देश में कोरोना संक्रमण के दैनिक मामलों में उतार-चढ़ाव जारी है। कभी मामले घट जाते हैं तो कभी बढ़ जा रहे हैं। ऐसे में खतरा लगातार बना हुआ है। इस बीच कोरोना के डेल्टा वैरिएंट ने अलग चिंता में डाल दिया है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने छह राज्यों में विशेषज्ञ दल भेजे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि ये दल महामारी से सही ढंग से निपटने के लिए राज्यों को कोविड राहत और प्रबंधन में सहयोग देगा। वही, कोरोना से ठीक होने के बाद यानी पोस्ट कोविड सिंड्रोम की समस्या भी गंभीर है। कई लोग इसके शिकार हुए हैं। पोस्ट कोविड में कई तरह की समस्याएं सामने आई हैं, जिसमें अधिक थकान, कमजोरी, सिर दर्द, आदि शामिल हैं। इसके अलावा लोगों के मस्तिष्क पर भी कोरोना का असर पड़ा है और उससे भी समस्याएं पैदा हो रही हैं। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब...
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विशेषज्ञ: पोस्ट कोविड सिंड्रोम के इस लक्षण को न करें नजरअंदाज, समस्या बढ़ने पर यहां दिखाएं
Fri, 02 Jul 2021 04:39 PM IST
सोनू शर्मा
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Fri, 02 Jul 2021 04:39 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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पोस्ट कोविड सिंड्रोम में क्या नींद न आना भी है?
- डॉ. अरविंद कुमार कहते हैं, 'जी हां, कोविड से ठीक होने के बाद भी लोगों में कई तरह की समस्या पाई गई है, जिन्हें पोस्ट कोविड सिंड्रोम कहते हैं। इसके कई अलग-अलग लक्षण हैं। नींद न आना भी उनमें से एक है। लेकिन समय के साथ शरीर नींद की साइकिल को पूरा कर लेगा और पहले की तरह सामान्य हो जाएगा। इसके अलावा देशभर में कई पोस्ट कोविड सिंड्रोम क्लीनिक भी खोले गए हैं, समस्या बढ़ने पर वहां दिखा सकते हैं।'
कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय
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वैक्सीन के बाद शरीर में एंटीबॉडीज कितने समय तक रहेंगी?
- दिल्ली स्थित सीजीएचएस के डॉ. अरविंद कुमार कहते हैं, 'शरीर में एंटीबॉडी कितने समय तक रहती है, इसपर स्टडी चल रही है। लेकिन अभी तक माना गया है कि ये छह महीने तक शरीर में रहती हैं। वैक्सीन की एंटीबॉडीज तो अपना काम करेंगी, लेकिन खुद भी अपनी सुरक्षा करनी है और वो कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर से ही संभव है।'
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय
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मॉडर्ना की वैक्सीन को भी मंजूरी दे दी गई है, क्या कहेंगे?
- डॉ. अरविंद कुमार कहते हैं, 'मॉडर्ना की रिजल्ट (परिणाम) भी काफी अच्छा है। अभी तक देश में तीन वैक्सीन की मंजूरी थी, जिनका प्रयोग किया जा रहा है। अब मॉडर्ना की वैक्सीन को भी इमरजेंसी अप्रूवल (आपातकालीन उपयोग की मंजूरी) दे दिया गया है। एक बात सभी से कहना चाहेंगे, किसी भी वैक्सीन को लेकर ये न सोचें कि इसी कंपनी की वैक्सीन लगवानी है, जो भी वैक्सीन आपके आसपास मिल रही है, लगवा लें।'
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
- फोटो : Twitter/Air
कोरोना काल में डॉक्टरों की जिम्मेदारी को कैसे देखते हैं?
- डॉ. अरविंद कुमार कहते हैं, 'एक डॉक्टर के तौर पर हमारा काम सिर्फ लोगों का इलाज करना नहीं है, बल्कि उन्हें बीमारी से बचने के लिए जागरूक भी करना है। कोरोना काल में देश और दुनिया के सभी डॉक्टर अपने फर्ज को निभा रहे हैं। स्वास्थ्यकर्मी पॉजिटिव भी हो रहे हैं, लेकिन फिर काम पर लौट रहे हैं, क्योंकि वो जानते हैं कि इस वक्त उनकी जिम्मेदारी बड़ी है। ये एक सेवा है। कई बार डॉक्टरों को पूरे दिन-रात लगातार काम करना पड़ता है, वो भी पीपीई किट पहनकर ही।'