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Glucoma: बच्चों में भी बढ़ता जा रहा है 'काला मोतियाबिंद' का खतरा, जानिए कैसे करें इस गंभीर समस्या से बचाव

Sat, 29 Mar 2025 07:38 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 29 Mar 2025 07:38 PM IST
सार

ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद आंखों से संबंधित एक गंभीर बीमारी है, जो आंखों में तरल पदार्थ के बढ़ते दबाव के कारण होती है। आमतौर पर ये समस्या वयस्कों में देखी जाती रही है पर बच्चे भी इसका शिकार हो सकते हैं। जानिए इससे बचाव के लिए क्या करें?

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Black cataract glucoma risk in children glaucoma hone ke kya karan hai kaise bache
बच्चों में बढ़ती आंखों की समस्या - फोटो : Freepik.com

आंखों से संबंधित समस्याएं वैश्विक स्तर पर बढ़ती जा रही हैं, बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी इसका शिकार हो रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भारत में धुंधला दिखाई देने, ड्राई आइज, मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, तथा एज-रिलेटेड मैक्यूलर डिजनरेशन का खतरा पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है। हालिया रिपोर्ट्स में स्वास्थ्य विशेषज्ञ ओपीडी में ग्लूकोमा के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता जता रहे हैं। ग्लूकोमा को आम बोलचाल की भाषा में काला मोतियाबिंद के नाम से भी जाना जाता है। 



ग्लूकोमा आंखों की बीमारियों का एक समूह है जो ऑप्टिक नर्व्स को नुकसान पहुंचाती है, जिसके परिणामस्वरूप आंखों की रोशनी जाने या अंधेपन का खतरा हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को कम उम्र से ही आंखों की इस समस्या से बचाव को लेकर सावधानी बरतते रहना चाहिए। आमतौर पर ये समस्या वयस्कों में देखी जाती रही है पर बच्चे भी इसका शिकार हो सकते हैं।

Black cataract glucoma risk in children glaucoma hone ke kya karan hai kaise bache
ग्लूकोमा और इसके कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com

ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद) के बारे में जानिए

ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद आंखों की एक गंभीर बीमारी है, जो आंखों में तरल पदार्थ के बढ़ते दबाव के कारण होती है। दरअसल, आंखें एक तरल पदार्थ से भरी होती है, जो उसे पोषण और आकार देता है। पुराना तरल आंखों में मौजूद एक जालीदार परत और एक छोटे से छेद से बाहर निकल जाता है और नया तरल इसकी जगह ले लेता है।

जब किसी वजह से आंखों का यह तरल पदार्थ बाहर नहीं निकल पाता है, तो आंख के अंदर दबाव (इंट्राओक्युलर प्रेशर) बढ़ने लगता है। इस दबाव के कारण आंख के पीछे की नसें क्षतिग्रस्त होने लगती हैं और इनके काम करने की क्षमता खत्म हो जाती है। 

Black cataract glucoma risk in children glaucoma hone ke kya karan hai kaise bache
आंखों की करें देखभाल - फोटो : Freepik.com

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अनयमित जीवनशैली और नशे की आदत को ग्लूकोमा का खतरा बढ़ाते हुए देखा जा रहा है। अगर शुरुआत में ही इसकी पहचान हो जाए तो इससे होने वाली दृष्टिहीनता से बचा जा सकता है।

ग्लूकोमा की समस्या पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए या फिर इसका उपचार न कराया जाए तो यह दृष्टिहीनता का भी कारण बन सकता है। आंखों की अन्य बीमारियों में खोई हुई रोशनी इलाज से वापस लाई जा सकती है, लेकिन ग्लूकोमा में आंखों की रोशनी का आना मुश्किल होता है।

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Black cataract glucoma risk in children glaucoma hone ke kya karan hai kaise bache
बच्चों में आंखों की समस्या - फोटो : Freepik.com

बच्चों में भी ग्लूकोमा का खतरा

बच्चों में ग्लूकोमा के मामले वयस्कों की अपेक्षाकृत कम होते हैं, लेकिन फिर भी इसके लक्षणों को जांचते रहें। बच्चों में इसके लक्षणों की बात करें तो, उनकी आंखें बड़ी लगने लगती हैं। लगातार आंसू आते रहते हैं। रोशनी में उन्हें आंखें खोलने में दिक्कत होती है। पिछले कुछ वर्षों में बच्चों में ये दिक्कत तेजी से बढ़ी है।

जानिए इसके लक्षण और कारण

ग्लूकोमा आनुवांशिक, आंख पर चोट, उम्र का बढ़ना, हाई बीपी, डायबिटीज और आंखों में संक्रमण की वजह से हो सकता है। अगर किसी के परिवार में पहले से ग्लूकोमा इतिहास रहा है तो उन्हें आंखों से जुड़ी जांच करवाते रहना चाहिए। आंखों की चोट से ग्लूकोमा का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए खेलकूद और अन्य गतिविधियों के दौरान चश्मा पहनें।

  • ग्लूकोमा से पीड़ित अधिकांश लोगों को शुरुआत में कोई भी समस्या महसूस नहीं होती है। समस्या अत्यधिक बढ़ने पर इसके संकेत दिखते हैं।
  • ग्लूकोमा के कारण अक्सर सिरदर्द होना, आंखों में तेज दर्द या भारीपन, धुंधला दिखना, अचानक दृष्टि का जाना, मतली या उल्टी, बार-बार चश्मे का नंबर बदलना, रात को कम या न दिखना, आंखें लाल हो सकती हैं।
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आंखों का रखें देखभाल - फोटो : Freepik.com

बचाव के लिए क्या उपाय किए जाएं?

सफजरजंग अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग नरूला बताते हैं,  धूम्रपान, अनियमित आहार और तनाव से  ग्लूकोमा का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना और हरी सब्जियां खाना ग्लूकोमा की रोकथाम में मदद कर सकता है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह और थाइरॉयड से पीड़ित लोगों को ग्लूकोमा होने का खतरा अधिक रहता है, इसलिए इन्हें नियंत्रित रखें। 

  • मोटापा ग्लूकोमा के जोखिम से जुड़ा हुआ है, इसलिए स्वस्थ वजन बनाए रखें। तनाव भी आंखों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, इसके लिए ध्यान और मेडिटेशन को दिनचर्या में शामिल करें।
  • अगर आपकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है तो वर्ष में एक बार नियमित रूप से आंखों की संपूर्ण जांच जरूर कराएं।
  • यह इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि कई बार आंखों पर बढ़ रहा दबाव हम महसूस नहीं कर पाते हैं और समस्या बढ़ती जाती है।
  • जांच करा लेने से ग्लूकोमा जल्दी पकड़ में आ जाता है और समय पर सही उपचार मिल जाता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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