हैं, 'जिन लोगों को डायबिटीज नहीं है, स्टेरॉयड का इस्तेमाल नहीं किया है, उन्हें इससे खतरा नहीं है। अभी तक भारत का या दूसरे देशों का जो भी डाटा आया है, उसमें यही है कि 95-98 प्रतिशत तक ऐसे लोग हैं, जिन्हें स्टेरॉयड दी गई है, उन्हें डायबिटीज है या जिनकी इम्यूनिटी कम है। इम्यूनिटी कम भी उन लोगों की जैसे कुछ लोग कैंसर की वजह से कीमोथेरेपी ले रहे हैं या ट्रांसप्लांट की वजह से दवा ले रहे हैं। अगर आप स्वस्थ हैं तो आपको यह नहीं होगा। ऐसे लोग जिन्होंने स्टेरॉयड लेना बंद कर दिया है और डायबिटीज नहीं है, अगर लक्षण नहीं हैं तो डरने की जरूरत नहीं है, दो-तीन हफ्ते बाद आप ठीक हो जाएंगे।'