कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच दुनियाभर को इसकी एक सुरक्षित और कारगर वैक्सीन का इंतजार है। रूस और चीन के बाद भारत, ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी आदि देश भी वैक्सीन पर कामयाबी के करीब हैं। वैक्सीन का ट्रायल सफल होने और मंजूरी मिलने के बाद इसके उत्पादन से लेकर वितरण और टीकाकरण में देरी न हो, इसके लिए अभी से ही तैयारियां की जा रही हैं। वैक्सीन के उत्पादन के बाद सबसे बड़ी चुनौती इसके भंडारण और वितरण को लेकर है। इसके लिए कोल्ड चेन जरूरी है, क्योंकि ज्यादा तापमान में वैक्सीन स्टोर नहीं की जा सकती। अब भारतीय वैज्ञानिकों ने इसका तोड़ ढूंढ निकाला है।
कोरोना के टीके पर भारत को बड़ी कामयाबी, 100 डिग्री तापमान में भी खराब नहीं होगी वैक्सीन
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दरअसल, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के वैज्ञानिकों ने ऐसी कोरोना वैक्सीन तैयार की है, जिस पर गर्मी या बढ़ते तापमान का असर नहीं होगा। वैज्ञानिकों का दावा है, यह वैक्सीन हीट-टॉलरेंट है और 100 डिग्री सेंटीग्रेट तक के तापमान पर भी वैक्सीन पर असर नहीं पड़ेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसे 37 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान पर एक महीने तक रखा जा सकेगा।
स्पाइक प्रोटीन से बनाई गई वैक्सीन
बायोलॉजिकल केमेस्ट्री जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, इस वैक्सीन को विकसित करने के लिए कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन के एक हिस्से का इस्तेमाल किया गया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि ट्रायल के दौरान इस वैक्सीन ने शानदार इम्यून रेस्पॉन्स यानी प्रतिरोधी प्रतिक्रिया दिखाई है।
सुदूर इलाकों में पहुंच आसान होगी
वैज्ञानिकों के मुताबिक, शोध के आधार पर तैयार यह नई वैक्सीन खासतौर पर मध्यम आय वर्ग वाले देशों में भी असरदार साबित होगी, जहां आमतौर पर वैक्सीन रखने के लिए शीत भंडारण की व्यवस्था नहीं है। यानी ऐसे देश, जहां महंगे कूलिंग इक्विपमेंट की उपलब्धता चुनौती है, वहां सुदूर इलाकों में भी वैक्सीन पहुंचाया जा सकेगा।
वैक्सीन विकसित करने वाले दल के प्रमुख राघवन वरदराजन का कहना है कि फंड मिलने के बाद अब वैक्सीन के क्लीनिकल डेवलपमेंट और अध्ययन की तैयारियां तेज हो गई हैं। अब वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावकारिता को समझने के लिए इसका इंसानों पर ट्रायल किया जाएगा। ह्यूमन ट्रायल के लिए वैक्सीन का पहला बैच तैयार हो रहा है।