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जानना जरूरी: भारतीय पुरुषों और महिलाओं में ये दो कैंसर हैं सबसे आम, जानिए इनके लक्षण और बचाव के तरीके

Mon, 17 Oct 2022 03:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 17 Oct 2022 03:00 PM IST
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Common Cancer of Male and Female in India Know Prostate and Breast Cancer Symptoms and Precautions to Follow
कैंसर के जोखिम कारकों के बारे में जानिए - फोटो : Pixabay

कैंसर का खतरा वैश्विक स्तर पर बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। कैंसर का जोखिम आनुवांशिक हो सकता है पर इसके साथ विशेषज्ञ लाइफस्टाइल और आहार संबंधित गड़बड़ी को भी इसका प्रमुख कारण मानते हैं। दुनियाभर में कैंसर के कारण साल 2020 में 10 मिलियन से अधिक लोगों की मौत हुई। भारत के संदर्भ में बात  करें तो यहां भी खतरा तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी उम्र के लोगों को कैंसर को जोखिम से बचने वाले उपाय करते रहने की सलाह देते हैं। दैनिक जीवन की कई आदतें जैसे धूम्रपान-शराब का सेवन, आहार की गड़बड़ी और कई अन्य कारणों से कैंसर का खतरा हो सकता है।



आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर जबकि महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा सबसे अधिक रिपोर्ट किया जाता रहा है। आमतौर पर 60 साल से अधिक आयु के पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम सबसे अधिक देखा जाता है, हालांकि यह कम उम्र के लोगों को भी प्रभावित कर सकता है।

वहीं इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर 2020 में हर चार कैंसर से पीड़ित महिलाओं में से एक को स्तन कैंसर था। भारत में कैंसर के कारण मौत के मामलों में से 37 फीसदी स्तन कैंसर से संबंधित थे। आइए इन दोनों कैंसर बारे में विस्तार से समझते हुए इससे बचाव के तरीकों के बारे में जानते हैं।

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प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को समझिए - फोटो : istock

पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा

प्रोस्टेट कैंसर, प्रोस्टेट ग्रंथि में होता है। प्रोस्टेट, पुरुषों में अखरोट के आकार की एक छोटी ग्रंथि है जो वीर्य का उत्पादन करती है जो शुक्राणु को पोषण और परिवहन के लिए जिम्मेदार है। आनुवांशिकता के साथ मोटापा, लाइफस्टाइल की गड़बड़ी को इस कैंसर के कारक के तौर पर जाना जाता है। प्रोस्टेट कैंसर के अधिकतर मामलों में शुरुआती चरणों में कोई लक्षण नहीं नजर आते हैं। इसके बढ़ने के साथ पेशाब करने में परेशानी, पेशाब और वीर्य से खून आने, वजन घटने और नपुंसकता जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। अपने जोखिम कारकों के आधार पर इससे बचाव के उपाय किए जाने चाहिए।

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प्रोस्टेट कैंसर से करें बचाव - फोटो : istock

प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम और बचाव के तरीके?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कुछ संभावित जोखिम कारकों पर ध्यान रखकर प्रोस्टेट कैंसर से बचाव किया जा सकता है। यदि आपमें मोटापे की समस्या है या फिर आप धूम्रपान-शराब का सेवन अधिक करते हैं तो अन्य लोगों की तुलना में आपमें इस कैंसर के विकसित होने का खतरा अधिक हो सकता है। इसके अलावा रसायनों के संपर्क में रहने वाले, यौन संचारित संक्रमण के कारण भी आपमें इस कैंसर के विकसित होने का खतरा हो सकता है।

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स्तन कैंसर का खतरा - फोटो : iStock

महिलाओं में स्तन कैंसर के जोखिम

स्तन में कोशिकाओं के बढ़ने और अनियंत्रित तरीके से विभाजित होने के कारण  स्तन कैंसर हो सकता है। इसमें आपको स्तनों के ऊतक में गांठ महसूस हो सकती है जिसे ट्यूमर कहा जाता है। स्तन कैंसर के लक्षणों में आपके स्तन में एक गांठ महसूस होना, स्तन के आकार में बदलाव का अनुभव करना और स्तनों की त्वचा में परिवर्तन नजर आ सकती है। मैमोग्राम के माध्यम से इसका जल्दी पता लगाने में मदद मिलती है। 50 की आयु के बाद इस कैंसर के विकसित होने का जोखिम अधिक होता है पर यह कम उम्र की महिलाओं में भी देखा जाता रहा है।

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स्तन कैंसर के जोखिम को कैसे कम करें? - फोटो : istock

ब्रेस्ट कैंसर के कारण और बचाव के तरीके

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जिनके परिवार में किसी को पहले इस प्रकार का कैंसर रह चुका है उनमें इसका खतरा अधिक होता है। इसके अलावा यदि आपमें मोटापे की समस्या है या फिर आप धूम्रपान-शराब का सेवन करती हैं तो अन्य महिलाओं की तुलना में आपमें इस कैंसर के विकसित होने का खतरा अधिक हो सकता है। रेडिएशन और हार्मोनल थेरेपी के कारण भी स्तन कैंसर हो सकता है।

स्तन कैंसर से बचाव के लिए 20 की आयु के बाद नियमित रूप से स्तनों की जांच करती रहें। आहार और लाइफस्टाइल को ठीक रखकर इस खतरे से बचाव किया जा सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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