मस्तिष्क हमारे शरीर का नियंत्रक है, इसलिए इसमें होने वाली किसी भी समस्या का सीधा असर पूरे शरीर की सेहत पर हो सकता है। यही कारण है कि सभी लोगों को मस्तिष्क को स्वस्थ रखने वाले उपाय करते रहने की सलाह दी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाल और आहार की कई ऐसी गड़बड़ आदते हैं जिसने संपूर्ण शरीर को प्रभावित किया है, ब्रेन फॉग की समस्या भी उन्हीं में से एक है।
Brain Fog: ब्रेन में 'फॉग' होने का क्या मतलब है? जानिए इस समस्या के कारण और बचाव के बारे में
ब्रेन फॉग और इसके लक्षण
ब्रेन फॉग की समस्या वयस्कों से लेकर बुजुर्गों तक किसी को भी हो सकती है, जिन कारणों को इसके लिए जिम्मेदार माना जाता है उनमें से अधिक तनाव लेना, खराब आहार, नींद की कमी और कुछ दवाओं का सेवन करना हो सकता है। कोरोना वायरस ने भी कुछ मामलों में मस्तिष्क को क्षति पहुंचाते हुए ब्रेन फॉग के खतरे को बढ़ा दिया है।
कुछ अध्ययनों में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि जो लोग कंप्यूटर पर बहुत अधिक समय बिताते हैं इनमें भी ये समस्या हो सकती है। जिन लोगों को ब्रेन फॉग की दिक्कत होती है उनमें कई प्रकार के लक्षण हो सकते हैं।
- नींद न आना-अनिद्रा और सिरदर्द।
- ऊर्जा में कमी या थकान।
- चीजों को ठीक तरीके से याद न कर पाना।
- चीजों को तुरंत समझ पाने में कठिनाई होना।
- ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होना।
क्यों होती है ये समस्या?
सेलुलर स्तर पर, ब्रेन फॉग को मस्तिष्क में इंफ्लामेशन और हार्मोन में परिवर्तन के कारण होने वाली समस्या माना जाता है, जो आपके मूड, ऊर्जा और फोकस को निर्धारित करते हैं। हार्मोन का असंतुलित स्तर पूरे सिस्टम को अस्त-व्यस्त कर देता है। इसके अलावा, ब्रेन फॉग सिंड्रोम मोटापा, असामान्य मासिक धर्म और मधुमेह जैसी अन्य स्थितियों को भी जन्म दे सकती है।
जिन लोगों में अस्थमा या एलर्जी की समस्या होती है या फिर जो लोग चिंता, अवसाद और तनाव जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के शिकार हैं उनमें ब्रेन फॉग होने का जोखिम रहता है।
आहार और नींद पर दें विशेष ध्यान
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, चूंकि ब्रेन फॉग की समस्या किसी को भी हो सकती है, इसलिए सभी लोगों को इससे बचाव के तरीकों पर ध्यान देते रहना चाहिए। खराब लाइफस्टाइल विशेषतौर पर नींद की कमी इसका प्रमुख कारण हो सकती है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, नींद की कमी हमारे मस्तिष्क कोशिकाओं के आपसी कम्युनिकेशन को बाधित करती है, जिससे सोचने-समझने की स्पष्टता में कमी आ जाती है।
इसी प्रकार से शोध में अधिक चीनी वाली चीजों के सेवन को भी मस्तिष्क में सूजन से जोड़ा गया है, जिससे याददाश्त में दिक्कत हो सकती है। इसके कारण भी ब्रेन फॉग का खतरा रहता है।
जीवनशैली में करें सुधार
जीवनशैली को ठीक रखकर मस्तिष्क सहित संपूर्ण शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है। इसके लिए कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें।
- कंप्यूटर और मोबाइल फोन पर कम समय बिताएं।
- सकारात्मक सोच रखें और तनाव कम करने का प्रयास करें।
- आहार की पौष्टिकता का ध्यान रखें, एंटीइंफ्लामेटरी और एंटीऑक्सीडेंट वाली चीजों का अधिक सेवन करें।
- पर्याप्त नींद लें, रात में 7-8 घंटे की नींद लेना बहुत आवश्यक है।
- नियमित व्यायाम करने की आदत बनाएं।
- शराब, धूम्रपान और कॉफी के अधिक सेवन से बचें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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