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विशेषज्ञ से जानिए: क्या पहली लहर में भी थे ब्लैक फंगस के केस? क्यों लेता जा रहा है महामारी का रूप

Sat, 22 May 2021 04:39 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sat, 22 May 2021 04:39 PM IST
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black fungus cases in Covid first wave, how mucormycosis occurs
म्यूकोरमाइकोसिस के बढ़ते मामले - फोटो : istock

कोरोना की दूसरी लहर के हाहाकार के बीच देश में म्यूकोरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) के तेजी से बढ़ते मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। यह घातक संक्रमण अब देश में तेजी से पैर पसार रहा है। 22 मई यानी शनिवार के आंकड़ों के मुताबिक देश में 8,848 से ज्यादा लोग इस संक्रमण का शिकार हो चुके हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड के इलाज के दौरान अधिक मात्रा में स्टेरॉयड दवाओं के इस्तेमाल के कारण ब्लैक फंगस संक्रमण के मामलों में इस तरह की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।


इस बीच लोगों के मन में सवालआ रहे हैं कि क्या पहली लहर में म्यूकोरमाइकोसिस के केस नहीं थे? दूसरी लहर के दौरान किन गलतियों ने इस तरह की गंभीर समस्या को बढ़ावा दे दिया है, जोकि अब एक और महामारी का रूप ले रहा है?

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आक्रामक रूप लेता जा रहा है संक्रमण - फोटो : Social media

दूसरी लहर में म्यूकोरमाइकोसिस का आक्रामक रूप
कोविड संक्रमण से ठीक हो रहे, विशेषकर डायबिटिक रोगियों में ब्लैक फंगस के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। दूसरी लहर में ब्लैक फंगस संक्रमण के कारणों के बारे में अहमदाबाद में महामारी विशेषज्ञ डॉ दीपक बताते हैं, 'कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण का स्तर और रोग की गंभीरता काफी अधिक रही है। ऐसे में रोगियों के इलाज के लिए स्टेरॉइड दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल करना पड़ा। ये दवाएं स्वाभाविक रूप से शुगर के स्तर को बढ़ा देती हैं। इसके अलावा कई तरह की इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं इम्यूनिटी को और दबा देती हैं, जिसके चलते संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। 

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गंभीर संक्रमण के मामले आ रहे हैं सामने - फोटो : social media
क्या पहली लहर में नहीं थे ब्लैक फंगस के केस
अहमदाबाद में ईएनटी विशेषज्ञ डॉ हार्दिक शाह बताते हैं कि ऐसा नहीं है कि म्यूकोरमाइकोसिस के मामले सिर्फ दूसरी लहर में ही हैं। पहली लहर में भी इसके केस थे लेकिन नाम मात्र के। कोविड की दूसरी लहर में यह संक्रमण कोविड होने के 10-15 दिनों में ही सामने आ जा रहा है, जबकि पहली लहर में इसके मामले कोविड संक्रमण होने के काफी दिनों बाद दिखते थे। पहली लहर में यह आंखों को नुकसान पहुंचाते हुए कम देखा गया था जबकि इस बार इसके गंभीर संक्रमण सामने आ रहे हैं।
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ब्लैक फंगस बनता जा रहा है महामारी - फोटो : Social media
क्यों महामारी का रूप लेता जा रहा है संक्रमण
डॉ दीपक बताते हैं कोरोना की दूसरी लहर का असर ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा देखने को मिल रहा है। इन स्थानों पर अब भी लोगों को कोरोना के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं होती है। संभावित लक्षण दिखते ही यहां के लोग झोलाछाप डॉक्टरों से दवाइयां लेना शुरी कर देते हैं। एक से फायदा नहीं हुआ तो दूसरा, दूसरे से नहीं हुआ तो तीसरा, ऐसे-ऐसे कोविड के अस्पताल तक पहुंचने से पहले वह 4-5 डॉक्टरों से अलग-अलग दवा कर चुके होते हैं। इसके अलावा ऐसे डॉक्टर आमतौर पर एक ही पैटर्न की दवाओं को प्रयोग में लाते हैं। लिहाजा, यह माना जा सकता है कि दूसरी लहर में तमाम तरह की गलत दवाओं और बिना जरूरत के भी स्टेरॉयड के सेवन के कारण हमने इस फंगस को खुद पर हावी होने का अवसर दे दिया है।
 
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नोटीफाइड डिजीज में शामिल हुआ म्यूकोरमाइकोसिस - फोटो : iStock
कई राज्यों ने घोषित कर दिया है नोटीफाइड डिजीज
देश के कई हिस्सों में म्यूकोरमाइकोसिस के मामलों को तेजी से बढ़ते हुए देख स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस संक्रमण को नोटीफाइड डिजीज के रूप में घोषित कर दिया है। इसका मतलब है कि सभी सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों को संक्रमण को मामलों के बारे में सरकार को सूचित करना होगा। इसके अलावा तमिलनाडु, ओडिशा, गुजरात, चंडीगढ़ तेलंगाना और राजस्थान ने इसे राज्य में महामारी के रूप में घोषित कर दिया है।

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नोट: यह लेख महामारी विशेषज्ञ डॉ दीपक और ईएनटी विशेषज्ञ डॉ हार्दिक शाह से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें तथा किसी भी दवा का सेवन बिना डॉक्टरी सलाह के न करें।
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