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Coronavirus: वेंटिलेटर ही नहीं, कोरोना काल में इस खास मशीन ने भी बचाई हजारों लोगों की जान

Fri, 02 Oct 2020 02:58 PM IST
Shashi Shashi लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shashi Shashi Updated Fri, 02 Oct 2020 02:58 PM IST
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coronavirus ecmo machine also saved thousands of lives in the world Apart from ventilator
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस बीमारी ने अपना पांव पसार रखा है। इसके चलते अब तक लाखों लोगों की मौत हो चुकी है। वैज्ञानिक और डॉक्टर इसकी वैक्सीन और इलाज की खोज करने में जुटे हुए हैं। दरअसल, कोरोना वायरस सीधे मरीज के फेफड़ों को प्रभावित करता है, जिसकी वजह से कोरोना संक्रमित व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होती है। इसलिए गंभीर मरीजों को सांस लेने के लिए वेंटिलेटर पर रखा जाता है। दुनियाभर में मरीजों की जान बचाने के लिए कई तरह के इलाज और तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इस क्रम में कोरोना के मरीजों के लिए एक नई चिकित्सा प्रणाली बहुत कारगर साबित हो रही है। ये प्रणाली वेंटिलेटर से भी ज्यादा कारगर मानी जा रही है। इस प्रणाली का नाम एक्मो है। मेडिकल जर्नल लैंसेट में एशिया, अमेरिका, यूरोप औऱ ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप में शोध के बाद ये नतीजे प्रकाशित किए गए हैं। इस प्रणाली के द्वारा कोरोना (covid 19)  के मरीजों की जान बचने की एक नई उम्मीद जगी है। इस चिकित्सा प्रणाली से अब तक हजारों लोगों की जान बचाई जा चुकी है।

coronavirus ecmo machine also saved thousands of lives in the world Apart from ventilator
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

मिशिगन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार, जब कोरोना के गंभीर मरीजों को बचाने के लिए वेंटिलेटर या अन्य जीवन रक्षक प्रणाली भी कोई फायदा नहीं कर पा रही थी, तब एक्मो चिकित्सा प्रणाली कोरोना के मरीजों के लिए वरदान साबित हुई। इस प्रणाली के द्वारा कोरोना मरीजों के फेफड़ों के रक्त में शुद्ध ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद मिली, जिससे संक्रमित गंभीर मरीजों की मृत्यु दर में 40 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। 213 अस्पतालों में करीब 1035 मरीजों पर जनवरी से लेकर अगस्त के बीच इस अध्ययन को किया गया। 

coronavirus ecmo machine also saved thousands of lives in the world Apart from ventilator
एक्मो मशीन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

मिशिगन यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसिन में प्रोफेसर रेयान बारबरो का कहना है कि वायरल निमोनिया या श्वसन संबंधी गंभीर बीमारियों में एक्मो पहले भी कारगर रही है। उनके अनुसार जब कोविड के कारण फेफड़े गंभीर रुप से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और मरीज की रक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है, इस स्थिति में कोरोना के मरीज की मृत्यु होने का खतरा बहुत बढ़ जाता है। इसलिए मरीज को बचाने के लिए उसे वेंटिलेटर रक्षा प्रणाली पर रखा जाता है, लेकिन जब वेंटिलेटर भी काम नहीं करता है तो ऐसे में एक्मो कोरोना मरीजों को लिए एक बहुत अच्छा विकल्प रहता है। एक्मो चिकित्सा प्रणाली पर रखे गए मरीजों को 90 दिन तक निगरानी में रखा गया। इस दौरान उनके स्वास्थ्य में काफी सुधार देखने को मिला।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

शोध के समय शोधकर्ताओं ने पाया कि 5,380 कोरोना मरीजों में से 80 प्रतिशत लोगों को एक्मो चिकित्सा प्रणाली से हटाए जाने के बाद 24 घंटों के अंदर ही उनकी मौत हो गई, जबकि 311 मरीजों को काफी समय तक थेरेपी सेंटर में रखना पड़ा। इसके अलावा 277 मरीजों को लंबे समय तक आईसीयू में रखा गया। शोध से जुड़े क्रिस्टीन स्टेड के मुताबिक, वैज्ञानिक तथ्यों के बाद इस बात का पता लगाया जा सकेगा कि कब और किस स्थिति में एक्मो देना है, जिससे मरीजों को बचाने में बेहतर तरीके से काम किया जा सके।

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coronavirus ecmo machine also saved thousands of lives in the world Apart from ventilator
एक्मो मशीन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

एक्मो का पूरा नाम (एक्स्ट्राकारपोरेल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन) है। यह भी वेंटिलेटर की तरह ही एक जीवन रक्षक प्रणाली है। इसके द्वारा फेफड़ों तक शुद्ध ऑक्सीजन पहुंचाने का काम किया जाता है। लेकिन इस प्रणाली में सबसे अच्छी बात ये है कि जब कोरोना के कारण फेफड़ों में सूजन और निमोनिया हो जाता है, तब ये प्रणाली कृत्रिम फेफड़ों की तरह कार्य करती है। एक्मो प्रणाली में कार्बन डाई ऑक्साइड और ऑक्सीजन को अलग किया जाता है। ये फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ने देता है, जिससे कोरोना के मरीज की सेहत में जल्दी ही सुधार होने लगता है।

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