कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच इससे बचने को तमाम तरह के उपाय सुझाए जा रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग यानी सामाजिक दूरी कोरोना संक्रमण को रोकने में सबसे बड़ा उपाय साबित हुई है। देश में समय रहते लगाए गए लॉकडाउन के कारण ही कोरोना संक्रमण के मामले इटली, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों के मुकाबले कम है। कोरोना से हुई मौतों का आंकड़ा भी देश में अपेक्षाकृत कम है। कोरोना को फैलने से रोकने के लिए दुनियाभर में सामाजिक दूरी बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। लोगों को छह फीट की दूरी बनाए रखने का निर्देश है, लेकिन क्या यह दूरी पर्याप्त होगी?
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Social Distancing
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एक अध्ययन के मुताबिक, छह फीट की सामाजिक दूरी बनाने के मौजूदा दिशा निर्देश कोरोना संक्रमण को रोक पाने में अपर्याप्त साबित हो सकते हैं। इस अध्ययन में कहा गया है कि धीमी गति से चलने वाली हवा में हल्की खांसी से मुंह की लार के छीटें 18 फीट की दूरी तक फैल सकती हैं।
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लॉकडाउन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन(File Photo)
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साइप्रस में निकोसिया विश्वविद्यालय में यह शोध अध्ययन किया गया है। इस अध्ययन में अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि चार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली मद्धिम हवा के साथ खांसने पर मुंह के लार की छीटें पांच सेकंड में 18 फीट की दूरी तक फैल सकती हैं। और अगर लार के ये द्रव कण कोरोना संक्रमित की हो तो संपर्क में आने वाले व्यक्ति को भी संक्रमण का खतरा है।
अध्ययन के सह-लेखक दिमित्री द्रिकाकिस के मुताबिक ये सुक्ष्म बूंदें अलग-अलग कद काठी के वयस्कों और बच्चों को प्रभावित करेगी। वैज्ञानिकों के अनुसार अगर छोटी कद काठी के वयस्क और बच्चे लार की सुक्ष्म बूंदें गिरने के दायरे के भीतर आते हैं तो उन्हें संक्रमण का खतरा ज्यादा है।
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कई जगहों पर सामाजिक दूरी का महत्व नहीं समझ रहे हैं लोग(File Photo)
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मालूम हो कि देश में 18 मई के बाद लॉकडाउन का चौथा चरण शुरू हो गया है, जो 31 मई तक चलेगा। इस दौरान राज्य सरकारों ने अपनी ओर से नियमन कर आर्थिक गतिविधियों की अनुमति दी है। सड़कों पर आवाजाही भी बढ़ी है। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना और भी ज्यादा जरूरी हो गया है।