इंसानों को जानवरों से अलग करने वाली चीजों में एक चीज ये भी है कि बीमारियों के फैलने की स्थिति में इंसान अपनी सुरक्षा के लिए चिंतित रहते हैं। इंसान अकेली एक ऐसी जाति है जो कि बिना जाने अपने हाथों से चेहरे छूने के लिए जानी जाती है। उसकी यह आदत नए कोरोना वायरस (कोविड-19) जैसी बीमारियों को फैलने में मदद करती है। लेकिन हम ये क्यों करते हैं और क्या हम अपनी इस आदत को रोक सकते हैं?
क्या मास्क आपको कोरोना वायरस के संक्रमण से बचा सकता है, बेहतर विकल्प क्या है?
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किन-किन देशों में मास्क पहनना है जरूरी
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अब तक मास्क पहनने को बाध्यकारी बनाने को लेकर कोई सलाह नहीं दी है लेकिन ये जरूर कहा है कि अगर आप बीमार हैं तो दूसरों को संक्रमित न करें इसके लिए जरूरी है कि आप घर से बाहर निकलने पर मास्क पहनें।
मार्च 18 को चेक गणराज्य ने सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनना बाध्यकारी कर दिया था। इसके बाद स्लोवाकिया ने 25 मार्च को लोगों को घर से बाहर निकलने पर मास्क पहनने के लिए कहा। इसके बाद बोस्निया और हर्जेगोविना ने भी 29 मार्च को लोगों के लिए सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनना जरूरी कर दिया। अप्रैल 6 को ऑस्ट्रिया में कुछ दुकानों को खोलने की इजाजत दी गई है लेकिन सरकार ने कहा कि दुकानों पर जाने वालों के लिए मास्क पहनना बाध्यकारी होगा।
मोरक्को ने मार्च के मध्य में ही संपूर्ण लॉकडाउन लागू कर दिया गया था जिसके बाद अप्रैल 7 को यहां घर पर और घर से बाहर निकलने पर मास्क पहनना जरूरी बना दिया गया। अब तक पुलिस ने मास्क न पहनने के लिए पचास हजार से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। अप्रैल 7 को तुर्की ने भी अपने नागरिकों से सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनने को कहा।
जर्मनी की चांसलर एंगेल मर्केल ने 20 अप्रैल को घोषणा की कुछ देश में लॉकडाउन में राहत तो नहीं दी जाएगी लेकिन इस बीच छोटी दुकानों को खोलने की सरकार इजाजत देगी। इसके बाद जर्मनी के कई राज्यों ने सार्वजनक जगहों पर नाक और मुंह ढकना जरूरी बना दिया। अब जर्मनी ने कोरोना फैलने से रोकने के लिए पूरे देश में लोगों के लिए मास्क पहनना जरूरी कर दिया है।
लेकिन हम ऐसा क्यों करते हैं?
इंसान और कुछ स्तनपायी जीव खुद को ऐसा करने से नहीं रोक पाते हैं। ऐसा लगता है कि ये हमारे विकास के क्रम का हिस्सा है। चूंकि कुछ जातियां अपने चेहरों को छूकर कीड़ों को हटाने की कोशिश करते हैं। लेकिन हम और दूसरे अन्य स्तनपायी जीव दूसरे कारणों की वजह से भी ऐसा करते हैं।
अमरीका स्थित यूसी बार्कले यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के प्रोफेसर डाचर केल्टनर बताते हैं, "कभी-कभी ये एक तरह से खुद को सहलाने जैसा काम होता है। वहीं, कभी-कभी हम अंजाने में अपने हाथों से मुंह छूकर अपने हाथों का इस्तेमाल कुछ इस तरह करते हैं जैसे कि एक थिएटर के स्टेज पर पर्दे को इस्तेमाल किया जाता है। जिसमें एक पहलू से होकर दूसरे पहलू में जाने के लिए पर्दा डालते और हटाते हैं।"
बिहेवियरल साइंस के क्षेत्र से जुड़े दूसरे विशेषज्ञ मानते हैं कि खुद को छून अपने भावों को नियंत्रित करने और ध्यान खींचने से जुड़ा होता है। जर्मनी की लिपजिग यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिक मार्टन ग्रनवाल्ड कहते हैं कि ये हमारी जाति का मूल व्यवहार है।
ग्रनवाल्ड ने बीबीसी को बताया, "खुद को छूना अपने आप के नियमन जैसी हरकतें होती है। ये सामान्य तौर पर संवाद करने के लिए बनीं हरकतें नहीं होती हैं और बिना जाने ही इन हरकतों को अंजाम दिया जाता है। ये हरकतें सभी भावनात्मक और संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाती हैं। ये सभी लोगों में होती हैं।"
खुद को छूने से समस्या ये होती है कि इससे हर तरह की खराब चीज हमारी आँखों, नाक और मुंह से होते हुए हमारे शरीर के अलग-अलग अंगों में पहुंचती हैं। उदाहरण के लिए, कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति के मुंह से निकले पानी के छींटों से होकर दूसरे लोगों में पहुंचता है।
लेकिन अगर हम किसी ऐसी चीज को छूते हैं जिस पर वायरस गिरा हो तो इससे भी वायरस संक्रमित कर सकता है। विशेषज्ञ अभी भी वायरस के इस नये स्ट्रेन पर शोध कर रहे हैं। लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि कोरोना वायरस किसी जगह पर गिरने के बाद 9 दिनों तक जिंदा रहते हैं।