Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik
अगर आप कोरोना से संक्रमित हुए थे और ठीक हो गए, तो इसका ये मतलब नहीं कि आप पूरी तरह सुरक्षित हो गए, क्योंकि कोरोना के कई मरीजों में ठीक होने के बाद ब्लैक फंगस संक्रमण के मामले भी देखने को मिल रहे हैं। इस संक्रमण ने लोगों की परेशानियों को काफी बढ़ा दिया है, क्योंकि इस संक्रमण की वजह से कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों की स्थिति गंभीर हो रही है और उन्हें दोबारा अस्पतालों में भर्ती होना पड़ रहा है। इसलिए इसके लक्षणों को लेकर बहुत अधिक सावधान रहने की जरूरत है। अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह खतरनाक हो सकता है। आइए जानते हैं ब्लैक फंगस के शुरुआती लक्षणों के बारे में, जिन्हें भूलकर भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सावधान: कोरोना से रिकवरी में इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, हो सकता है ब्लैक फंगस का खतरा
सिर में लगातार दर्द होना
- कोरोना से रिकवरी के दौरान या ठीक होने के बाद अगर आपके सिर में लगातार दर्द होता है और एक तरह का दबाव महसूस होता है तो सतर्क हो जाएं, क्योंकि यह ब्लैक फंगस संक्रमण का शुरुआती लक्षण हो सकता है। ऐसी स्थिति में आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की जरूरत है।
चेहरे पर एकतरफा सूजन
- आमतौर पर चेहरे पर एक तरफ सूजन होने पर लोग इसे आम समस्या समझ कर उसे छोड़ देते हैं या उससे छुटकारा पाने के लिए घरेलू उपाय करने लगते हैं, लेकिन ध्यान रहे कि कोरोना से ठीक होने के बाद अगर ये समस्या हो रही है, तो सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि यह ब्लैक फंगस का एक लक्षण हो सकता है। इसमें चेहरे पर एकतरफा सूजन के साथ-साथ वहां दर्द और नीचे की तरफ भारीपन भी महसूस हो सकता है।
नाक के चारों ओर काली पपड़ी बनना
- चूंकि ब्लैक फंगस नाक के रास्ते ही शरीर में प्रवेश करता है, ऐसे में नाक के चारों ओर काली पपड़ी का बन जाना और नाक का बंद हो जाना और दर्द होना, इस संक्रमण का संकेत हो सकता है। इसपर ध्यान देने की जरूरत है, वरना यह जानलेवा हो सकता है।
इन लक्षणों को भी न करें नजरअंदाज
- चेहरे का रंग बदल जाना, आंखों में भारीपन महसूस होना, बुखार, खांसी और सांस लेने में तकलीफ होना भी ब्लैक फंगस संक्रमण का संकेत हो सकता है। इसके अलावा खून की उल्टियां होना, इसके सबसे खतरनाक लक्षणों में शामिल है। इन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।