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सेहत: विटामिन-डी की कमी भी बढ़ा सकती है संक्रमण का खतरा? जानिए क्या है इसका इम्युनिटी से कनेक्शन

Sun, 13 Sep 2026 10:02 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 13 Sep 2026 10:02 PM IST
सार

विटामिन-डी सिर्फ हड्डियों और कैल्शियम के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि प्रतिरक्षा प्रणाली के सामान्य कामकाज में भी भूमिका निभाता है। इसकी कमी संक्रमण के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है।

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How Vitamin D Supports Immune System know Vitamin D for Bones and Protect Against Infections
विटामिन-डी क्यों जरूरी है? - फोटो : Amarujala.com/AI

अच्छी सेहत के लिए जिन पोषक तत्वों की सबसे ज्यादा चर्चा होती है, विटामिन-डी उनमें से एक है। विटामिन-डी का नाम सुनते ही सबसे पहले हमारे दिमाग में हड्डियों की मजबूती का ख्याल आता है। मुख्यरूप से धूप से मिलने वाला ये विटामिन शरीर में कैल्शियम के अवशोषण को बढ़ाने में मदद करके हड्डियों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पर क्या आप जानते हैं कि विटामिन-डी का उपयोग बस हड्डियों तक सीमित नहीं है?



शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को मजबूत करने में भी विटामिन-डी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली में शामिल कई कोशिकाओं पर विटामिन-डी के रिसेप्टर पाए जाते हैं और यह संक्रमण के दौरान शरीर को रोगजनकों से होने वाले नुकसान से बचाने में भी मदद करता है।

अध्ययनों में पाया गया है कि जिन लोगों में विटामिन-डी की कमी होती है उनमें संक्रामक रोगों का खतरा भी अधिक हो सकता है। पर विटामिन-डी इम्यून सिस्टम में मदद कैसे करता है, आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं?

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अच्छी सेहत के लिए विटामिन-डी - फोटो : Adobe Stock

विटामिन-डी से संक्रमण का कम होता है खतरा

विटामिन-डी के शरीर पर होने वाले प्रभावों को समझने के लिए एक बड़े विश्लेषण में 25 अध्ययनों और 11 हजार से ज्यादा लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि रोज डाइट या फिर सूर्य की रोशनी से विटामिन-डी लेने वालों में सांस से जुड़े संक्रमण का खतरा कम होता है।
 

  • विटामिन-डी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कई स्तरों पर प्रभावित करता है। अध्ययनों में पाया गया है कि प्रतिरक्षा प्रणाली की कुछ महत्वपूर्ण कोशिकाओं जैसे टी-सेल्स, बी-सेल्स और एंटीजन पहचानने वाली कोशिकाओं पर विटामिन-डी के रिसेप्टर होते हैं। इसका मतलब है कि शरीर की इम्युनिटी विटामिन-डी की मौजूदगी के प्रति प्रतिक्रिया कर सकती है।
  • विटामिन-डी शरीर की जन्मजात प्रतिरक्षा यानी संक्रमण के खिलाफ शुरुआती सुरक्षा में भी भूमिका निभाता है।
  •  शोध में पाया गया है कि विटामिन-डी कुछ ऐसे एंटीमाइक्रोबियल पदार्थों के निर्माण को बढ़ावा दे सकता है, जो वायरस और बैक्टीरिया जैसे रोगाणुओं के खिलाफ शरीर की शुरुआती प्रतिक्रिया में मदद करते हैं।
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विटामिन-डी से इम्युनिटी होती है मजबूत - फोटो : Amarujala.com/AI

विटामिन-डी कैसे करता है मदद?

शरीर में विटामिन-डी कुछ प्रतिरक्षा कोशिकाओं को संक्रमण की पहचान और उससे लड़ने में मदद करते हुए पाया गया है। मैक्रोफेज और अन्य कोशिकाएं रोगाणुओं के खिलाफ ज्यादा प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया कर सकती हैं।
 

  • इसके अलावा विटामिन-डी शरीर में कुछ प्रकार के प्रोटीन जैसे कैथेलिसिडिन और डिफेन्सिन के निर्माण को बढ़ावा देता है। ये प्रोटीन बैक्टीरिया और कुछ वायरस जैसे रोगाणुओं को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
  • विटामिन-डी फेफड़ों और श्वसन मार्ग की कोशिकाओं की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रभावित करता है। इसी वजह से विटामिन-डी की कमी में श्वसन संक्रमणों का खतरा अधिक पाया गया है।
  • संक्रमण के दौरान इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा सूजन भी नुकसान पहुंचा सकती है। विटामिन डी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को संतुलित रखने में भूमिका निभाता है।
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विटामिन-डी वाली चीजें - फोटो : Freepik.com

विटामिन-डी की पूर्ति कैसे करें

धूप को विटामिन-डी का प्राकृतिक स्रोत माना जाता है। त्वचा पर सूर्य की पराबैंगनी किरणें पड़ने पर शरीर खुद विटामिन-डी बनाता है। इसके अलावा कुछ खाद्य पदार्थों से भी विटामिन-डी मिल सकता है। फैटी फिश, अंडे की जर्दी, मशरूम और फोर्टिफाइड दूध को इसका अच्छा स्रोत माना जाता है।

हालांकि जिन लोगों में जांच में विटामिन-डी की कमी का शिकार पाया जाता है उन्हें डॉक्टर इसकी पूर्ति के लिए सप्लीमेंट्स दे सकते हैं। पर ध्यान रहे कभी भी खुद से कोई भी सप्लीमेंट नहीं लेना चाहिए, इससे नुकसान हो सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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