फैटी लिवर यानी लिवर में सामान्य से अधिक मात्रा में फैट जमा होने की समस्या सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाली हो सकती है। ये समस्या अब कम उम्र के लोगों को भी अपना शिकार बना रही है। विशेषतौर पर भारतीय लोगों में फैटी लिवर की दिक्कत तेजी से बढ़ती हुई देखी जा रही है।
जानना जरूरी: क्या फैटी लिवर के कारण लिवर कैंसर होने का भी खतरा रहता है? यहां जानिए सबकुछ
लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण 20 की उम्र में भी लोगों को फैटी लिवर की समस्या हो रही है। साल 2022 में प्रकाशित एक स्वीडिश अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने पाया कि एनएएफएलडी वाले लोगों में लिवर कैंसर का जोखिम सामान्य आबादी के लोगों की तुलना में 12 गुना अधिक था।
फैटी लिवर और इसके कारण होने वाली समस्याएं
आप इस बारे में शायद ही कभी सोचते होंगे, लेकिन आपका लिवर शरीर को स्वस्थ रखने के लिए निरंतर काम करता रहता है। लिवर भोजन को पचाने से लेकर शरीर से अपशिष्टों को बाहर निकालने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन क्या आपने सोचा है कि आपका लिवर ही अगर अस्वस्थ हो जाए तो फिर क्या होगा?
फैटी लिवर की समस्या हमारे लिवर को बीमार कर रही है। नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज (एनएएफएलडी) की समस्या उन लोगों को प्रभावित कर रही है जो बहुत कम या कभी भी शराब नहीं पीते थे। डॉक्टर कहते हैं, अगर फैटी लिवर का समय पर इलाज न हो पाए या फिर ये गंभीर रूप ले ले तो इसके कारण लिवर में कैंसर होने का जोखिम भी बढ़ सकता है।
फाइब्रोसिस या सिरोसिस और कैंसर का खतरा
यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में इंटरनल मेडिसिन की एसोसिएट प्रोफेसर जेसिका ह्वांग कहती हैं, फैटी लिवर की शुरुआती स्थिति में ज्यादातर लोगों में कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं। यही कारण है कि इसका समय पर पता नहीं चलता और इलाज नहीं हो पाता। अगर इस बीमारी को ऐसे ही छोड़ दिया जाए और इसका इलाज न हो पाए तो समय के साथ ये लिवर की कोशिकाओं में क्षति, लिवर फाइब्रोसिस या सिरोसिस और लिवर कैंसर के खतरे को बढ़ा सकती है।
अध्ययनों से पता चलता है कि मोटापे से ग्रस्त 90% लोगों में फैटी लिवर का खतरा रहता है।
लिवर में फैट बढ़ने की स्थिति में आपके लिवर की खुद को विषाक्त पदार्थों से बचाने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। ये स्थिति लिवर में सूजन पैदा कर सकती है जिसके कारण सिरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। लिवर सिरोसिस एक गंभीर स्थिति है, जो लिवर में कैंसर होने के खतरे को बढ़ा देती है।
एनएएफएलडी के कारण लिवर कैंसर का जोखिम
साल 2022 में प्रकाशित एक स्वीडिश अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने पाया कि एनएएफएलडी वाले लोगों में लिवर कैंसर का जोखिम सामान्य आबादी के लोगों की तुलना में 12 गुना अधिक था। इसके अतिरिक्त, ऐसे लोगों में किसी भी कैंसर के विकसित होने का जोखिम करीब दो गुना अधिक था।
इसी तरह दक्षिण कोरियाई राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा सेवा के डेटा का उपयोग करके साल 2023 में किए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि अल्कोहल पीने के कारण होने फैटी लिवर वाले पुरुषों में लीवर कैंसर का जोखिम 2.34 गुना वहीं महिलाओं में 2.60 गुना अधिक था।
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