दुनियाभर में कोरोना के ओमिक्रॉन वेरिएंट के खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। अमेरिका में एक ही दिन में कोरोना के रिकॉर्ड 11 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए, वहीं फ्रांस में रोजाना के मामले करीब पौने तीन लाख हैं। भारत में भी हालात बिगड़ते जा रहे हैं, पिछले 24 घंटे में देश में कोरोना संक्रमण के 1.68 लाख से अधिक केस सामने आए हैं। कुल मिलाकर दुनियाभर में कोरोना का यह वैरिएंट लोगों के लिए गंभीर समस्याओं का कारण बनता जा रहा है।
Omicron Variant: वैज्ञानिकों ने निकाल लिया तोड़, इस तरीके से ओमिक्रॉन पर पा सकते हैं नियंत्रण
ओमिक्रॉन बना हुआ है बड़ी मुसीबत
नेचर जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट की जैविक विशेषताओं के बारे में अभी भी बहुत स्पष्ट तरीके से पता नहीं चल पाया है। यह वैक्सीन की दोनों डोज से शरीर में बनीं प्रतिरक्षा को आसानी से चकमा दे सकता है, हालांकि शोध से यह पता चलता है कि लोगों को वैक्सीन की बूस्टर डोज देकर ओमिक्रॉन को बेअसर किया जा सकता है। ओमिक्रॉन पर चिकित्सीय एंटीबॉडी की प्रभावकारिता और टीकों से शरीर में बनी प्रतिरक्षा को जानने के लिए शोध कर रही वैज्ञानिकों की टीम ने यह जानकारी दी है।
अध्ययन में क्या पता चला?
बेल्जियम स्थित केयू ल्यूवीना विश्वविद्यालय के शोधकर्ता ने कोरोना संक्रमितों के सैंपल की जांच कर इस बारे में समझने की कोशिश की। वैज्ञानिकों ने मोनोक्लोनल एंटीबॉडी के परीक्षण के निष्कर्ष में पाया कि ज्यादातर एंटीबॉडीज डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन के खिलाफ 3-80 गुना तक कम प्रभावी थीं। वैज्ञानिकों ने वैक्सीन की प्रभाविकता को जानने के लिए 5 माह के अन्तराल पर दूसरी खुराक लेने वाले लोगों के भी सैंपल का अध्ययन किया। इस दौरान पाया गया कि यह तरीका भी ओमिक्रॉन को बेअसर करने में ज्यादा प्रभावी नहीं माना जा सकता है।
बूस्टर डोज ले चुके लोगों के सैंपल का अध्ययन
एक अन्य परीक्षण में वैज्ञानिकों ने उन लोगों के भी सैंपल लिए जिन्होंने एक महीने पहले फाइजर की बूस्टर डोज ली थी। इस परीक्षण के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने पाया कि ऐसे लोग ओमिक्रॉन से मुकाबले के लिए ज्यादा सक्षम हो सकते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि लोगों को वैक्सीन की बूस्टर खुराक देकर उनमें ओमिक्रॉन वैरिएंट के खिलाफ मजबूत प्रतिरक्षा विकसित की जा सकती है जो इस वैरिएंट के खिलाफ असरदार साबित हो सकती है।
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?
अध्ययन के निष्कर्ष में शोध के लेखकों में से एक और वरिष्ठ वैज्ञानिक ओलिवियर श्वार्ट्ज बताते हैं, इस शोध से पता चलता है कि बूस्टर खुराक, ओमिक्रॉन के जोखिम को कम करने में कारगर साबित हो सकती है। हालांकि हमें यह जानने के लिए और अधिक शोध करने की आवश्यकता है कि बूस्टर डोज से कितने समय तक सुरक्षा मिल सकती है? इस अध्ययन से पता चलता है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट टीकों और मोनोक्लोनल एंटीबॉडी की प्रभावशीलता को बाधित करता है, हालांकि बृहद स्तर पर बूस्टर डोज देना लोगों के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है।
----------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।