यह कहना है इटली के क्रेमोना शहर के एकमात्र अस्पताल के नर्स पाओलो मिरांडा का। इटली के लोम्बार्डी इलाके के इस छोटे से शहर में अब तक 2160 से ज्यादा मामले आ चुके हैं और 199 लोग मारे जा चुके हैं। अपने कई दूसरे सहकर्मियों की तरह वो पिछले महीने से 12 घंटे की शिफ्ट कर रहे हैं। वो कहते हैं, "हम प्रोफेशनल लोग हैं, लेकिन हम पुरी तरह से अब थक चुके हैं। ऐसा लग रहा है कि हम किसी सुरंग में हैं। हम सब डर हुए हैं।"
Coronavirus का कहर: इटली का वह अस्पताल, जो 'कोरोना अस्पताल' बन गया है
यूरोप में सबसे बुरी तरह से प्रभावित होने वाला देश इटली है। पाओलो को तस्वीरें लेना पसंद है। उन्होंने फैसला लिया है कि वे इस हताशा भरे समय को तस्वीरों के सहारे संजों कर रखेंगे।
"जो हो रहा है उसे मैं कभी नहीं भूलना चाहूंगा। यह इतिहास बनने जा रहा है और मेरे लिए शब्दों से कहीं ज्यादा ताकतवर तस्वीरें हैं।" अपनी तस्वीरों में वो अपने सहकर्मियों की बहादुरी के साथ-साथ उनकी कमजोरियों को भी दिखाना चाहते हैं।
"एक दिन मेरी एक सहकर्मी कॉरिडोर में चिल्लाते हुए कूदने लगी। उसका कोरोना का टेस्ट हुआ था और उसे तभी पता चला था कि उसे कोरोना नहीं है। आम तौर पर तो वो बहुत शांत रहती थी लेकिन वो बहुत डरी हुई थी। आखिरकार वो भी एक इंसान ही है।"
इटली में अब तक कोरोना के 35000 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। पाओलो और उनकी टीम के लिए यह बहुत मुश्किल भरा समय है लेकिन वो एक-दूसरे को संभालते हुए मदद कर रहे हैं। वो बताते हैं, "कभी-कभी हम हताश हो जाते हैं। हम रोने लगते हैं। खुद को उस वक्त असहाय पाते हैं जब हमारे मरीज के हालत में सुधार नहीं हो रहा होता है।"
जब ऐसा होता है तब टीम के बाकी सदस्य तुरंत उसकी मदद के लिए आगे बढ़ते हैं और उसे ढाढस बंधाते हुए उसे सहज होने में मदद करते हैं। "हम आपस में मजाक करके एक दूसरे को हंसाने की कोशिश करते हैं नहीं तो हम अपना दिमाग़ी संतुलन खो बैठेंगे।"
इटली में करीब 3000 लोग एक महीने में मारे जा चुके हैं। करीब 35000 से ज़्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर और नर्स खासकर उत्तरी इटली में इस हालात से जूझ रहे हैं।
पाओलो नौ सालों से नर्स हैं। उन्होंने अपनी आंखों के सामने बहुत लोगों को मरते देखा है। लेकिन इस महामारी के दौरान जो बात सबसे चुभने वाली है, वो यह है कि लोग ऐसे हालात में मर रहे हैं जब कोई उनका अपना उनके साथ नहीं होता।
"आम तौर पर जब कोई मरीज मरता है तो उनके परिवार वाले उनके साथ होते हैं। वो एक गरिमामयी अंत होता है। हम परिवार के लोगों को संभालने और उन्हें संत्वाना देने के लिए होते हैं।"
लेकिन पिछले महीने से संक्रमण के ख़तरे को देखते हुए परिवार वालों को आने की इजाजत नहीं है। यहां तक कि वे अस्पताल भी नहीं आ सकते हैं। हम उन सभी वायरस से संक्रमित लोगों का इलाज कर रहे हैं जिन्हें पूरी तरह से अकेले छोड़ दिया गया है। अकेले मरना बहुत तकलीफदेह है। मैं दुआ करता हूं कि किसी के साथ ऐसा न हो।
क्रेमोना का यह अस्पताल 'कोरोना वायरस के अस्पताल' में तब्दील हो चुका है। अब यहां सिर्फ कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों का इलाज हो रहा है। दूसरे सभी मामले सस्पेंड कर दिए गए हैं। नए मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है लेकिन आईसीयू में उनके लिए बेड कम पड़ रहे हैं।
"हम अस्पताल के अंदर हर जगह पर जहां कहीं भी संभव हो, अब बेड की व्यवस्था कर रहे हैं। अस्पताल में अब कहीं भी जगह नहीं बचा।" अस्पताल के गेट पर 60 बेड लगा कर जगह की कमी को पूरा करने की कोशिश की जा रही है लेकिन यह भी पर्याप्त नहीं है।