Medically Reviewed by Dr. Sudhir Chaudhary
क्षय रोग एवं श्वसन रोग विशेषज्ञ, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एम.डी (क्षय रोग एवं श्वसन रोग)
अनुभव- 38 वर्ष
कोरोना एक गंभीर और जानलेवा बीमारी बनकर उभरा है। चाहे आप संक्रमित हों या संक्रमण से ठीक हो गए हों, यह सभी के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। कोरोना से ठीक होने के बाद भी लोगों में कई तरह की समस्याएं देखने को मिल रही हैं। हालिया रिपोर्ट से पता चलता है कि कोरोना से ठीक होने वाले लोगों में अब टीबी जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ गया है। कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री डॉ के. सुधाकर ने हाल ही में बताया था कि राज्य में अब तक 24-25 ऐसे मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिसमें लोगों को पहले कोरोना हुआ था और फिर रिकवरी के बाद वे टीबी का शिकार हो गए। उन्होंने बताया कि एहतियात के तौर पर सरकार ने पूरे राज्य में कोरोना से ठीक हुए मरीजों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी है, ताकि मरीजों में टीबी का पता जल्दी लगाया जा सके और जल्द से जल्द उनका इलाज किया जा सके, क्योंकि जितनी देर होगी, बीमारी उतनी ही गंभीर होगी।
अलर्ट: कोरोना से ठीक होने के बाद हो सकती है ये जानलेवा बीमारी, अगर नहीं दिया लक्षणों पर ध्यान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विशेषज्ञ कहते हैं कि कोविड-19 और टीबी, दोनों काफी हद तक एक जैसी ही बीमारियां हैं। दोनों ही सांस से जुड़ी बीमारियां हैं, जो फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं और सबसे खतरनाक बात कि दोनों ही बीमारियां संक्रामक हैं। इसलिए सतर्क रहने की जरूरत है।
लक्षणों को नजरअंदाज करना हो सकता है जानलेवा
विशेषज्ञ कहते हैं कि लॉन्ग कोविड और टीबी के लक्षण एक जैसे ही होते हैं, ऐसे में लक्षणों को नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है। दरअसल, कोरोना से ठीक होने के बाद कई लोगों में सांस लेने में दिक्कत और खांसी की समस्या बनी रहती है, टीबी में भी ऐसे ही लक्षण दिखाई देते हैं। इसलिए कोरोना से ठीक होने के बाद अगर आपको भी ऐसी समस्याएं हो रही हैं, तो डॉक्टर की सलाह पर टीबी का भी टेस्ट जरूर कराएं।
क्या हो सकता है टीबी का कारण?
- विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोना के इलाज में स्टेरॉयड्स का इस्तेमाल, कमजोर इम्यूनिटी और फेफड़ों में संक्रमण का बढ़ना, टीबी के होने का कारण हो सकता है। दरअसल, टीबी एक संक्रामक रोग है और यह उस व्यक्ति को जल्दी अपनी चपेट में ले लेता है, जिसकी इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।
डायबिटीज के मरीज भी रहें सतर्क
- चूंकि डायबिटीज से पीड़ित मरीजों की रोग प्रतिरोक्षक क्षमता पहले से ही कमजोर होती है और ऐसे में उसे कोरोना हुआ हो तो जाहिर है इम्यूनिटी और भी कमजोर हो जाएगी। ऐसे में टीबी की बीमारी भी उसे बड़ी आसानी से हो सकती है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को कोरोना से बेहद ही सतर्क रहने और शुगर लेवल को हमेशा नियंत्रण में रखने की जरूरत है।