जिस तरह से हमारी दिनचर्या-खानपान में गड़बड़ी बढ़ती जा रही है, इसने कई तरह की क्रॉनिक बीमारियों के खतरे को भी बढ़ा दिया है। लिहाजा हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और दिल की बीमारियां, जो पहले बुजुर्गों की बीमारी मानी जाती थी, वह अब कम उम्र वालों को भी अपना शिकार बनाती जा रही हैं। बढ़ते स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए डॉक्टर सभी लोगों को 30 की उम्र के बाद नियमित रूप से हेल्थ चेकअप कराते रहने की सलाह देते हैं।
हेल्थ अलर्ट: इन गंभीर बीमारियों के शुरुआती संकेत होते हैं बेहद सामान्य, पर इग्नोर करना पड़ सकता है भारी
कई बीमारियां शुरुआत में गंभीर लक्षण नहीं देतीं। हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डायबिटीज, फैटी लिवर और एनीमिया में शुरुआती संकेत बेहद सामान्य हो सकते हैं या बिल्कुल नहीं भी दिख सकते। लगातार थकान, कमजोरी या दूसरे बदलावों को नजरअंदाज करना आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है।
बीमारियों की समय पर पहचान जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हाई ब्लड प्रेशर इसका सबसे आम उदाहरण है। इसमें शुरुआत में अक्सर लोगों को कोई खास लक्षण महसूस नहीं होता। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, बहुत से लोगों को यह पता ही नहीं होता कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है।
- इसी तरह से टाइप-2 डायबिटीज में भी शुरुआत में लक्षण बिल्कुल हल्के हो सकते हैं और बीमारी कई साल तक धीरे-धीरे बढ़ सकती है।
- तेजी से बढ़ती फैटी लिवर की समस्या भी अक्सर शुरुआत में बिना लक्षणों के रहती है। कुछ लोगों में सिर्फ थकान या पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में परेशानी हो सकती है। यही वजह से काफी वक्त तक लोगों में इस बीमारी का पता ही नहीं चल पाता।
बिना लक्षणों के बढ़ता है हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज
हाई ब्लड प्रेशर को ‘साइलेंट’ किलर कहा जाता है क्योंकि इसमें अक्सर कोई साफ लक्षण नहीं होता।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, बहुत से लोगों को अपने हाई ब्लड प्रेशर की जानकारी ही नहीं होती। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर इसे पकड़ना मुश्किल है।
- वहीं टाइप-2 डायबिटीज में ज्यादा प्यास, बार-बार पेशाब, थकान, धुंधला दिखना या बिना कोशिश वजन कम होने जैसे लक्षण हो सकते हैं। लेकिन ये लक्षण हल्के इतने हल्के होते कि कई साल बाद ध्यान में आते हैं। डायबिटीज का समय पर पता न चलना धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाता रहता है।
फैटी लिवर की पहचान भी मुश्किल
फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है, ये बीमारी शुरुआत में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षणों के रहती है। इसे अब मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज यानी एमएएसएलडी भी कहा जाता है।
- कुछ लोगों को इसके कारण थकान या पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में हल्की परेशानी हो सकती है।
- चूंकि शुरुआती अवस्था में लक्षण बहुत कम होते हैं, इसलिए कई बार यह जांच या किसी दूसरी वजह से की गई मेडिकल जांच के दौरान ही सामने आता है।
- फैटी लिवर पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इसके कारण लिवर को गंभीर खतरे हो सकते हैं।
एनीमिया की दिक्कत
आयरन की कमी से होने वाली एनीमिया की दिक्कत महिलाओं में काफी आम है। करीब 57% भारतीय महिलाएं इसका शिकार हैं। जब शरीर में पर्याप्त आयरन नहीं होता और स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं पर्याप्त मात्रा में नहीं बन पातीं तो इससे एनीमिया का खतरा हो सकता है।
- हल्के स्तर के एनीमिया में कोई लक्षण नहीं दिखते। कुछ लोगों को थकान, कमजोरी, चक्कर आने, सांस फूलने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। ये संकेत बहुत सामान्य हैं, इसलिए कई लोग इन्हें नींद की कमी या काम के दबाव मानकर इग्नोर करते रहते हैं। एनीमिया समय के साथ कई गंभीर खतरे को जन्म दे सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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