ब्रेन स्ट्रोक की समस्या पिछले एक-दो दशकों में काफी तेजी से बढ़ी है, अकेले अमेरिका में ही ब्रेन स्ट्रोक के कारण हर साल 1.40 लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। इसके जोखिम, कारण और होने वाली समस्याओं के बारे में आप भी जरूर वाकिफ होंगे, पर क्या आप स्पाइनल स्ट्रोक के बारे में जानते हैं? ब्रेन स्ट्रोक की तरह ही इस समस्या का खतरा भी काफी तेजी से बढ़ता देखा जा रहा है। यह ब्रेन स्ट्रोक की तरह जानलेवा तो नहीं है पर आपके जीवन के लिए कई प्रकार की कठिनाइयों को बढ़ाने वाली जरूर हो सकती है।
सेहत की बात: ब्रेन स्टोक तो सुना होगा पर क्या स्पाइनल स्ट्रोक के बारे में जानते हैं? गंभीर होते हैं इसके लक्षण
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स्पाइन स्ट्रोक की समस्या के बारे में जानिए
यदि रीढ़ की हड्डी में रक्त का प्रवाह प्रभावित हो जाती है या कोई चीज इसे अवरुद्ध कर देती है, तो इसे अपना काम करने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाता है। इस समस्या को स्पाइनल स्ट्रोक या स्पाइन कार्ड इफ्रैक्शन कहा जाता है।
आमतौर पर रक्त के थक्के बनने (इस्केमिक स्पाइनल स्ट्रोक) या रक्तस्राव (हेमोरेजिक स्पाइनल स्ट्रोक) के कारण रीढ़ को पोषक तत्व और ऑक्सीजन युक्त रक्त की आपूर्ति बाधित हो सकती है, ऐसी स्थिति में रीढ़ की हड्डी के ऊतकों और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने लगता है, वे डेड हो सकते हैं। हालांकि स्पाइनल स्ट्रोक के मामले काफी दुर्लभ माने जाते हैं।
स्पाइन स्ट्रोक के क्या होते हैं लक्षण?
स्ट्रोक होने के बाद आपको कुछ मिनटों या घंटों में लक्षण दिखाई दे सकते हैं और समय बीतने के साथ-साथ ये बदतर होते जाते हैं। हर व्यक्ति में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे आपकी रीढ़ का कौन सा हिस्सा प्रभावित है।
- मांसपेशियों की ऐंठन-चलने में कठिनाई
- अंगों का सुन्न हो जाना।
- मूत्राशय पर नियंत्रण न होना।
- लकवा मार जाना
- सांस लेने में दिक्क्त।
- गंभीर मामलों में, स्पाइनल स्ट्रोक से मृत्यु भी हो सकती है।
किन वजहों से हो सकती है ये समस्या?
अधिकांश मामलों में स्पाइनल स्ट्रोक की समस्या रक्त वाहिकाओं के आकार में परिवर्तन के कारण होती हैं। रक्त वाहिकाओं की दीवारें मोटी होने के कारण ये संकीर्ण हो सकती हैं, जिससे खून का संचार बाधित हो जाता है। यह उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या भी है।
कुछ स्थितियां हैं जो आपमें इसके जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती हैं जैसे हाई कोलेस्ट्रॉल- हाई ब्लड प्रेशर की समस्या, हृदय रोग, मोटापा, मधुमेह, अधिक धूम्रपान या शराब का सेवन और शारीरिक निष्क्रियता की समस्या।
स्पाइन स्ट्रोक का इलाज और बचाव के तरीके
स्पाइनल स्ट्रोक की समस्या में इसके इलाज के लिए पहले उन कारणों को जानने की कोशिश की जाती है जो रक्त के प्रवाह को बाधित करने वाली होती हैं। इसके आधार पर कुछ दवाओं और गंभीर स्थिति में सर्जरी की भी आवश्यकता हो सकती है।
रीढ़ की हड्डी के स्ट्रोक के मामले बहुत दुर्लभ हैं लेकिन ये बहुत गंभीर भी हो सकते हैं। कुछ मामलों में यह लकवा का कारण बन सकती है जिससे जीवन की गुणवत्ता पर असर देखा जाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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