भारत में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले बढ़कर अब 98 लाख 59 हजार से ऊपर चले गए हैं जबकि मरने वालों की संख्या भी एक लाख 43 हजार के पार है। चूंकि विशेषज्ञों ने पहले ही यह अंदेशा जताया था कि सर्दियों में संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं और ऐसा कई जगहों पर देखने को भी मिल रहा है। इसके अलावा एक और बात है जो लोगों को पहले से ही पता है, वो ये कि संक्रमण के दौरान लोगों के सूंघने या स्वाद की क्षमता खत्म हो जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है। आइए कोरोना से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब विशेषज्ञ से जानने की कोशिश करते हैं, जो हमारे काम की हैं।
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Coronavirus: कोरोना संक्रमण के दौरान क्यों खत्म हो जाती है सूंघने या स्वाद की क्षमता? विशेषज्ञ से जानें इसका जवाब
Sun, 13 Dec 2020 05:53 PM IST
सोनू शर्मा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Sun, 13 Dec 2020 05:53 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
- फोटो : Twitter/Air
देश में कोरोना की वर्तमान स्थिति पर आप क्या कहेंगे?
- दिल्ली के जी बी पंत अस्पताल के डॉ. संजय पांडेय कहते हैं, 'जून-जुलाई के बाद प्रतिदिन एक लाख के करीब मामले आ रहे थे, अब 30 हजार के आसपास हैं। कई राज्यों में संक्रमण की दर काफी कम है। रिकवरी रेट 95 फीसदी तक पहुंच गया है। आईसीयू एडमिशन भी कम हो गए हैं, लेकिन समस्या यह है कि लोग काफी लापरवाह हो रहे हैं, जो कि आगे चलकर काफी भयानक हो सकता है। मेरी सभी से अपील है, मास्क लगाएं, दूरी रखें और नियमित रूप से हाथ धोते रहें।'
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क्या वैक्सीन ही एकमात्र विकल्प है?
- डॉ. संजय पांडेय बताते हैं, 'किसी भी वैक्सीन को बनाने में तीन चीजें देखी जाती हैं, पहला कि वो सुरक्षित है कि नहीं, दूसरा कितनी प्रभावी है और तीसरा उसके लॉन्ग टर्म इफेक्ट देखे जाते हैं। कोविड वैक्सीन के सभी कैंडिडेट जिन्हें स्वीकृति मिल रही है, वो पहले दो पर तो खरी उतरी हैं, लेकिन चूंकि कोरोना मात्र एक साल पुराना वायरस है, इसलिए उसके लॉन्ग टर्म इफेक्ट अभी नहीं पता चल सकते हैं। उसके लिए कई वर्षों तक डाटा एकत्र किया जाता है। अब हम कोरोना की वैक्सीन के लिए डाटा का इंतजार नहीं कर सकते हैं, इसलिए इमर्जेंसी अप्रूवल दिया जा रहा है।'
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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लोग मानसिक उलझनों का शिकार हैं, क्या यह कोरोना का साइड-इफेक्ट है?
- डॉ. संजय पांडेय बताते हैं, 'कोरोना का मस्तिष्क पर प्रभाव पड़ता है, यह बात कई सारे शोध में भी सामने आई है, लेकिन यह प्रभाव केवल शुरुआत में पड़ता है, बाद में नहीं। संक्रमण के दौरान सूंघने या स्वाद की क्षमता खत्म हो जाती है। यह मस्तिष्क पर प्रभाव की वजह से ही है। वहीं कुछ मरीजों में मसल पैरालिसिस स्ट्रोक की समस्या आई। अगर मानसिक उलझन की बात करें तो यह कोविड में ही नहीं बल्कि किसी भी वायरल बीमारी में हो सकती है। कोरोना में उलझन इसलिए है, क्योंकि मरीज सोचता रहता है कि मैं ठीक हो पाऊंगा कि नहीं।'
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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सर्दियों में कोरोना के प्रभाव पर क्या कहेंगे?
- डॉ. संजय पांडेय कहते हैं, 'कई अन्य देशों में सर्दियों के मौसम में कोरोना का प्रभाव काफी खतरनाक हुआ है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए हमारे देश में सभी को सारी सावधानियां बरतनी हैं। ढील कतई नहीं देनी है। कोरोना को उतनी ही गंभीरता से लें, जितना गर्मियों के मौसम में ले रहे थे।'