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कोरोना महामारी ही नहीं बल्कि टीबी, अस्थमा और निमोनिया जैसी बीमारियों के खतरे से भी बचाता है मास्क
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Tue, 10 Nov 2020 04:09 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण के बीच लोगों से मास्क का इस्तेमाल करने की अपील की जा रही है। मास्क पहनने में किसी भी तरह की लापरवाही बरतना लोगों को भारी पड़ सकता है। कोरोना महामारी पर नियंत्रण के लिए यह एक जरूरी कदम है। मास्क पहनना केवल कोरोना ही नहीं, बल्कि अन्य बीमारियों से भी बचाता है। लखनऊ के किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के श्वसन रोग विभाग के प्रमुख डॉ. सूर्यकांत ने कहा कि मास्क पहनने से सिर्फ कोविड-19 महामारी से ही नहीं क्षय रोग (तपेदिक), निमोनिया और कई तरह की एलर्जी से भी बचाव होता है। डॉ. सूर्यकांत इंडियन कॉलेज ऑफ एलर्जी, अस्थमा एवं इम्यूनोलॉजी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। उनका कहना है कि बढ़ते प्रदूषण के बीच मास्क पहनना बहुत जरूरी है।
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Facemask
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कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिये प्रदेश सरकार द्वारा गठित कार्यबल के सदस्य डॉ. सूर्यकांत ने सोमवार को मीडिया को बताया कि इस समय बढ़ता प्रदूषण व सर्दी इन बीमारियों को और गंभीर बना सकता है, ऐसे में अभी किसी भी तरह की ढिलाई बरतना खुद के साथ दूसरों को भी मुश्किल में डालने वाला साबित हो सकता है।
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Coronavirus Mask
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डॉ. सूर्यकांत ने कहा कि "वायु प्रदूषण का असर फेफड़ों पर ही नहीं बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों पर भी पड़ता है। कम तापमान व स्मॉग के चलते धूल कण ऊपर नहीं जा पाते और नीचे ही वायरस व बैक्टीरिया के संवाहक का कार्य करते हैं, ऐसे में अगर बिना मास्क लगाए बाहर निकलते हैं तो वह सांसों के जरिये शरीर में प्रवेश करने का मौका पा जाते हैं।"
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उन्होंने कहा, "घर से बाहर निकलने पर मास्क से मुंह व नाक को अच्छी तरह से ढंककर वायरस व बैक्टीरिया से जुड़ी बीमारियों जैसे कोरोना, टीबी व निमोनिया ही नहीं बल्कि एलर्जी, अस्थमा व वायु प्रदूषण जनित तमाम बीमारियों से भी सुरक्षित रहा जा सकता है।"
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Mask
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उन्होंने कहा कि "वायु प्रदूषण में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 माइक्रान यानि बहुत ही महीन धूल कण ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकते हैं, क्योंकि वह सांस मार्ग से फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं जबकि 10 माइक्रॉन तक वाले धूलकण गले तक ही रह जाते हैं जो गले में खराश और बलगम पैदा करते हैं।"
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