कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी के चमत्कारिक इलाज के तौर पर कई लोग इन दिनों एक विवादास्पद रसायन क्लोरीन डाइऑक्साइड के इस्तेमाल को बढ़ावा देने लगे हैं। इसे 'मिराकल मिनरल सप्लीमेंट' या 'चमत्कारिक खनिज पदार्थ' के नाम से भी जाना जाता है।
क्लोरीन डाइऑक्साइड: वो खतरनाक केमिकल जिसे बताया जा रहा कोरोना वायरस का इलाज
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क्लोरीन डाइऑक्साइड के खतरे
लेकिन इस केमिकल से जुड़े खतरों की एक लंबी सूची है और कई संगठनों ने इसके इस्तेमाल को लेकर सख्त चेतावनी भी जारी की हैं। आखिरी चेतावनी अमरीका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (यूएसएफडीए) विभाग की तरफ से आई है।
यूएसएफडीए ने आठ अप्रैल को जारी की गई चेतावनी में कहा है, "क्लोरीन डाइऑक्साइड के प्रभाव या सुरक्षा के बारे में कोई वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। इससे मरीज के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा पहुंचता है।"
क्या है क्लोरीन डाइऑक्साइड?
इसे डिस्टिल वाटर (जब पानी को उबालकर भाप में और उसे वापस ठंडा कर पानी में बदल दिया जाता है) में सोडियम क्लोराइट मिलाकर तैयार किया जाता है। इसका इस्तेमाल साफ-सफाई के काम में किया जाता है। नाम से ये ब्लीच या क्लोरीन के करीब लगता है।
कंप्लूटेंस यूनिवर्सिटी ऑफ मैड्रिड में केमिस्ट्री के प्रोफेसर मिगेल एंजेल सिएरा रॉड्रिग्ज कहते हैं, "ये एक ऐसा कीटाणुनाशक है जिसका इस्तेमाल उद्योगों में किया जाता है। इसे कभी खाने या पीने के इस्तेमाल में नहीं लाना चाहिए।"
यूएसएफडीए ने भी कहा है कि क्लोरीन डाइऑक्साइड पीने से गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं और यहां तक कि जान भी जा सकती है। प्रोफेसर मिगेल ने बताया, "इसमें कोई शक नहीं कि कोरोना वायरस पर क्लोरीन डाइऑक्साइड का कोई असर नहीं होता है।"
जानलेवा साइड इफेक्ट्स
क्लोरीन डाइऑक्साइड के इस्तेमाल के बाद मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्परिणाम सामने आए हैं। अमरीका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग को मिली रिपोर्टों के मुताबिक, इस केमिकल से शरीर के श्वसन प्रणाली, लिवर (यकृत) जैसे अंग काम करना बंद कर देते हैं।
कुछ मामलों में तो दिल की धड़कनें इस हद तक असामान्य हो गईं कि मरीज की जान जाने तक की नौबत आ जाती है। इसके अलावा लाल रक्त कोशिकाओं को नुकसान, उल्टी और डायरिया का गंभीर प्रकोप भी देखा गया है।
यूएसएफडीए का कहना है कि क्लोरीन डाइऑक्साइड के इस्तेमाल के बाद अगर मेडिकल हेल्प लेने में देरी हुई तो इससे स्थिति और बिगड़ सकती है।
कोविड-19 के खिलाफ
मुश्किल तो तब और बढ़ जाती है जब फेसबुक और यूट्यूब पर ऐसे वीडियो की भरमार दिखती है जिनमें लोग क्लोरीन डाइऑक्साइड के औषधीय गुणों का बखान कर रहे होते हैं। इन वीडियो में लोगों को ये दावा करते देखा जा सकता है कि क्लोरीन डाइऑक्साइड में वायरस और बैक्टीरिया को खत्म करने की क्षमता है।
कोरोना वायरस से फैली महामारी के दौर में अब लोग इसे कोविड-19 के खिलाफ चमत्कारिक इलाज के तौर पर बता रहे हैं। ऐसे ही एक वीडियो में इक्वाडोर के गुआयाक्वील शहर की एक महिला जो अस्थमा की मरीज भी हैं, उन्होंने क्लोरीन डाइऑक्साइड को लेकर अपने अनुभव बताएं।