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Vaccine Drive: बच्चों के लिए कॉर्बेवैक्स को मिली मंजूरी, जानिए 18 साल से कम उम्र वालों के लिए और कौन से टीके उपलब्ध?

Tue, 22 Feb 2022 01:16 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 22 Feb 2022 01:16 PM IST
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Corbevax Vaccine Approved for Children, other vaccine available for below 18 in india
बच्चों के लिए कोरोना का वैक्सीन - फोटो : iStock

दुनियाभर में जारी कोरोना के संक्रमण ने वैसे तो सभी आयुवर्ग के लोगों को प्रभावित किया है, हालांकि दो साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद अब भी बच्चों में संक्रमण का खतरा, लोगों के लिए बड़ी मुसीबत का कारण बनी हुई है। इसका मुख्य कारण 18 साल से कम की आयु वालों का टीकाकरण न हो पाना है। हालांकि इस दिशा में सोमवार को राहत भरी खबर सामने आई। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने 12-18 वर्ष की आयु वाले बच्चों के लिए बायोलॉजिकल-ई के कॉर्बेवैक्स (Corbevax) वैक्सीन को अंतिम मंजूरी दे दी है। यह पहली स्वदेशी रूप से विकसित प्रोटीन सब-यूनिट वैक्सीन है। इस वैक्सीन को मिली मंजूरी के साथ अब देश में बच्चों के लिए आपातकालीन उपयोग के लिए तीन वैक्सीन हो गई हैं। 



सितंबर 2021 में बायोलॉजिकल-ई को 5 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों और किशोरों पर कॉर्बेवैक्स के दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण की अनुमति मिली थी। अध्ययन में इस वैक्सीन को सुरक्षित और प्रभावी पाया गया, जिसके आधार पर दवा नियामक ने इसे आपातकालीन उपयोग को मंजूरी दी है। अध्ययनों में इस वैक्सीन को कोरोनावायरस के खिलाफ 78 फीसदी तक असरदार पाया गया है। कॉर्बेवैक्स से पहले भारत बायोटेक के कोवाक्सिन और जाइकोब-डी को भी बच्चों के लिए मंजूरी मिल चुकी है। आइए आगे की स्लाइडों में देश में बच्चों के लिए उपलब्ध वैक्सीन और उनकी प्रभाविकता के बारे में जानते हैं।

Corbevax Vaccine Approved for Children, other vaccine available for below 18 in india
बायोलॉजिकल ई की प्रोटीन वैक्सीन को आपात इस्तेमाल की मंजूरी। - फोटो : Twitter

कॉर्बेवैक्स की क्या खासियत है?
कॉर्बेवैक्स, भारत की पहला स्वदेशी विकसित रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन (आरबीडी) प्रोटीन सब-यूनिट वैक्सीन है। पिछले साल दिसंबर में इस वैक्सीन को वयस्कों पर इस्तेमाल की मंजूरी मिली थी। इस वैक्सीन को पारंपरिक सबयूनिट वैक्सीन प्लेटफॉर्म द्वारा बनाया गया है। पूरे वायरस का उपयोग करने के बजाय इसमें स्पाइक प्रोटीन की तरह फ्रेग्मेंट्स का इस्तेमाल किया गया है जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को ट्रिगर करता है। इस वैक्सीन में हानिरहित एस-प्रोटीन होता है। एक बार जब मानव प्रतिरक्षा प्रणाली इस एस-प्रोटीन को पहचान लेती है, तो अगली बार यह संक्रमण से लड़ने वाली श्वेत रक्त कोशिकाओं के रूप में एंटीबॉडी का उत्पादन करने में मदद करती है।

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बच्चों के लिए कोवाक्सिन को मंजूरी - फोटो : Pixabay

भारत बायोटेक की कोवाक्सिन
कॉर्बेवैक्स से पहले भारत सरकार ने भारत बायोटेक की कोवाक्सिन को आधिकारिक तौर पर 12 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए मंजूरी दी थी। तीसरे चरण के परीक्षण में हल्के, मध्यम और गंभीर बीमारी के खिलाफ कोवाक्सिन को 77.8 फीसदी तक प्रभावी पाया गया था। कंपनी द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस वैक्सीन को बच्चों में सुरक्षित और प्रभावकारी पाया गया है। कोवाक्सिन निष्क्रिय वायरस पर आधारित टीका है जिसका अर्थ है कि इसे निष्क्रिय कोरोनावायरस का उपयोग करके बनाया गया है, जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को ट्रिगर करती है।

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बच्चों के लिए डीएनए आधारित वैक्सीन - फोटो : pixabay

जाइकोब-डी वैक्सीन
अहमदाबाद स्थित जायडस कैडिला कंपनी द्वारा निर्मित जाइकोब डी वैक्सीन को भी बच्चों पर इस्तेमाल को मंजूरी मिल चुकी है। यह दुनिया की पहली डीएनए आधारित वैक्सीन है। यह वैक्सीन प्लास्मिड डीएनए वैक्सीन है जो प्लास्मिड नामक डीएनए अणु के गैर-प्रतिकृति वर्जन का उपयोग करके तैयार की गई है। यह शरीर में सार्स-सीओवी-2 वायरस के मेंब्रेन पर मौजूद स्पाइक प्रोटीन का एक हानिरहित वर्जन तैयार करने में मदद करेगी, जिससे भविष्य में संक्रमण के खिलाफ आसानी से सुरक्षा प्राप्त की जा सकेगी। अध्ययनों में इसके 66 फीसदी से अधिक प्रभावी होने का दावा किया गया है। जायकोब-डी कोरोना की पहली निडिल-फ्री वैक्सीन भी है, यानी कि शरीर में इसे इंजेक्ट करने के लिए अन्य वैक्सीनों की तरह निडिल की जरूरत नहीं होगी। निडिल की बजाय जेट इंजेक्टर के माध्यम से इसके टीके दिए जाएंगे। 

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बच्चों का टीकाकरण - फोटो : iStock

दुनियाभर में बच्चों के लिए उपलब्ध वैक्सीन
कोवॉक्सिन, जाइकोब डी और कॉर्बेवैक्स को भारत में तो मंजूरी मिल चुकी है, वहीं दुनिया के कई देशों में बच्चों के लिए कई अन्य वैक्सीनों को प्रयोग में लाया जा रहा है। इसमें अमेरिका में फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन, स्विट्जरलैंड और इटली ने 12 से 18 साल के बच्चों के लिए मॉडर्ना वैक्सीन को मंजूरी दी है। चीन में बच्चों के लिए सिनोफार्मा और सिनोवैक वैक्सीनों को मान्यता मिल चुकी है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 

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