Medically Reviewed by-
कोरोना महामारी की दूसरी लहर से मुकाबले और संभावित तीसरी लहर के असर को कम करने के लिए विशेषज्ञ टीकाकरण को ही सबसे प्रभावी उपाय मान रहे हैं। देश में फिलहाल 18 साल से ऊपर के लोगों के टीकाकरण की व्यवस्था की गई है, हालांकि वैक्सीन की कमी फिलहाल चिंता का विषय बनी हुई है। वैज्ञानिक लगातार तमाम उम्र और स्थिति वाले लोगों पर टीके की प्रभाविता को जानने के लिए परीक्षण कर रहे हैं। इसी दिशा में हाल ही में स्तनपान कराने वाली महिलाओं को टीकाकरण करने की अनुमति दे दी गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों की मानें तो बच्चों पर टीकाकरण के प्रभाव को जानने के लिए अध्ययन किया जा रहा है।
वैक्सीनेशन अभियान के बीच लोगों के मन मे सवाल आ रहे हैं कि क्या टीकाकरण करा चुके लोगों को पूरी तरह से सुरक्षित माना जा सकता है? क्या जिन लोगों का टीकाकरण हो चुका है उनसे भी संक्रमण होने का खतरा रहता है? आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
विशेषज्ञ से जानिए: क्या टीकाकरण करा चुके लोगों से भी हो सकता है संक्रमण का खतरा?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टीके वायरस के खिलाफ प्रभावी
अमर उजाला से बातचीत में अपोलो अस्पताल में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ जतिन आहूजा बताते हैं कि वैज्ञानिक रूप से देश में प्रयोग में लाए जा रहे सभी कोविड वैक्सीनों का अच्छी तरह से अध्ययन किया गया है। इसमें विशेषज्ञों ने पाया है कि सभी टीके वायरस के खिलाफ शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को मजबूत करने में सहायक हैं। इसके अलावा टीकाकरण के बाद भी अगर किसी व्यक्ति को संक्रमण हो जाता है तो उसमें कोविड-19 की जटिलताओं का खतरा काफी कम हो जाता है।
अब तक के अध्ययनों से स्पष्ट संकेत मिलता है कि वैक्सीन, कोविड-19 के प्रभाव को कम करने में काफी मददगार है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि जिन लोगों को टीकाकरण हो चुका है, उनसे संचरण का जोखिम कितना हो सकता है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक इस बारे में पर्याप्त सबूत नहीं मिल जाते हैं तब तक यही मान कर चलना होगा कि टीकाकरण कर चुके लोगों से भी संक्रमण का खतरा हो सकता है।
इन बातों पर देना होगा विशेष ध्यान
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि वैक्सीनेशन के बाद कोविड-19 का ट्रांसमिशन एसिम्टोमैटिक प्रसार पर भी निर्भर करता है। इसके अलावा जिस तरह से कोरोना की दूसरी लहर में देखने को मिला है कि कई सारे ऐसे वेरिएंट्स सामने आ रहे हैं जो न सिर्फ अत्यंत संक्रामक हैं साथ ही एंटीबॉडी को पार करने की क्षमता भी रखते हैं। इस आधार पर भी संक्रामकता को ध्यान में रखना आवश्यक हो जाता है।
कोरोना के मिल रहे नए वेरियंट्स को भी संभावित परिदृश्य माना जा सकता है जिसमें टीका लगवा चुके लोगों से संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है। टीकाकरण के बाद संक्रमण होने पर गंभीर रूप से बीमार पड़ने की संभावना कम जरूर हो सकती है लेकिन म्यूटेंट के कारण संक्रमण की आशंका पर अभी भी गहराई से अध्ययन करने की आवश्यकता है।
------------
नोट: यह लेख अपोलो दिल्ली में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ जतिन आहूजा से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉ जतिन आहूजा अस्पताल में कोरोना संक्रमितों का इलाज करते रहे हैं।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।