कोरोना वायरस सारी दुनिया के लिए एकदम नया है। ये कहां से आया है? कैसे रुकेगा? इसका इलाज क्या है? अभी किसी को कुछ नहीं पता।
कोरोना वायरस से बचने के लिए आखिर कब तक करनी होगी सोशल डिस्टेंसिंग?
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स्पेनिश फ्लू
साल 1918 में इस महामारी के दौरान ही अमरीका के कई शहर लिबर्टी बॉन्ड परेड की तैयारी कर रहे थे। इस परेड के जरिए यूरोपीय देशों को युद्ध में मदद करने के लिए पैसे जुटाए जा रहे थे। फिलाडेल्फिया और पेंसिल्वेनिया शहरों के प्रमुखों ने महामारी के बावजूद ये परेड करने का फैसला किया।
जबकि इन शहरों में रह रहे 600 सैनिक पहले से ही स्पेनिश फ्लू के वायरस से पीड़ित थे। फिर भी यहां परेड निकालने का फैसला लिया गया। वहीं सेंट लुई और मिसौरी राज्यों ने अपने यहां होने वाली परेड रद्द कर दी। और लोगों को जमा होने से रोकने के लिए अन्य कदम भी उठाए।
नतीजा ये रहा है कि फिलाडेल्फिया में एक महीने में दस हजार से ज्यादा लोग स्पेनिश फ्लू की चपेट में आकर मर गए। जबकि सेंट लुई जिसने लोगों को जमा नहीं होने दिया था वहां मरने वालों की संख्या 700 से भी कम रही। यानी सेंट लुईस में लोग सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से बच गए।
इतिहास में इसकी कई मिसालें
न्यूजीलैंड में महामारियों और संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ अरिंदम बसु का कहना है कि सोशल डिस्टेंसिंग का मतलब दो या दो से ज्यादा लोगों को निजी तौर पर मिलने से रोकना है। और वायरस के फैलने में ये बहुत बड़ी रुकावट का काम करता है। कोविड-19 को रोकने के लिए दुनिया भर में सोशल डिस्टेंसिंग का सहारा लिया जा रहा है।
इतिहास में इसकी कई मिसालें मिलती हैं। 1918 में अमरीका ने भी कई शहरों में सार्वजनिक समारोह पर पाबंदी लगा दी थी। स्कूल, थियेटर, चर्च सब बंद कर दिए थे। पूरी एक सदी बाद दुनिया एक बार फिर उसी दौर से गुजर रही है। लेकिन इस इस सदी में दुनिया की आबादी उस दौर की आबादी की तुलना में 6 अरब ज्यादा हो चुकी है।
कोविड-19 भी स्पेनिश फ्लू के वायरस जैसा नहीं है। वैज्ञानिकों के लिए भी ये वायरस रिसर्च का विषय है। फिलहाल इस पर काबू पाने का एकमात्र उपाय है-सोशल डिस्टेंसिंग। इसके माध्यम से ही कोविड-19 की इन्फेक्शन चेन तोड़ी जा सकती है।
सोशल डिस्टेंसिंग
लगभग सभी देश लोगों को घरों में रहने, लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की सलाह दे रहे हैं। इसका मकसद सिर्फ और सिर्फ लोगों को संक्रमित लोगों के संपर्क में आने से रोकना है। सेल्फ आइसोलेशन और क्वारंटीन सोशल डिस्टेंसिंग के ही अलग-अलग रूप हैं।
सोशल डिस्टेंसिंग का ये दौर अभी थोड़े और समय तक चलने वाला है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमरीका में सोशल डिस्टेंसिंग का ये अमल 2022 तक जारी रह सकता है। हालांकि ये रिपोर्ट अभी किसी शैक्षिक पत्रिका में छपनी बाकी है। उम्मीद है कि 2022 तक कोविड-19 की वैक्सीन और दवा खोज ली जाएगी।
लेकिन तब तक सोशल डिस्टेंसिंग और क्वारंटीन का पालन करना होगा। अगर मौसम के चक्र का इस वायरस पर कुछ असर होता है, तो संभव है कि साल के अंत में ये वायरस फिर से सक्रिय हो जाए। कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति औसतन 2 से 3 व्यक्तियों को संक्रमित करता है।
वायरस के लक्षण
एक स्टडी के मुताबिक स्पेनिश फ्लू के वायरस में प्रजनन की क्षमता 1.8 है। इनफ्लुएंजा वायरस की क्षमता 1.06 से 3.4 है। जबकि नजला करने वाले रिनोवावायरस में प्रजनन क्षमता 1.2-1.83 है। वहीं कोविड-19 में प्रजनन क्षमता 1.4 से 3.9 है जोकि सभी तरह के वायरस की प्रजनन क्षमता के तुलना में सबसे ज्यादा है।
कोडिव-19 पर चीन में हुई एक रिसर्च के मुताबिक इस वायरस के लक्षण 5 दिन में ही शरीर में फैलने लगते हैं और 14 दिन में साफ तौर पर नजर आते हैं। इस बीच अगर कोरोना संक्रमित सामान्य इंसान की तरह लोगों से मिलता जुलता रहता है, तो वो 2 से 3 लोगों को संक्रमित करता है।
और फिर यही 2 से 3 लोग आगे इतने ही लोगों को संक्रमित करते हैं और कोरोना के फैलने का दायरा बढ़ता चला जाता है। इस तरह एक कोरोना संक्रमित एक महीने में लगभग 244 लोगों को संक्रमित बना देता है। अगर रोकथाम न की गई, तो अगले दो महीने में यही आंकड़ा 59 हजार 604 तक पहुंच सकता है।