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COPD: बढ़ता वायु प्रदूषण सीओपीडी वाले रोगियों के लिए हो सकता है घातक, बचाव के लिए अपनाएं ये तरीके

Sat, 11 Nov 2023 01:03 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 11 Nov 2023 01:03 PM IST
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chronic obstructive pulmonary disease prevention tips does air pollution cause COPD
वायु प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम - फोटो : istock

राजधानी दिल्ली-एनसीआर इन दिनों गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में है। हवा की खराब होती गुणवत्ता संपूर्ण सेहत के लिए गंभीर दुष्प्रभावों वाली हो सकती है। विशेषतौर पर यदि आप पहले से ही सांस से संबंधित किसी बीमारी के शिकार रहे हैं तो दूषित हवा आपकी जटिलताओं को कई गुना तक बढ़ाने वाली हो सकती है। विशेषतौर पर अस्थमा और क्रोनिक ऑबस्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के शिकार लोगों को इन दिनों में विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है।



क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, बीमारियों के उस समूह को संदर्भित करता है जो वायु प्रवाह में रुकावट और सांस लेने से संबंधित समस्याओं का कारण बनती है। वैश्विक स्तर पर इस रोग के बढ़ते मामलों के बारे में लोगों को अलर्ट करने और बचाव के उपायों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल नवंबर माह के तीसरे बुधवार को वर्ल्ड सीओपीडी डे मनाया जाता है।

आइए इस रोग की गंभीरता के बारे में समझते हैं।

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श्वसन समस्याओं का जोखिम - फोटो : Pixabay

पहले सीओपीडी के बारे में जान लीजिए

क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) फेफड़ों की गंभीर बीमारी है जो वायु प्रवाह में बाधा उत्पन्न करती है। इसके लक्षणों में सांस लेने में कठिनाई, खांसी, बलगम (थूक) का अधिक उत्पादन होने और घरघराहट जैसी दिक्कतें शामिल हैं। यह आम तौर पर गैसों या प्रदूषण के कणों के संपर्क में रहने के कारण अधिक होती है।

सिगरेट पीना या इसके धुएं से भी यह रोग होता है। सीओपीडी वाले लोगों में हृदय रोग, फेफड़ों के कैंसर और कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों के विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।

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सीओपीडी के बढ़ते मामले - फोटो : Pixabay

वायु प्रदूषण और सीओपीडी का खतरा

दुनियाभर में, सीओपीडी के बढ़ते मामलों के जोखिमों के लिए वायु प्रदूषण एक बड़ा कारण माना जाता रहा है। कुछ प्रकार के वायु प्रदूषक फेफड़ों में गहराई तक जाकर सूजन पैदा कर सकते हैं। यदि आपको अस्थमा है, तो वायु प्रदूषण इसका एक ट्रिगर हो सकता है।

जब प्रदूषण का स्तर अधिक होता है, तो अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) सहित फेफड़ों की समस्याओं वाले लोगों के अस्पताल में भर्ती होने के मामले भी अधिक देखे जाते रहे हैं। वायु प्रदूषण का अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों प्रकार के संपर्क के कारण इन स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है।

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श्वसन विकारों के जोखिम कारक - फोटो : iStock

सीओपीडी और इसकी दिक्कतें

अस्थमा से पीड़ित लोगों में सीओपीडी होने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। अगर आपको अस्थमा है और आप धूम्रपान भी करते हैं तो इसके कारण सीओपीडी का खतरा और भी अधिक बढ़ जाता है। इसके अलावा सीओपीडी वाले लोगों में सर्दी, फ्लू और निमोनिया होने की आशंका भी अधिक देखी जाती रही है। ये श्वासप्रणाली में संक्रमण और फेफड़े के कैंसर के खतरे को भी बढ़ा देती है।

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सांस की समस्याओं से करें बचाव - फोटो : iStock

सीओपीडी से कैसे करें बचाव?

सीओपीडी के अधिकांश मामले सीधेतौर पर सिगरेट पीने से संबंधित होते हैं इससे बचाव का सबसे अच्छा तरीका धूम्रपान बंद कर देना है। इसके अलावा वायु प्रदूषण के कारण भी यह रोग विकसित हो सकती है, इसलिए प्रदूषित हवा में जाने से बचना चाहिए। धूल और प्रदूषण वाले इलाकों में जाते समय मास्क जरूर पहनें।

श्वसन संक्रमणों के जोखिम को कम करने के लिए वार्षिक फ्लू टीकाकरण और निमोनिया का टीकाकरण करवाएं। श्वसन अभ्यास से भी फेफड़ों को स्वस्थ रखने और इस तरह की समस्याओं से बचाव में मदद मिल सकती है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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