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चिंताजनक: 2040 तक 30 करोड़ से अधिक लोगों को हो सकती है आंखों की ये गंभीर बीमारी, कहीं आपको भी तो नहीं है खतरा?

Sun, 12 May 2024 12:51 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 12 May 2024 12:51 PM IST
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By 2040 Age-Related Macular Degeneration may affect 300 million people worldwide know its risk in hindi
आंखों से संबंधित बीमारी का खतरा - फोटो : istock

आंखें ईश्वर का वरदान हैं, हालांकि आश्चर्यजनक रूप से समय के साथ इस अंग से संबंधित बीमारियों का जोखिम काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। एक दशक में आंखों की बीमारियों के आंकड़ों पर एक नजर डालें तो पता चलता है कि बच्चे भी तेजी से इसके शिकार हो रहे हैं। कम उम्र में रोशनी कमजोर होने से लेकर चश्मे की जरूरत और उम्र बढ़ने के साथ कम दिखाई देने से लेकर मोतियाबंद जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ता जा रहा है।



आंखों से संबंधित बीमारियों के जोखिमों को लेकर हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों ने कहा जिस तरह से हमारी लाइफस्टाइल गड़बड़ होती जा रही है ऐसे में आशंका है कि साल 2040 तक 300 मिलियन (30 करोड़) से अधिक लोगों में 'एज रिलेटेड मैक्यूलर डिजनरेशन' का खतरा हो सकता है।

फिलहाल दुनियाभर में 20 करोड़ से अधिक लोग इस समस्या के शिकार हैं। एज रिलेटेड मैक्यूलर डिजनरेशन को उम्र बढ़ने के साथ कम दिखाई देने या आंखों से संबंधित गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाता है। 

By 2040 Age-Related Macular Degeneration may affect 300 million people worldwide know its risk in hindi
आंखों की बीमारी का खतरा - फोटो : istock

क्या है एज रिलेटेड मैक्यूलर डिजनरेशन?

एज रिलेटेड मैक्यूलर डिजनरेशन (एएमडी) 50 से अधिक उम्र के लोगों में गंभीर, स्थाई दृष्टि हानि का प्रमुख कारण है। ऐसा तब होता है जब आपके रेटिना का मध्य भाग (जिसे मैक्युला कहा जाता है) वह खराब हो जाता है। रेटिना आपकी आंख के पीछे प्रकाश केंद्रित करने वाले ऊतकों को कहा जाता है। यह बीमारी उम्र बढ़ने के साथ होती है, इसलिए इसे एज रिलेटेड मैक्यूलर डिजनरेशन कहा जाता है। ये आमतौर पर अंधेपन का कारण तो नहीं बनती है लेकिन दृष्टि संबंधी गंभीर समस्याएं जरूर पैदा कर सकती है।

एएमडी के कारण आंखों के लिए चित्र बना पाना भी समय के साथ कठिन होता जाता है। 

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आंखों से संबंधित समस्या - फोटो : istock

क्या कहते हैं नेत्र रोग विशेषज्ञ?

नेत्र रोग विशेषज्ञ मार्को एलेजांद्रो गोंजालेज कहते हैं, एएमडी की समस्या के लिए कई कारणों को जिम्मेदार पाया गया है। यह आपको प्रभावित करेगा या नहीं यह ज्यादातर उम्र और आनुवंशिकी से निर्धारित होता है। आंखों से संबंधित इस रोग के लक्षण और कारणों को समझना और कम उम्र से इस विकार को रोकने के प्रयास करना बहुत आवश्यक माना जाता है। 

विशेषज्ञ निश्चित नहीं हैं कि कुछ लोगों में एएमडी क्यों विकसित हो जाता है और अन्य में क्यों नहीं? कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि आपके जीन और वातावरण की कुछ स्थितियां इसके विकास का कारण हो सकती हैं। 

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आंखों की बीमारी - फोटो : istock

एज रिलेटेड मैक्यूलर डिजनरेशन का किन लोगों को अधिक खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम ने बताया एज रिलेटेड मैक्यूलर डिजनरेशन का खतरा कुछ लोगों में अधिक होता है, अपने जोखिम कारकों को जानते हुए सावधानी बरतना जरूरी है।

अध्ययनकर्ताओं ने बताया धूम्रपान करने वाले, उच्च रक्तचाप या कोलेस्ट्रॉल की समस्या के शिकार, बहुत अधिक मात्रा में संतृप्त वसा वाली चीजों का सेवन करना, मोटापा जैसी स्थितियां आंखों की इस बीमारी को बढ़ाने वाली हो सकती है। यहां ध्यान रखना जरूरी है कि एएमडी का कोई उपचार नहीं है। इसके लक्षणों को कम करने के लिए कुछ उपायों की मदद ली जा सकती है।

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आंखों को कैसे स्वस्थ रखें? - फोटो : iStock

कैसे कर सकते हैं इस बीमारी से बचाव?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कम उम्र से ही कुछ स्वस्थ आदतें अपनाकर आप भविष्य में होने वाली आंखों से संबंधित इस समस्या के जोखिमों को कम कर सकते हैं। जिन लोगों में जीन से संबंधित विकार हैं उनमें इसे रोका नहीं जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो इसे छोड़ना एएमडी से बचाव के लिए एक तरीका हो सकता है। उच्च रक्तचाप जैसी किसी भी अन्य स्वास्थ्य स्थिति का ध्यान रखें, वजन को कंट्रोल में  रखें और नियमित व्यायाम करें। दिनचर्या की ये आदतें आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने में मददगार हो सकती है।  

आहार में कुछ बदलाव जैसे फलों-सब्जियों और ओमेगा-3 फैटी एसिड (जो कुछ प्रखार की मछली और नट्स में पाए जाते हैं) को आहार में शामिल करके आंखों को स्वस्थ रखा जा सकता है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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