रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस (आरएसवी) वैश्विक स्तर पर बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करने वाली समस्या है, मुख्यरूप से इसका खतरा बच्चों में अधिक देखा जाता है पर कुछ स्थितियों में अधिक उम्र के लोगों में भी इसका जोखिम हो सकता है। आरएसवी सामान्य श्वसन वायरस है जो बच्चों और वयस्कों में सर्दी जैसे लक्षण पैदा करती है। कभी-कभी इसके लक्षण गंभीर और अप्रत्याशित भी हो सकते हैं, जिसमें संक्रमित शिशुओं को अस्पताल में भर्ती करने की भी जरूरत हो सकती है।
CDC की सलाह: बच्चों का जरूर कराएं RSV वैक्सीनेशन, कोविड जैसे लक्षणों वाला ये रोग हो सकता है गंभीर
बच्चों का टीकाकरण कराना जरूरी
सीडीसी विशेषज्ञों का कहना है, 8 महीने से कम उम्र के सभी बच्चों को रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस या आरएसवी से बचाने के लिए इसका टीका लगाना चाहिए। आरएसवी आमतौर पर हल्के सर्दी के लक्षणों का ही कारण बनती है, लेकिन पहले संक्रमण के दौरान शिशुओं में निमोनिया या उनके फेफड़ों के छोटे वायुमार्गों की सूजन जैसी गंभीर जटिलताओं का खतरा भी हो सकता है।
अनुमान है कि हर साल एक साल से कम उम्र के एक से तीन फीसदी बच्चे आरएसवी के कारण अस्पताल में भर्ती होते हैं। टीकाकरण की मदद से इस खतरे को कम किया जा सकता है।
टीकाकरण से 80 फीसदी कम हो सकता है जोखिम
हाल ही में एफडीए ने शिशुओं और कुछ उच्च जोखिम वाले बच्चों के लिए इंजेक्शन को मंजूरी दी थी। सीडीसी ने यह भी सिफारिश की है कि 19 महीने से कम उम्र के उच्च जोखिम वाले बच्चों को निर्सेविमैब दिया जाना चाहिए। यह वायरस के संक्रमण से बचाने वाली वैक्सीन है। नैदानिक परीक्षणों से पता चला है कि इसकी मदद से शिशुओं में आरएसवी के लिए अस्पताल में भर्ती होने और गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को लगभग 80% तक कम किया जा सकता है।
रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस के बारे में जानिए
रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस (आरएसवी) फेफड़ों और श्वसन तंत्र में संक्रमण का कारण बनता है। वयस्कों और अधिक उम्र के लोगों में आरएसवी के लक्षण हल्के होते हैं और आमतौर पर सामान्य सर्दी जैसे ही देखे जाते हैं। आरएसवी कुछ लोगों में गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है।
एक साल और उससे कम उम्र के बच्चे (शिशु), विशेष रूप से समय से पहले जन्मे, हृदय और फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों या कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यूनोकम्प्रोमाइज्ड) वालों में इस संक्रमण के कारण गंभीर रूप लेने का खतरा अधिक हो सकता है जिससे बचाव करना बहुत आवश्यक है।
कोविड-19 से मिलते-जुलते होते हैं इसके लक्षण
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि आरएसवी और कोरोना वायरस दोनों एक ही प्रकार के श्वसन वायरस हैं, इसलिए इसके कुछ लक्षण समान हो सकते हैं। बच्चों में, कोविड-19 के परिणामस्वरूप अक्सर बुखार, नाक बहना और खांसी जैसे हल्के लक्षण होते हैं, इसी तरह की दिक्कत आरएसवी संक्रमण के दौरान भी देखा जाती रही है।
यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि आरएसवी होने से प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती है जो बच्चों और वयस्कों में कोविड-19 होने का खतरा बढ़ा सकती है। वहीं अगर किसी को दोनों संक्रमण एक साथ हो जाएं तो बीमारी के और भी गंभीर रूप लेने का जोखिम अधिक हो जाता है।
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