आंखें ईश्वर का अनमोल उपहार हैं, इन्हीं की मदद से हम दुनिया के नजारे ले पाते हैं। हालांकि उम्र बढ़ने के साथ आंखों की समस्याएं भी बढ़ने लगती हैं। विशेषकर 40 की उम्र के बाद ज्यादातर लोगों में आंखों से संबंधित समस्याएं शुरू हो जाती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अब कम उम्र के लोगों में भी आंखों की समस्याएं बढ़ती हुई देखी जा रही हैं। बड़ी संख्या में बच्चों में कम दिखाई देने, रोशनी की कमी होने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिसके कारण कम उम्र में ही चश्मा लग जा रहा है।
आंखें हैं अनमोल: 40 की उम्र के बाद बढ़ने लगती हैं आंखों की समस्याएं, ये चार टिप्स सभी के लिए फायदेमंद
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कम उम्र से ही पौष्टिक आहार पर दें ध्यान
पौष्टिक आहार संपूर्ण स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए जरूरी हैं। आंखों की रोशनी को भी बेहतर बनाए रखने, रेटिना और मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए आहार में पौष्टिक चीजों का जरूर शामिल किया जाना चाहिए। ऐसा आहार जो विटामिन-ए, सी और ई, जिंक, ल्यूटिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स और आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर हों, आंखों को स्वास्थ रखने में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
हरी पत्तेदार सब्जियों, गाजर, चुकंदर, बादाम, अंडे के साथ खट्टे फलों को आहार का हिस्सा बनाकर आंखों को स्वस्थ रखा जा सकता है।
कम करें स्क्रीन टाइम
स्क्रीन टाइम यानी मोबाइल-कंप्यूटर पर बीतने वाला समय। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि आपका स्क्रीन टाइम जितना अधिक होगा, आंखों के लिए उतनी समस्याएं हो सकती हैं। हमारी आंखों में आंसू के रूप में नमी होती है। ये आंसू की फिल्म पानी के साथ-साथ इलेक्ट्रोलाइट्स और प्रोटीन और एंजाइम से बनी होती है। लंबे समय तक स्क्रीन के संपर्क में रहने के कारण समय के साथ आंसू सूखने लगते हैं, हमारी आंखें शुष्क होती जाती हैं।
आंखों में नमी कम होने से दर्द, लालिमा, रगड़ बढ़ जाती है जिससे आंखों की नाजुक त्वचा को क्षति पहुंच सकती है।
आंखों का व्यायाम जरूरी
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जिस तरह से व्यायाम जरूरी है, आंखों के लिए भी इसकी आवश्यकता होती है। आंखों के व्यायाम के लिए हर 20 मिनट में, कम से कम 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखने की आदत बनाएं। आंखों को थोड़ी-थोड़ी देर पर बंद करके क्लाक और एंटीक्लाक वाइज घुमाएं।
आंखों की मांसपेशियों को मजबूत रखने, रक्त का संचार बढ़ाने में कुछ योग के अभ्यास को काफी लाभकारी पाया गया है।
नियमित जांच जरूरी
उम्र बढ़ने के साथ आंखों की रोशनी कम होने लगती है, पर इसकी शुरुआत काफी पहले से ही हो जाती है। हमें इसका पता तब चल पाता है जब समस्या काफी बढ़ जाती है। इसलिए जरूरी है कि नियमित रूप से आंखों की जांच कराई जाए। आंखों की कई ऐसी बीमारियां हैं जो बिना किसी लक्षण के लंबे समय तक बनी रहती हैं और अंदर ही अंदर क्षति पहुंचाती रहती हैं इसलिए वार्षिक नेत्र जांच कराना महत्वपूर्ण है।
मधुमेह, उच्च रक्तचाप या नेत्र रोग के पारिवारिक इतिहास वाले लोगों को साल में कम से दो बार डॉक्टर की सलाह पर जांच करानी चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।