दुनियाभर में कोरोना वायरस से अब तक 10 करोड़ तीन लाख के करीब लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि मरने वालों का आंकड़ा भी 21 लाख 49 हजार से अधिक हो चुका है। हालांकि भारत समेत कई देशों में इस जानलेवा वायरस के खिलाफ टीकाकरण अभियान चल रहे हैं, जिसमें इस्रायल भी शामिल है। इस्रायल में टीकाकरण अभियान काफी तेजी से चल रहा है, जिसका उसे फायदा मिलना भी शुरू हो गया है। एक नए अध्ययन में यह सामने आया है कि बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान से इस्रायल में कोरोना के नए संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने वालों मरीजों की संख्या में काफी कमी आई है।
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मैकाबी हेल्थ सर्विसेज के केएसएम रिसर्च एंड इनोवेशन सेंटर और हेल्थ रिसर्च फर्म केआई इंस्टीट्यूट द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि 60 और उससे अधिक उम्र के लोगों को टीके की दूसरी खुराक देने के तीन दिन बाद इस आयु वर्ग में नए संक्रमणों की संख्या में 60 फीसदी की गिरावट आई।
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यह पहला अध्ययन है जो टीकाकरण और संक्रमण दर में गिरावट के संबंध को दर्शाता है। इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने कोविड-19 से संक्रमित और 60 से अधिक उम्र के 50,000 से अधिक लोगों के अस्पताल में भर्ती होने के आंकड़ों का विश्लेषण किया, जिन्होंने 19 से 24 दिसंबर, 2020 के बीच वैक्सीन की पहली खुराक ली थी। विश्लेषण में पाया गया कि 23 दिनों के बाद, जो दूसरे टीकाकरण का समय था, इसके बीच लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की संख्या में उल्लेखनीय रूप से कमी आई थी।
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शोधकर्ताओं का कहना है कि ये शुरुआती संकेत हैं जो वैक्सीन से हर्ड इम्यूनिटी की ओर इशारा करते हैं। दरअसल, किसी भी जनसंख्या में हर्ड इम्यूनिटी की स्थिति तब बनती है जब उस जनसंख्या के 60 से 70 फीसदी लोगों में बीमारी फैल जाती है और उनमें वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षात्मक गुण विकसित हो जाते हैं। इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी वायरस के संक्रमण को बढ़ने से रोकने में मदद करती है।
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दरअसल, इस्रयाल उन देशों में से है जो दुनिया में सबसे अधिक लोगों को टीका लगाने में कामयाब रहे हैं। हालांकि शोधकर्ताओं ने साथ ही यह भी चेतावनी दी है कि इस उत्साहजनक और प्रभावकारी डाटा के बावजूद, लोगों को मास्क पहनने, हाथ धोने और सुरक्षित शारीरिक दूरी अपनाने जैसे नियमों का पालन करते रहना चाहिए।