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CoronaVirus: कोरोना से ठीक होने वालों में कब तक बनी रहती है एंटीबॉडी, क्या ये स्थाई भी होती हैं?

Wed, 04 Nov 2020 02:34 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निलेश कुमार Updated Wed, 04 Nov 2020 02:34 PM IST
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Coronavirus Reinfection: how long antibody remains after covid 19 recovery, permanent Antibodies Igg may defeat Corona
शरीर में विकसित एंटीबॉडी - फोटो : Amar Ujala/Pixabay

कोरोना से ठीक हो चुके लोगों में सामान्यत: इस बीमारी के प्रति एंटीबॉडी बन जाती है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में दोबारा संक्रमण के मामलों ने विशेषज्ञों का ध्यान इस ओर खींचा कि शरीर में बनी एंटीबॉडी आखिर कितने दिनों बाद खत्म हो जाती है। कुछ अध्ययनों में बताया गया कि शरीर में बनी एंटीबॉडी चार महीने में खत्म हो जाती है। यानी ये स्थाई नहीं होती हैं। अब एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने स्थाई एंटीबॉडी के बारे में पता लगाया है। दरअसल, शोधकर्ताओं ने कोविड-19 के उन मरीजों के उप समूहू की पहचान की है जो जल्दी ठीक हुए और शरीर में विकसित एंटीबॉडी ने कोरोना वायरस के खिलाफ तेजी से काम किया। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इससे प्रतिरोधक प्रणाली के काम करने के तरीके की जानकारी और बीमारी के खिलाफ टीका विकसित करने में मदद मिलेगी।

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एंटीबॉडी परीक्षण - फोटो : social media

अमेरिका स्थित ब्रिघम एंड वुमेन हॉस्पिटल सहित विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों ने कोविड-19 के हल्के से मध्यम लक्षणों से ठीक हुए मरीजों की जांच की और पाया कि जहां एक ओर अधिकतर मरीजों में समय के साथ एंटीबॉडी के स्तर में कमी आ जाती है, जबकि कुछ लोगों में इस एंटीबॉडी का स्तर संक्रमण के बाद भी कई महीनों तक बना रहता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, पिछले अध्ययन में इस बारे में विरोधाभासी जानकारी दी गई थी कि जल्द ठीक होने वाले मरीजों में संक्रमण से रक्षा करने वाली एंटीबॉडी बनी रहती है या नहीं।

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antibody Tests - फोटो : Pixabay

मौजूदा अनुसंधान के नतीजों को ‘जर्नल सेल’ में प्रकाशित किया गया है। इसमें रेखांकित किया गया है कि लंबे समय तक कायम रहने वाले एंटीबॉडी कम समय तक लक्षण वालों में विकसित होते हैं जो संकेत करता है कि कुछ लोग जो कोविड-19 से जल्दी ठीक हो जाते हैं उनमें वायरस के खिलाफ प्रभावी और लंबे समय तक लड़ने की प्रणाली विकसित होती है।

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एंटीबॉडी (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ट्विटर

ब्रिघम ऐंड वुमेन हॉस्पिटल की सह शोधपत्र लेखक डुएने वेसिमैन ने कहा, "हमने उन लोगों के उप समूह का पता लगाया है जिनमें कोविड-19 से ठीक होने के बाद स्थायी एंटीबॉडी विकसित हुई।" इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने मार्च से जून 2020 तक बोस्टन के इलाके में कोविड-19 बीमारी से ठीक हुए 92 लोगों को शामिल किया। अध्ययन के मुताबिक इन मरीजों में से पांच को अस्पताल में भर्ती कराया गया था जबकि बाकी का इलाज गृह एकांतवास में हुआ। 

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COVID-19 antibody Test - फोटो : ANI

वैज्ञानिकों ने बताया कि जिन लोगों में ‘स्थाई’ एंटीबॉटी विकसित हुई उनमें औसतन 10 दिन तक लक्षण रहा जबकि सामान्य एंटीबॉडी वालों में औसतन 16 दिन तक वायरस का असर रहा। उन्होंने कहा स्थायी एंटीबॉडी वालों की ‘टी’ कोशिका और ‘बी’ कोशिका में भी अंतर देखने को मिला। बता दें कि दोनों प्रकार की कोशिकाएं प्रतिरोध के लिए संक्रमण संबंधी आकंड़ों को सुरक्षित रखने और रक्षा करने में अहम भूमिका निभाती हैं।

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